मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को यह कहकर देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी कि ब्रिटिश उपनिवेशवाद और फ्रांसीसी उपनिवेशवाद की चर्चा तो होती है, लेकिन सनातन आस्था पर सबसे बड़ा प्रहार करने वाले “राजनीतिक इस्लाम” की कोई चर्चा नहीं होती। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह, महाराणा प्रताप और महाराणा सांगा ने राजनीतिक इस्लाम के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। अतीत में हमारे पूर्वजों ने राजनीतिक इस्लाम के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ी थी लेकिन इस पर चर्चा नहीं होती।
राम मंदिर निर्माण में संघ की 500 वर्ष की तपस्या का फल: CM योगी
सीएम योगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष पर गोरखपुर मंडल द्वारा आयोजित विचार-परिवार कुटुंब स्नेह मिलन और ‘दीपोत्सव से राष्ट्रोत्सव’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 500 वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा में असंभव को भी संभव होते देखा गया है। राम मंदिर को लेकर सपा, कांग्रेस और इंडी गठबंधन के लोग प्रश्न करते थे। संघ के स्वयंसेवक दृढ़ संकल्प से कहते थे कि मंदिर जरूर बनेगा। संघ ने बंदिशें झेलीं, स्वयंसेवकों ने लाठी और गोली खाई। परिणाम भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में सबके सामने है।
दीपोत्सव पर बयान से अखिलेश ने सनातन और कुम्हार समाज का किया अपमान: CM योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के दीपोत्सव को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा है कि दीपावली पर दीये जलाने के विरुद्ध बयान देकर अखिलेश यादव ने यह सिद्ध कर दिया है कि उन्हें अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर, देवी देवताओं, सनातन धर्मऔर दीपावली जैसे इसके पर्व-त्योहारों से भी नफरत है। उनका बयान प्रजापति समाज (कुम्हारों) का अपमान करने वाला है। उन्होंने अखिलेश पर यह भी तंज कसा कि गद्दी तो विरासत में मिल सकती है, बुद्धि नहीं। बिना विवेक वाले लोग ही दीपावली का विरोध करते हैं।
अयोध्या साढ़े आठ वर्ष पूर्व वीरान थी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो अयोध्या साढ़े आठ वर्ष पूर्व वीरान थी, अब वहां का भव्य दीपोत्सव नई पहचान बन गया है। इस बार 26 लाख 17 हजार दीये जलाने का नया विश्व रिकार्ड बना है। उन्होंने कहा कि सपा को दीया जलाने पर भी परेशानी है। सपा प्रमुख कहते हैं कि दीया जलाने की आवश्यकता क्या है, मोमबत्ती जला लेते। उनका यह बयान तिलहन की पैदावार कर दीयों को तेल देने वाले अन्नदाता किसानों और मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों का अपमान है। 2017 के पूर्व मिट्टी को लेकर कुम्हारों की पीड़ा को अगर समझा होता तो बबुआ (सपा प्रमुख अखिलेश यादव) बचकाना बयान नहीं देते। उन्हें नहीं मालूम है कि दो करोड़ लोग मिट्टी के दीयों से लेकर बर्तन के कारोबार से जुड़े हुए है। मिट्टी के उत्पाद आर्थिक निर्भरता और स्वावलंबन का प्रतीक हैं। सीएम ने कहा कि अखिलेश को सनातन धर्म के त्योहारों, देवी-देवताओं से नफरत है। अखिलेश, दुर्योधन की मूर्ति लगाने की बात करते हैं, हमनें कहा कि कंस की भी मूर्ति लगवा लो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस प्रभु राम और कृष्ण को नकारती थी। कांग्रेस ने अदालत में एफिडेविट देकर कहा था कि भगवान राम और कृष्ण मिथक हैं। सपा ने निर्ममता के साथ राम भक्तों पर गोलियां चलाई थीं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया अयोध्या में आकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर अभिभूत हो रही है। पिछले साल 6 करोड़ लोगों ने अयोध्या में प्रभु राम का दर्शन किया। प्रयागराज में महाकुंभ के 66 करोड़ से अधिक लोग साक्षी बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा और कांग्रेस के लोग इसमें शुरूआत से ही खोट निकाल रहे थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे देश में अंग्रेजी शासन से मोर्चा लेने की चर्चा तो होती है लेकिन राजनीतिक इस्लाम की चर्चा नहीं होती। राजनीतिक इस्लाम ने हमारी आस्था पर कुठाराघात किया। हमारे पूर्वजों ने बिट्रिश और फ्रांस के उपनिवेश के खिलाफ ही लड़ाई नहीं लड़ी, राजनीतिक इस्लाम को लेकर भी मोर्चा लिया था। वीर शिवाजी और महाराणा प्रताप के नाम इसमें उल्लेखनीय हैं। उन्होंने कहा कि आज भी जलालुद्दीन उर्फ छांगुर के रूप में राजनीतिक इस्लाम को बढ़ाने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन उत्पाद के प्रदेश में बिक्री पर रोक लगाई गई है। हलाल उत्पाद खरीद से मिलने वाले रुपये से ही कन्वर्जन, लव जिहाद और आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लोगों से स्वदेशी उत्पाद खरीदने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत के प्रचारक रमेश जी ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि सनातन, भारत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कोई फर्क नहीं है। तीनों एक ही हैं। यह दुनिया का पहला संगठन है जो स्वावलंबी है। उन्होंने कहा कि सौ वर्ष की यात्रा में संघ ने अनेक चुनौतियों का सामना किया लेकिन विरोधों के सागर में चट्टान की भांति खड़ा रहा।
















