दीपों का विश्व रिकॉर्ड: अयोध्या में 26 लाख, पूरे यूपी में जले 1.51 करोड़ दीप, हर कोना हुआ राममय
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होम भारत उत्तर प्रदेश

दीपों का विश्व रिकॉर्ड: अयोध्या में 26 लाख, पूरे यूपी में जले 1.51 करोड़ दीप, हर कोना हुआ राममय

अयोध्या उन सात नगरों में से पहला है जहां धर्म ने मानव रूप में अवतार लिया है। यहां का हर कण मर्यादा से भरा है, हर दीपक करुणा से भरा है और हर हृदय में भगवान श्री राम विराजमान हैं।

Written byसुनील रायसुनील राय — edited by Shivam Dixit
Oct 19, 2025, 09:43 pm IST
inउत्तर प्रदेश
Ayodhya Deepotsav 2025

Ayodhya Deepotsav 2025

अयोध्या, 19 अक्टूबर: अयोध्या उन सात नगरों में से पहला है जहां धर्म ने मानव रूप में अवतार लिया है। यहां का हर कण मर्यादा से भरा है, हर दीपक करुणा से भरा है और हर हृदय में भगवान श्री राम विराजमान हैं। हजारों साल पहले, जब दुनिया अंधकार में जी रही थी, अयोध्या ने अपने भगवान, अपने आराध्य और अपनी आस्था के आगमन के स्वागत में दीप जलाए थे। वही दीपोत्सव, दीपावली के रूप में सनातन धर्म का एक महापर्व बन गया था। इस महापर्व को जीवंत बनाए रखने के लिए 2017 में पहली बार 171,000 दीप जलाए गए थे। आज नौवें दीपोत्सव पर अकेले अयोध्या धाम में 26 लाख से अधिक दीप जलाए जा रहे हैं। अगर पूरे प्रदेश भर में गणना की जाए तो 1 करोड़ 51 लाख दीप अकेले दीपोत्सव में जल रहे हैं। यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अयोध्या धाम के राम कथा पार्क में राम राज्याभिषेक के दौरान कही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज लाखों-लाख दीप अयोध्या धाम में प्रज्वलित होते हैं, जो हर भारतवासी के संकल्प के प्रतीक बनते हैं। यह केवल दीप नहीं हैं, यह दीप 500 वर्षों के अंधकार पर आस्था की विजय के प्रतीक भी हैं। इन 500 वर्षों में किस प्रकार के अपमान झेलने पड़े और किस प्रकार के संघर्षों से हमारे पूर्वज जूझे, यह दीप उसी के प्रतीक स्वरूप हैं। तब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम तंबू में विराजमान थे और अब जब दीपोत्सव का नवम संस्करण हो रहा है, तब भगवान श्रीराम अपने भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान हैं। हर दीप हमें यह याद दिलाता है कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं हो सकता। सत्य की नियति होती है विजयी होने की और विजयी होने की इसी नियति के साथ सनातन धर्म 500 वर्षों तक लगातार संघर्ष करता रहा। उस संघर्ष की परिधि अयोध्या में है और उन्हीं संकल्पनाओं की परिणिति स्वरूप अयोध्या में भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण हुआ है। सीएम ने कहा कि जब हम यहां लाखों दीपों से अयोध्या धाम को जगमगा रहे हैं, तब हमें यह विस्मृत नहीं करना चाहिए कि इसी अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने न्यायालय में भगवान श्रीराम को एक मिथक बताया था। कांग्रेस ने शपथ पत्र में दिया था कि भगवान श्रीराम काल्पनिक हैं।

अयोध्या के दीप 500 वर्षों के अंधकार पर आस्था की विजय के प्रतीक”

सीएम ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने रामभक्तों पर अयोध्या में गोलियां चलाई थीं। यह वही लोग हैं, जो मुगलों की कब्र पर जाकर सजदा करते हैं, लेकिन जब अयोध्या में रामलला विराजमान होने के कार्यक्रम में उन्हें निमंत्रण दिया जाता है, तो यह लोग राम मंदिर के निमंत्रण कार्यक्रम को ठुकरा देते हैं। हमें उनके इस दोहरे चरित्र का स्मरण रखना होगा कि कैसे भारत की सनातन आस्था को ये अपमानित करते रहे हैं और किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करते रहे हैं। कभी राम के अस्तित्व पर ही प्रश्न खड़ा करते थे तो कभी एक आक्रांता की कब्र पर जाकर सजदा करने का कार्य करते थे और फिर भारत की आस्था को अपमानित करने के लिए कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ी। यह वही लोग हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान अयोध्या धाम में मंदिर का निर्माण न हो, इसके लिए अपने अधिवक्ताओं को विरोध में खड़ा किया था, ताकि वे राम मंदिर के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर सकें।

अयोध्या में दीपोत्सव: आस्था, विरासत और एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रतीक

वहीं आज हम कह सकते हैं, उन्होंने गोलियां चलाईं, हम अयोध्या में दीप जला रहे हैं। उन्होंने ताले लगवाए और हम पूज्य संतों के आशीर्वाद से आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्मित हो गया है। यह रामभक्तों के संकल्पों का प्रतिफल है। इन्होंने अयोध्या की पहचान को मिटाया था, अयोध्या को फैजाबाद बनाया था। वहीं, हम लोगों ने अयोध्या की पहचान को अयोध्या के साथ जोड़कर इसे फिर से अयोध्या धाम बनाने का कार्य किया है। यह दीपोत्सव इस बात की गवाही दे रहा है कि आस्था को कोई राजनीति कैद नहीं कर सकती। यह वही लोग हैं जो अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” की नीति को अपनाकर आज भी जातीय विद्वेष पैदा करने का काम कर रहे हैं। हमें जाति-जाति के बीच में लड़ाने का काम कर रहे हैं। सदियों तक विदेशी आक्रांताओं ने भारत भूमि को अपवित्र करने के लिए सारे यत्न किए, सारे षड्यंत्र रचे। आस्था के प्रतीकों को तोड़ा गया, अपमानित किया गया, आस्था खंडित हुई, लेकिन श्रद्धा डिगी नहीं, वह अविचल रही।

सीएम ने कहा कि गुलामी के कालखंड में जिस प्रकार की स्थितियां पैदा की गई थीं, यह लोग फिर से उसी प्रकार की स्थिति को पैदा करने की चेष्टा कर रहे हैं, लेकिन आज का भारत, पिछले 11 वर्षों में “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के रूप में अपने आप को स्थापित कर चुका है। आज भारत विकास भी कर रहा है और विरासत का संरक्षण भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में वह सब कुछ होगा, जिसे हमने अलग-अलग थीम के साथ यहां विकसित करने का निर्णय लिया है। अयोध्या सक्षम भी है, स्वच्छ और आयुष्मान भी है। सांस्कृतिक और आधुनिक भी है और भावनात्मक भी है। आज पूरे भारत और दुनिया की आस्था यहां पर देखने को मिल रही है। आज दुनिया यहां दर्शन करने के लिए आ रही है। आज अयोध्या में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी, कोहिमा से लेकर कच्छ तक, भारत के हर राज्य का श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ यहां आता है। दुनिया के अंदर जहां कहीं भी सनातन धर्म है, वहां के लोग अपनी आस्था के साथ आते हैं और इस वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी का दर्शन करके अपने आप को गौरव की अनुभूति करते हैं। कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए अयोध्या के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया था। वहीं, आज अयोध्या को पहचान के संकट से नहीं गुजरना पड़ रहा है।

अयोध्या: उपेक्षा से वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी तक का सफर

सीएम ने कहा कि अयोध्या में पहले कुछ चंद हजार श्रद्धालु आते थे, तो अव्यवस्था और गंदगी का एक अंबार दिखाई देता था। अब हर वर्ष 6 करोड़ से लेकर 10 करोड़ श्रद्धालु अकेले अयोध्या धाम में आ रहे हैं। यह अयोध्या अब वही है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्पों के अनुरूप हमने विकसित किया है। हमने तय किया कि यह अयोध्या अब दुनिया की वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी के रूप में अपने आप को स्थापित करेगी और भारत की आस्था की राजधानी के रूप में भी स्थापित होगी। वर्ष 1947 में जब देश आज़ाद हुआ, तब भी हर भारतवासी के मन में एक तमन्ना थी कि भारत को आज़ादी का मतलब गुलामी के सभी चिन्हों को समाप्त करके हमें राजनीतिक आज़ादी के साथ-साथ सांस्कृतिक आज़ादी भी प्राप्त होगी। हमारे मान बिंदुओं की भी पुनर्स्थापना का कार्य होगा, लेकिन अयोध्या को तब भी उपेक्षित कर दिया गया था। वर्ष 1949 में जब रामभक्तों ने एक प्रयास किया कि रामलला भी आज़ादी के साथ विराजमान हों, तो मूर्ति हटाने का हुक्म जारी हो गया और कहा गया, मामला शांत करो, मामला शांत करो, लेकिन भक्तों ने कहा, कोई भी मूर्ति को अयोध्या में राम जन्मभूमि से हटा नहीं सकता। एक ही संकल्प था तब भी, रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। वर्ष 1950 से लेकर 1980 तक मंदिर को ताले में बंद किया गया। वर्ष 1986 तक यही स्थिति बनी रही। रामलला की जन्मभूमि में ही भगवान रामलला को कैद करके रखने का प्रयास हुआ। कौन थे वे लोग जो आस्था को इस कदर कैद करने का कार्य कर रहे थे? परंतु हम सब इस बारे में जानते हैं, भारत की आस्था, सनातनी आस्था बिना रुके, बिना झुके, बिना थके निरंतर अपने संघर्ष के पथ पर आगे बढ़ती गई।

सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने सुरक्षा का एक मॉडल दिया है। वर्ष 2017 से पहले पर्व और त्यौहार आते ही लोगों के मन में भय व्याप्त हो जाता था। वहीं  2017 के बाद हम लोगों ने प्रभु श्री राम को अपना आदर्श माना। आज हर्षोल्लास से सभी पर्व और त्याैहार बनाए जा रहे हैं। आज प्रदेश गुंडाराज और माफिया राज से मुक्त है। एनसीआरबी के आकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश देश के न्यूनतम अपराध वाले राज्यों में शामिल है। वह उत्तर प्रदेश, जिसके सामने कभी पहचान का संकट था, आज उसे अपनी पहचान का मोहताज नहीं होना पड़ता। आज कानून का राज है। आज अपराधी भयभीत हैं। आज गरीब का सम्मान है। आज किसान खुशहाल है। आज बहनें और माताएं सुरक्षित हैं। युवाओं के लिए अवसर हैं। हर गांव में बिजली है और हर हृदय में नया उत्साह है। उत्साह और मान भी है। यह वह स्थान है जहां विकास भी है और सनातन आस्था का सम्मान भी।

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