शशि मोहन रावत
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के छोटे से गांव केमरिया सौर से निकलकर देव रतूड़ी ने चीन में भारतीय संस्कृति पर आधारित सबसे बड़ी रेस्तरां श्रृंखला खड़ी की-अंबर पैलेस ग्रुप। उन्होंने 2013 में चीन के ऐतिहासिक शहर शीआन में ‘अंबर पैलेस ग्रुप’ की नींव रखी थी। उनका उद्देश्य केवल भारतीय भोजन परोसना नहीं, बल्कि उसे संगीत, नृत्य और परंपरा के साथ एक सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करना था।
देव बताते हैं, “भाषा की दीवारें, सांस्कृतिक अंतर और नए बाजार की अनजान जमीन, ये सभी चुनौतियां थीं, लेकिन जब पहली बार चीनी अतिथियों ने भारतीय भोजन और मेहमाननवाजी को खुले दिल से अपनाया, तो वही मेरी सबसे बड़ी जीत थी।” वे कहते हैं, “यह सफलता केवल मेरी नहीं, मेरी पूरी टीम, हमारे ग्राहकों और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का परिणाम है। मेरा लक्ष्य है भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखना और नए अवसरों का सृजन करना।”
देव रतूड़ी अभिनेता भी हैं। उनके अनुसार, ”अभिनय मेरी रचनात्मकता को संतुष्ट करता है, जबकि व्यवसाय मुझे अनुशासन और प्रबंधन सिखाता है। यदि इंसान दिल से काम करे, तो वह हर क्षेत्र में सफल हो सकता है।”
अपनी सफलता के साथ उन्होंने अपने गांव केमरिया सौर को गोद लिया है। हर घर और स्कूल को नया रूप दिया, विद्यालयों में नई सुविधाएं जोड़ीं, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। अब वे ग्रामीण विकास की दिशा में व्यापक कार्य कर रहे हैं, जैसे होमस्टे परियोजनाएं, जैविक खेती को बढ़ावा और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना आदि।
उनका उद्देश्य एक ऐसा आदर्श गांव बनाना है, जहां लोग अपने ही गांव में सम्मानजनक जीवन जी सकें। यह पहल पहाड़ों से पलायन की प्रक्रिया को रोकने का सशक्त प्रयास है।
देव रतूड़ी ने देहरादून में अपनी फ़िल्म निर्माण कंपनी पंजीकृत कराई है। अगले वर्ष वे अपनी पहली फ़िल्म बनाने जा रहे हैं, जिसमें उत्तराखंड की सुंदरता, लोककथाएं, संघर्ष और संस्कृति को प्रस्तुत किया जाएगा। वे कहते हैं, “यह केवल फ़िल्म नहीं होगी, बल्कि हमारी मिट्टी और आत्मा को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।”
देव युवाओं के लिए कहते हैं, ”कभी हार मत मानो। अपने सपनों को बड़ा रखो और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा से मेहनत करो। ईमानदारी और परिश्रम ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं। सबसे महत्वपूर्ण है अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़े रहना। यदि आप अपनी मिट्टी को नहीं भूलते और अपने सपनों पर विश्वास रखते हैं, तो आपको कोई नहीं रोक सकता।”
देव रतूड़ी की यात्रा केवल एक उद्यमी की नहीं, बल्कि एक संस्कृति दूत की यात्रा है, जो हिमालय की गोद से निकलकर चीन की धरती तक भारतीयता का परचम लहरा रहे हैं।

















