'स्वावलंबी भारत के लिए अपनाएं स्वदेशी'
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होम भारत

‘स्वावलंबी भारत के लिए अपनाएं स्वदेशी’

मोतिहारी में संघ शताब्दी वर्ष पर एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री आलोक कुमार ने कहा कि समाज में बड़े परिवर्तन की शुरुआत छोटे-छोटे प्रयासों से ही होती है।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 23, 2025, 08:56 am IST
inभारत, संघ @100, बिहार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री आलोक कुमार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री आलोक कुमार

प्रशांत सौरभ

गत दिनों मोतिहारी में संघ शताब्दी वर्ष पर एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री आलोक कुमार ने कहा कि समाज में बड़े परिवर्तन की शुरुआत छोटे-छोटे प्रयासों से ही होती है। जब हम अपने व्यवहार में सुधार लाते हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव होता है। समय पालन, दूसरों की निस्वार्थ मदद, पर्यावरण का ध्यान रखना, पारिवारिक जुड़ाव बनाए रखना, ये ऐसी आदतें हैं जिनके पालन से पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन होगा। हर भारतीय को पंच परिवर्तन का सिद्धांत अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज की यह मांग है कि सब समान दृष्टि से एक-दूसरे को देखें।

ऊंच- नीच का भेद समाप्त करना एक विकसित भारत के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। सामाजिक समरसता की स्थापना से ही भारत विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि भारत की परिवार व्यवस्था विश्व के लिए पथ प्रदर्शक का काम करती है, लेकिन आज आधुनिकता के चक्कर में यह व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। इसे समझने और फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है। यदि परिवार व्यवस्था समाप्त हो गई तो हमारे पूर्वजों ने जो सांस्कृतिक मूल्य स्थापित किए हैं, वे धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हम यदि एक पेड़ काटते हैं तो उसके बदले कम से कम 10 पेड़ लगाएं।

उन्होंने कहा कि भारत को यदि आत्मनिर्भर बनाना है तो स्वदेशी को अपनाना हीं पड़ेगा। मुख्य अतिथि और महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि स्वयंसेवकों ने कभी किसी प्रशंसा की अपेक्षा नहीं की। समाज के लिए निस्वार्थ काम किया। किसी व्यक्ति के नहीं, बल्कि विचारों को लेकर चलने वाले इस संगठन का नाम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और यही कारण है कि पिछले 100 वर्ष से यह निर्बाध गति से चला आ रहा है, और आगे ही बढ़ा है। बौद्धिक सत्र के पूर्व पूरे नगर में संचलन का आयोजन किया गया, जहां घोष की ताल पर कदम से कदम मिलाकर चलते स्वयंसेवकों को देख कई स्थानों पर लोगों ने पुष्प वृष्टि की।

जलाएं एक दीया भारत के नाम

गत दिनों डीएवी स्कूल गांधीनगर, दिल्ली में पुरातन छात्र परिषद ने दीपावली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया। इसके मुख्य अतिथि थे पूर्व प्रधानाचार्य जगदीश सागर। इस अवसर पर विद्यालय के पूर्व छात्र और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गांधीनगर जिले के संघचालक सरदार इंदरजीत सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत के सह बौद्धिक प्रमुख सतीश शर्मा, विद्यालय के प्रबंधक गिरजेश रस्तोगी एवं प्रधानाचार्य लखीराम सहित अनेक पूर्व छात्र उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने आग्रह किया कि ऑपरेशन सिंदूर के शौर्य-पराक्रम को याद कर एक दीया भारत के नाम पर भी जलाएं। इसके साथ यह भी आग्रह किया कि दीए मिट्टी के ही जलाएं और स्वदेशी वस्तुएं अपनाएं।

नृत्य के माध्यम से बिरजू महाराज को नमन

पिछले दिनों दिल्ली में अनंत नृत्य डांस एकेडमी फाउंडेशन ने प्रख्यात कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज की स्मृति में ‘नमन’ नृत्य समारोह का आयोजन किया। समारोह की मुख्य आकर्षण पंडित बिरजू महाराज की शिष्या ममता महाराज एवं रागिनी महाराज थीं। समारोह में ममता महाराज ने कुंती के भावों को अभिनय के जरिए चित्रित किया। तो नृत्यांगना रागिनी महाराज ने कृष्ण वंदना से नृत्य आरंभ किया। इस अवसर पर कथक नर्तक रीतब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि पंडित बिरजू महाराज ने कथक जगत को नृत्य, गीत, संगीत-सब कुछ दिया है। हम कलाकार उनकी विरासत को गुरु शिष्य-परंपरा के माध्यम से निभाएं , यह कलाकारों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।-

Topics: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघआत्मनिर्भरमहात्मा गांधीविकसित भारतभारत के निर्माणसंघ शताब्दी वर्षसकारात्मक परिवर्तन
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