यह कहानी है भारत के स्वदेशी तकनीकी गर्व MapmyIndia की। राकेश वर्मा और उनकी पत्नी रश्मि वर्मा ने 1995 में जब इसकी शुरुआत की, तब भारत में डिजिटल मैपिंग की कल्पना भी नई थी। आज मैपल्स गूगल मैप को टक्कर दे रहा है। कंपनी का मूल्य 10,000 करोड़ रुपये व राजस्व 500 करोड़ रुपये है, जिसे कुछ वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है।
पेशे से इंजीनियर राकेश और रश्मि ने अमेरिका में 12 साल काम करने के बाद भारत लौटकर ठाना कि वे देश के लिए कुछ अलग करेंगे। उन्होंने महसूस किया कि भविष्य में हर क्षेत्र-चाहे उपभोक्ता, सरकार या व्यवसाय-में लोकेशन डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यही सोच डिजिटल मैपिंग के बीज बोने का कारण बनी। सीमित संसाधन होने के बावजूद दोनों ने डिजिटल इंडिया का सपना देखा और 10 वर्ष की मेहनत से ऐसा मैप बनाया, जो देशभर में उपयोगी सिद्ध हुआ। जब भारत में मोबाइल फोन आया, तो कंपनियां नेटवर्क प्लानिंग के लिए MapmyIndia के मैप्स पर निर्भर हुईं। 2004 में कंपनी ने MapmyIndia.com पोर्टल लॉन्च किया व 2007 में कारों के लिए पोर्टेबल नेविगेशन डिवाइस लाकर खुद को उपभोक्ताओं से जोड़ा।
2007-08 में बड़ी चुनौती आई, जब लोगों ने कहा कि निजी कंपनी भारत में मैप नहीं बना सकती। फिर जब गूगल भारत आया और मोबाइल निर्माताओं को केवल गूगल मैप इंस्टॉल करने को कहा, तब कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ा। इस मुश्किल से निकलने के लिए कंपनी ने वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल की और बिजनेस मॉडल में नवाचार किया।
अपने सॉफ्टवेयर को वाहनों के इंफोटेनमेंट सिस्टम में एकीकृत किया। 2018-19 में कंपनी फिर सुर्खियों में आई, जब उसके अधिकारों पर सवाल उठे। राकेश वर्मा ने यह मुद्दा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने समस्या समझी और 2021 में नई जियोस्पेशल नीति लागू कर निजी कंपनियों को मैपिंग की स्वतंत्रता दी। उसी वर्ष MapmyIndia का आईपीओ आया, जो बहुत सफल रहा।
आज उनकी कंपनी भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। अश्विनी वैष्णव जैसे केंद्रीय मंत्रियों ने भी सार्वजनिक रूप से MapmyIndia के उपयोग की सराहना की, जिससे एप की लोकप्रियता कई गुना बढ़ी। कंपनी का लक्ष्य स्वदेशी नवाचार के साथ वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीक को स्थापित करना है।
MapmyIndia के नवाचारों ने इसे गूगल से अलग पहचान दी है, जैसे 3डी व्यू फ्लाईओवर नेविगेशन, Mappls Pin जो बिल्डिंग के गेट तक सटीक स्थान दिखाती है और सड़क सुरक्षा अलर्ट, जो पाथहोल या स्पीड ब्रेकर की चेतावनी देता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सटीकता और अपडेटेड डेटा गूगल से काफी आगे है, क्योंकि MapmyIndia ने वर्षों तक ज़मीनी स्तर पर सर्वे कर डेटा तैयार किया है।
कंपनी का लक्ष्य 3.5 करोड़ से 10 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचना है। इसके साथ मार्केटिंग, डेटा व इंजीनियरिंग जैसी चुनौतियां जुड़ी हैं, पर कंपनी आश्वस्त है कि भारत यदि आत्मनिर्भर है, तो MapmyIndia उसका तकनीकी साथी है। आज स्वदेशी तकनीक और दृढ़ दृष्टि के साथ MapmyIndia सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि ‘भारत की तकनीकी आत्मनिर्भर यात्रा’ का प्रतीक बन चुका है।

















