भारत के युवाओं के सड़कों पर न उतरने से परेशान है बीबीसी? लोगों ने कहा “पहले अपनी लड़कियां बचाएं!”
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भारत के युवाओं के सड़कों पर न उतरने से परेशान है बीबीसी? लोगों ने कहा “पहले अपनी लड़कियां बचाएं!”

भारत विरोधी ब्रिटिश मीडिया बीबीसी भारत में जेन जेड प्रोटेस्ट नहीं होने से परेशान है। उसने एक लेख में दुष्प्रचार किया कि भारत के युवा सड़क प्रदर्शनों से बचते हैं क्योंकि उन्हें "राष्ट्र-विरोधी" करार दिए जाने का डर है, क्षेत्रीय विभाजन, आर्थिक दबाव और कथित अक्षमता के कारण।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Oct 25, 2025, 11:34 am IST
inविश्व, विश्लेषण

बीबीसी अर्थात ब्रिटिश ब्रॉडकास्ट कॉर्पोरेशन का रवैया भारत के प्रति हमेशा से ही दुराग्रहपूर्ण रहा है और साथ ही इसका दृष्टिकोण और पत्रकारिता विभाजनकारी एवं औपनिवेशिक मानसिकता से भरी हुई होती है। ऐसा कई बार देखा गया है और कोरोना काल में भी इसे देखा गया था कि भारत जैसा देश जिस प्रकार इस चुनौती का सामना कर रहा था तो औपनिवेशिक मीडिया, जिसमें बीबीसी भी शामिल है, भारत की नकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत कर रहा था।

भारत की ताकत से हिला BBC 

अब बीबीसी नकारात्मक रिपोर्टिंग से बढ़कर एक ऐसे मानसिक अवसादग्रस्त मीडिया में बदल गया है, उसे अब भारत के युवाओं को लेकर ये बेचैनी हो रही है कि आखिर ये पीढ़ी इस सीमा तक देश की जड़ों से जुड़ी हुई क्यों है? क्यों अभी तक औपनिवेशिक मीडिया द्वारा भारत की नकारात्मक तस्वीर का भी उस पर प्रभाव नहीं हो रहा है, और क्यों यह पीढ़ी विद्रोह में नहीं, अपितु संवाद के माध्यम से समाधान में विश्वास करती है।

बीबीसी ने 23 अक्टूबर को एक अपना विलाप प्रकाशित किया है। इस विलाप का शीर्षक है “Gen Z rising? Why young Indians aren’t taking to the streets” अर्थात जेन जेड जाग रही है? क्यों युवा भारतीय सड़कों पर नहीं आ रहे हैं?”

भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसा आंदोलन चाहता है बीबीसी

बीबीसी ने इस रिपोर्ट में यह लिखा है कि नेपाल और अफ्रीकी देशों में जिस प्रकार से युवा पीढ़ी सड़कों पर आई और उसने चलती हुई सरकार गिरा दी, मगर भारत में तमाम समस्याओं के बावजूद भी युवा पीढ़ी सड़कों पर नहीं उतर रही है। बीबीसी की यह पीड़ा बहुत हैरान करने वाली है, क्योंकि यह प्रश्न उठाती है कि आखिर एक मीडिया संस्थान की इच्छा इस बात में क्यों है कि किसी देश की युवा पीढ़ी अपने देश मे अराजकता क्यों नहीं फैला रही है?

भारत की युवा ही नहीं अपितु हर पीढ़ी अराजकता को नकार चुकी है और वह अपना निर्णय लोकतंत्र में वोट के माध्यम से देती है। बीबीसी सहित हर औपनिवेशिक मीडिया को यह ध्यान में रखना चाहिए कि भारत की युवा पीढ़ी, प्रौढ़ पीढ़ी एवं वृद्ध पीढ़ी ने एक सामूहिक क्रांति की थी, और वह भी अराजकता के बिना, जब वर्ष 2014 में उसने अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करते हुए अपने मन की सरकार को चुना था और परिवरवाद को नकार दिया था।

जिन मुद्दों को लेकर दूसरे देशों की युवा पीढ़ी सड़कों पर उतरी है, उन्हीं मुद्दों जैसे कि अराजकता, परिवारवाद, घोटालों, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक द्वेष, जातीय द्वेष, आतंकवाद, देश पर हमले आदि के मामलों को लेकर भारत की सरकार ने वर्ष 2014 में जो क्रांति की थी, उस क्रांति के सामने विश्व की हर क्रांति बौनी है, क्योंकि यह क्रांति युवाओं ने किसी अराजकता का सहारा न लेकर उस लोकतान्त्रिक अधिकार के माध्यम से की थी, जिसने सबसे पहली बार भारत में ही जन्म लिया था।

इसे भी पढ़ें: UNSC में भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा, कहा-POJK में सैन्य कब्जा, क्रूरता और दमन कर रहा पड़ोसी देश

भारत में सत्ता के लिए नहीं रहा रक्तपात का इतिहास

भारत में सत्ता के लिए जनता द्वारा हिंसा या रक्तपात का इतिहास सहज नहीं रहा है। हाँ, आतताइयों अर्थात मुगल और अंग्रेजों के शासन में अपने ऊपर किये जा रहे अत्याचारों का सामना हर युग की युवा पीढ़ी ने किया है और यह वही इतिहास है जिसे औपनिवेशिक मीडिया दबाने का प्रयास करता है। औपनिवेशिक मीडिया दरअसल आज भी उसे मानसिकता में जिंदा है, जो मानसिकता भारत की युवा पीढ़ी को समझती ही नहीं है। और जो मानसिकता भारत के इतिहास को सल्तनत काल या फिर मुगल काल से ही मानती है। और मुगल काल में भी वह भारत की हिन्दू जनता के विद्रोहों को छिपाती है।

भारत के खिलाफ विष वमन करते रहे हैं बीबीसी जैसे संस्थान

वह भारत के युवा नायकों, जैसे शिवाजी, गोकुल जाट, हेमू, छत्रसाल, महाराणा प्रताप के इतिहास को छिपाती है और उसे लगता है कि भारत में जो वर्तमान में राष्ट्रवादी सरकार है, वह युवाओं की सरकार नहीं है। बीबीसी जैसे मीडिया संस्थान भारत के प्रति विष भरते रहे हैं और उन्हें ऐसा लगता है कि उनके इस विषैले प्रचार के कारण भारत की युवा पीढ़ी उन जड़ों को त्याग देगी, जिनमें संवाद और लोकतंत्र महत्वपूर्ण है। भारत की युवा पीढ़ी अपने संसाधनों के महत्व को समझती है और उसे यह भी पता है कि सरकार को गिराने के लिए कौन सा रास्ता उचित है। वह सरकार गिराती नहीं है, अपितु बदलती है।

बीबीसी ने राहुल गांधी के उस बयान को भी जगह दी है, जिसमें राहुल गांधी ने यह कहा था कि वे जेन जेड वोट चोरी को रोकेगी और संविधान की रक्षा करेगी। तो क्या बीबीसी चाहती है कि युवा पीढ़ी सड़कों पर उतरे और अपने देश में हिंसा करे और उसका लाभ राहुल गांधी उठाएं?

इस रिपोर्ट में अन्ना हजारे के आंदोलन का उल्लेख है और निर्भया कांड का भी कि किस प्रकार से युवा सड़कों पर आए थे और फिर सीएए के विरोध में आए हुए कथित युवाओं का भी उल्लेख है और साथ ही उस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस में पुलिस के साथ छात्रों की हिंसक झड़पों का भी उल्लेख है। उमर खालिद की गिरफ़्तारी और दिल्ली दंगों में उसकी संलितप्तता का भी उल्लेख है कि उसे अभी तक जमानत नहीं मिली है।

बीबीसी की बेचैनी का कारण

बीबीसी का कहना है कि भारत के कुछ राजनीतिक दल विद्रोह करने वालों को “राष्ट्रविरोधी” घोषित कर देते हैं, इसलिए युवा डर गए हैं और सड़कों पर नहीं निकल रहे हैं, मगर साथ ही वह यह भी लिखता है कि सीएसडीएस – लोकनीति के चुनावों के बाद के सर्वे में यह कहा गया है कि सत्ताधारी हिन्दू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी को युवाओं का समर्थन प्राप्त है और लगभग 40% समर्थन उन्हें 2019 में मिला था और 2024 में इसमें बहुत ही मामूली गिरावट आई है।

अब बीबीसी से यह पूछा जाना चाहिए कि क्या वोट के माध्यम से सरकार को बदलने वाले युवा जेन जेड नहीं है? या फिर अराजकता करने वाले और बहकावे में आए हुए बच्चे ही जेन जेड हैं, जिनके कंधे पर वे लोग बंदूक रखकर चलाते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से चुनाव नहीं जीत पाते हैं, जैसा कि बांग्लादेश में हुआ।

सोशल मीडिया पर बीबीसी को लोगों ने लताड़ा

इस लेख के कारण सोशल मीडिया पर भी बीबीसी को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। एक यूजर ने लिखा कि इस रिपोर्ट का ट्रांसलेशन इस प्रकार होगा कि “हमने भारत में सरकार बदलने के लिए और जेलेन्सकी 2.0 को भारत में स्थापित करने का हर प्रयास कर लिया है, जियसे भारत और चीन में युद्ध शुरू हो जाए, मगर हम फेल हो गए!”

कई यूजर्स ने प्रश्न किया कि आखिर ब्रिटेन की जेन जेड अपने इस्लामीकरण के खिलाफ सड़कों पर क्यों नहीं उतर रही है? और यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है कि ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स, जिनमें पाकिस्तानी मूल के आदमी थे, ने हजारों श्वेत ब्रिटिश लड़कियों के जीवन को बर्बाद कर दिया, मगर बीबीसी को यह चिंता नहीं हुई कि ब्रिटेन के युवाओं का क्या होगा?

एक यूजर ने लिखा कि पहले अपनी लड़कियों को मुस्लिमों से बचाओ और भारत का युवा बीबीसी जैसे शैतानों को भाव नहीं देता।

यह अपने आप में बहुत ही हैरानी और अचंभित करने वाली बात है कि बीबीसी को जिस समय ब्रिटेन में श्वेत लड़कियों के साथ हो रहे संस्थागत और मजहबी अत्याचारों पर विमर्श बनाना चाहिए और अपनी लड़कियों को बचाना चाहिए, उसकी ऊर्जा इस बात पर लग रही है कि भारत की जेन जेड सड़कों पर क्यों नहीं है?

Topics: youth protestsstreet activismसोशल मीडियाsocial mediaबीबीसीजेन जेड भारतभारत में युवाओं के सड़कों पर नहीं उतरने से परेशान बीबीसीयुवा विरोधसड़क सक्रियताGen Z IndiaBBC worried about youth not taking to the streets in India
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