तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख ‘फील्ड मार्शल’ असीम मुनीर को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि “मर्द का बच्चा है तो कोहाट आकर मुकाबला कर”! टीटीपी ने इस वक्त पाकिस्तानी फौज को परेशान कर रखा है। फौज इस नाम से भी घबराने लगी है और इस गुट के इलाके में जाने से कतराने लगी है। टीटीपी ने पाकिस्तानी फौज के सैकड़ों सैनिकों की जानें ली हैं और उसका यह आक्रामक रुख घटने की बजाय बढ़ता ही दिख रहा है। टीटीपी के सरगना की यह चुनौती केवल एक उकसावा भर नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और फौज को भी बेअसर दिखाता है।
टीटीपी की ओर से पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर को यह चुनौती बताते हैं, 21–22 अक्तूबर 2025 के बीच सोशल मीडिया और अपने प्रचार तंत्र पर जारी वीडियो के जरिए दी गई थी। कहा जा रहा है कि इस वीडियो के जारी होने के पीछे टीटीपी और पाकिस्तानी सेना के बीच 8 अक्तूबर को खैबर पख्तूनख्वा के कुर्रम जिले में हुआ भीषण संघर्ष है, जिसमें आतंकियों ने 22 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया था, हालांकि सेना ने 11 मौतों की पुष्टि की थी।
टीटीपी के कमांडर काजिम पर पाकिस्तानी सरकार ने 10 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। इसी आतंकी सरगना ने अब अपना वीडियो बनाकर असीम मुनीर को चुनौती दी है। वीडियो में उसने कहा कि वह सैनिकों को ‘भेड़-बकरियों की तरह’ मरने न भेजे, बल्कि ‘अगर मर्द है तो खुद मैदान में उतरे’। उसने कहा है कि अगर ‘मां का दूध पिया है तो कोहाट आकर सामना करे।’ इस वीडियो में कुर्रम हमले की फुटेज भी शामिल की गई है, जिसमें जले हुए सैन्य वाहन और कब्जाए गए हथियार दिखाए गए हैं। जिन्ना के देश की सेना इस वीडियो की जांच पड़ताल में जुट गई है।पाकिस्तानी सेना या असीम मुनीर की ओर से अभी तक इस वीडियो या चुनौती पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

उल्लेखनीय है कि टीटीपी लंबे समय से पाकिस्तान सत्ता अधिष्ठान के विरुद्ध जंग छेड़े हुए है। 2007 में इसके गठन के बाद से ही यह आतंकी संगठन पाकिस्तान की सैन्य और सरकारी संस्थाओं को इस्लाम की अपनी कट्टर मान्यताओं के अनुरूप ढालने के लिए दबाव में लाने की कोशिश करता रहा है। 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने ‘ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब’ और बाद में ‘रद्द-उल-फसाद’ जैसे अभियान चलाकर टीटीपी को कमजोर करने की कोशिश की थी। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं।
कारण यह कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के निकलने के बाद 2021 से टीटीपी ने अपनी ताकत फिर से हासिल करनी शुरू कर दी थी। अफगान तालिबान के सत्ता में आने से पाकिस्तान के अनुसार, उसे पनाह और दिमागी सहारा मिला है।
मुनीर को कोहाट आने की चुनौती क्यों दी गई है, इसके पीछे भी एक वजह है। यह पाकिस्तानी सेना का पारंपरिक ठिकाना और पश्तून बेल्ट के निकट एक संवेदनशील इलाका है। इस जगह आकर मुकाबला करने की चुनौती देने को सेना की साख को खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
जिन्ना के देश के फौज प्रमुख असीम मुनीर के सामने इस वक्त मुख्य चुनौती है टीटीपी और बलूच विद्रोही गतिविधियों से निपटना। इसके चलते ही पाकिस्तान अफगान सीमा पर नियंत्रण संबंधी मुश्किलों से जूझ रहा है।
टीटीपी का यह बयान सीधे तौर पर मुनीर की नेतृत्व क्षमता और सेना की आंतरिक एकता की परीक्षा है। सेना की पारंपरिक नीति ‘नो नेगोशिएशन विद टेररिस्ट्स’ रही है, लेकिन अतीत में इमरान खान की सरकार ने उनसे बातचीत की कोशिश की थी जो असफल रही थी। अब यदि असीम मुनीर कठोर रुख अपनाते हैं, तो सेना और आतंकियों के बीच संघर्ष और तीव्र हो सकता है, लेकिन अगर वे ढीलापन दिखाते हैं, तो यह टीटीपी को और शह ही देगा।
इस वीडियो से कहीं न कहीं यह संदेश गया है कि टीटीपी ने न केवल मैदाने जंग में पाकिस्तानी फौज को निशाने पर लिया है, बल्कि मानसिक जंग में भी उसे छकाने की कोशिश की है। यही वजह है कि अब जिन्ना के देश की अवाम प्रश्न उठाने लगी है कि क्या उसके देश की सेना इतने मोर्चों पर कुछ कर भी पा रही है कि नहीं! बीते कुछ महीनों में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकी हमलों का बढ़ना इस शक को और गहरा करता है।
बेशक, टीटीपी की इस चुनौती के बाद पाकिस्तान की सेना पर दबाव बढ़ेगा कि वह सख्त कार्रवाई करे। पिछले कुछ महीनों में असीम मुनीर ने कई बार कहा भी है कि पाकिस्तान किसी भी सशस्त्र समूह को देश की संप्रभुता को चुनौती नहीं देने देगा। अतः संभव है कि आने वाले हफ्तों में सेना सीमावर्ती इलाकों में ऑपरेशन तेज करे।
लेकिन दिक्कत यह है कि पाकिस्तान कंगाली झेल रहा है, ऐसे में वह इस तरह के लंबी अवधि के अभियानों का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है। उधर टीटीपी की यह चुनौती बताती है कि पाकिस्तान में राज्य-सत्ता और आतंक के बीच जंग अभी देर तक थमने वाली नहीं है।
इस धमकी के समय पाकिस्तान की सेना उत्तरी वजीरिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के खिलाफ सक्रिय सैन्य अभियान चला रही है। माना जा रहा है कि आतंकी चुनौती का यह वीडियो असीम मुनीर पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने और अपने जिहादियों का मनोबल बढ़ाने को जारी किया गया है।

















