महाराष्ट्र के सांगली जिले के इस्लामपुर शहर का नाम बदलकर ‘ईश्वरपुर’ करने के प्रस्ताव को भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने अपनी मंजूरी दे दी है। यानी अब इस्लामपुर को ‘ईश्वरपुर’ के नाम से जाना जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद ईश्वरपुर में जश्न का माहौल है। स्थानीय निवासियों ने इस अवसर पर मिठाइयां बांटी और पटाखे फोड़े। दरअसल, 18 जुलाई, 2025 को राज्य सरकार ने इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर करने के नगरपालिका के प्रस्ताव को विधानसभा में पारित किया था और अंतिम मंजूरी के लिए इसे केंद्र सरकार को भेज दिया था। 14 अक्टूबर को भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने नाम बदलने की पुष्टि करते हुए एक अध्यादेश जारी किया। इस स्वीकृति के बाद भारतीय डाक विभाग और भारतीय रेलवे को अपने सिस्टम और कार्यालयों में शहर का नाम अपडेट करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जांच के बाद दी मंजूरी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव की जांच और स्थल सत्यापन के बाद इसे मंजूरी दी। इस्लामपुर नगर परिषद ने 4 जून 2025 को संकल्प संख्या 825 के तहत शहर का नाम ‘ईश्वरपुर’ करने का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव को सांगली के वरिष्ठ डाकघर अधीक्षक और मध्य रेलवे, मिराज के सहायक मंडल अभियंता ने भी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर समर्थन दिया था। विभाग के अनुसार, प्रस्तावित नाम परिवर्तन सभी मान्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप है।
ईश्वरपुर में जश्न का माहौल
ईश्वरपुर में जश्न का माहौल है। स्थानीय लोग मिठाइयां बांटकर और पटाखे फोड़कर सरकार के फैसले का स्वागत कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बदलाव क्षेत्र की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को सम्मान देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। कई निवासियों ने इस बदलाव को वर्षों के अभियान के बाद मिली जीत बताया है। लोगों को उम्मीद है कि इस नई पहचान के साथ-साथ उनके शहर में विकास के काम भी तेजी से होंगे और मूलभूत सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा।
ऐतिहासिक फैसला
भाजपा सांगली जिला अध्यक्ष सम्राट महादिक ने कहा, “यह केवल नाम परिवर्तन की बात नहीं है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान का सम्मान है। ईश्वरपुर नाम हमारी परंपरा और आस्था से जुड़ा है। पिछले कई वर्षों से नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक नेताओं द्वारा इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर करने की लगातार मांग की जा रही थी। आखिरकार यह ऐतिहासिक मांग पूरी हो गई।”
ऐसे तय किया गया ‘ईश्वरपुर’ नाम
नाम बदलने के लिए देवनागरी और रोमन वर्तनी में ‘ईश्वरपुर’ तय किया गया। यह लिप्यंतरण (ट्रांसलिटरेशन) भारतीय लिपियों की ध्वनियों को सटीक रूप से दर्शाने के लिए डायक्रिटिक्स पद्धति के अनुसार किया गया है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने यह भी कहा कि नाम परिवर्तन का गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उसकी एक प्रति उनके देहरादून स्थित मुख्य कार्यालय और पुणे के महाराष्ट्र एवं गोवा भू-स्थानिक निदेशालय को भेजी जाए।
पहले भी बदल चुके हैं कई शहरों के नाम
इस फैसले को सांगली जिले के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वैसे महाराष्ट्र में शहरों के नाम बदलने का यह चलन कोई नया नहीं है। इससे पहले औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर, उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव और अहमदनगर का नाम परिवर्तन कर अहिल्यानगर किया जा चुका है।

















