‘कहते हैं कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते, लेकिन यहां तो ये भूत इतना जड़ हो गया है कि उस पर लातों का भी असर नहीं हो रहा’। हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान की जो इतनी बार भारत से पिटा, लेकिन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तानी आर्मी का चीफ आसिम मुनीर एक बार फिर से भारत को न्यूक्लियर धमकी दे रहा है। उसने अपने लोगों को एक नया चूरन दिया कि भारत ने कोई नई दुश्मनी की तो पाकिस्तान का जवाब शुरू करने वालों की उम्मीद से कहीं ज्यादा तगड़ा होगा।
मुनीर ने एबटाबाद के काकुल में पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी में कैडेट्स को संबोधित करते हुए भारत को गीदड़ भभकी दी। उसने कहा, “हम तुम्हारी बयानबाजी से डरेंगे या दबाव में नहीं आएंगे। छोटी सी उकसावे पर भी हम बिना हिचकिचाहट के फैसला ले लेंगे, जो सही मायने में अतिरिक्त होगा। अगर इससे पूरे इलाके और उसके बाहर तबाही मची तो इसका जिम्मेदार भारत ही होगा।” ये मुनिर की भारत के खिलाफ दो महीने में दूसरी न्यूक्लियर धमकी है।
अगस्त में भी दी थी न्यूक्लियर धमकी
इससे पहले अमेरिका दौरे के दौरान फ्लोरिडा के टैम्पा में मुनीर ने पाकिस्तानी डायस्पोरा को संबोधित करते हुए कहा था, “हम न्यूक्लियर राष्ट्र हैं। अगर हमें लगेगा कि हम डूब रहे हैं, तो आधे दुनिया को हमारे साथ ले जाएंगे।” हालांकि, भारत सरकार ने पाकिस्तान के इस न्यूक्लियर ब्लैकमेल को सिरे से नकार दिया था।
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क्या कहती है भारत सरकार
भारत सरकार का इस मामले में स्पष्ट रुख है कि वह पाकिस्तान के न्यूक्लियर ब्लैकमेल में नहीं फंसने वाला। दिल्ली का कहना है कि ये इस्लामाबाद की पुरानी रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां न्यूक्लियर खतरे को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान को दुनिया एक गैर-जिम्मेदार न्यूक्लियर हस्ती मानती है। वहां न्यूक्लियर मटेरियल या एक्सपर्टाइज नॉन-स्टेट एक्टर्स तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। जानकारों का कहना है, “दुनिया पाकिस्तानी आर्मी जैसे संस्थान पर भरोसा नहीं करती, जो किसी को जवाबदेह नहीं है।”
मुनिर ने हाल में अमेरिका की तीन आधिकारिक यात्राएं कीं। जून में प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप से मिले, जो ऑपरेशन सिंदूर के कुछ हफ्ते बाद था। अगस्त में यूएस सेंट्रल कमांड कमांडर के रिटायरमेंट सेरेमनी में गए। सितंबर में फिर ट्रंप से व्हाइट हाउस में मिले, जहां पाक पीएम शहबाज शरीफ यूएन जनरल असेंबली सेशन के लिए थे। अपनी इन यात्राओं के जरिए वो अमेरिका की चापलूसी कर रहा है। उसे लगता है कि वह अमेरिका के दम पर भारत से पार पा सकता है, लेकिन ये उसकी गलतफहमी है। अमेरिका वो राष्ट्र है, जो केवल अपना व्यापारिक फायदा देखता है।

















