वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को देश में लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए बेहतरीन कार्य और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण बदलाव के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हालांकि, इस पुरस्कार ने विवाद खड़ा कर दिया है। जहां दुनिया मारिया कोरिना को नोबेल पुरस्कार मिलने का जश्न मना रही है। वहीं राजनीतिक विरोधी, वामपंथी विचारकों के अलावा कई मुस्लिम संगठनों द्वारा उनका विरोध किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मचाडो को यूरोप के रूढ़िवादी राजनीतिक आंदोलनों से उनके कथित संबंधों और अमेरिकी दक्षिणपंथियों के करीबी होने के आरोपों के कारण निशाना बनाया गया है। मचाडो की नोबेल जीत का वैश्विक स्तर पर स्वागत किया जा रहा है, लेकिन उनके कई आलोचक मानते हैं कि इससे अमेरिका में निर्वासन के खतरे का सामना कर रहे वेनेजुएला के लोगों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं होगा। कुछ अन्य विरोधियों का कहना है कि 58 वर्षीय नेता ने वेनेजुएला सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अन्य देशों के दबाव का समर्थन किया है। इसलिए उन्हें शांति के लिए सम्मानित करना ठीक नहीं है। अमेरिका में काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) नामक एक मुस्लिम नागरिक अधिकार समूह ने भी इस फैसले की निंदा की है और नोबेल समिति से पुरस्कार रद्द करने की मांग की है। इस बीच, वेनेजुएला की सत्तारूढ़ पार्टी के सांसदों ने भी इस पुरस्कार को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने मचाडो पर राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा देने और विदेशी ताकतों के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया है।
इजराइल और मुस्लिम विरोधी नेताओं के समर्थन का आरोप
काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को मचाडो को नोबेल पुरस्कार देने के नोबेल समिति के फैसले को अनुचित बताया और कहा, “मचाडो इजराइल की लिकुड पार्टी की मुखर समर्थक हैं और इस साल की शुरुआत में उन्होंने यूरोप में मुस्लिम विरोधी फासीवाद नेताओं जैसे गीर्ट वाइल्डर्स और मैरी ले पेन के सम्मेलन में भाग लेकर उनका समर्थन किया था। सम्मेलन में खुले तौर पर ‘रिकोनक्विस्टा’ का आह्वान किया गया था, जिसमें 1500 के दशक में स्पेनिश मुस्लिमों और यहूदियों के जातीय सफाए का जिक्र था।” सीएआईआर ने आगे कहा कि वह इजरायल के मुस्लिम विरोधी एजेंडे का समर्थन करती हैं और उन (मुस्लिमों) पर होने वाले हमलों का खुलकर समर्थन करती हैं। बता दें कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वर्तमान में लिकुड पार्टी से ही आते हैं।
पाब्लो इग्लेसियस ने मचाडो के पुरस्कार की आलोचना की
वेनेजुएला में सरकार के पूर्व उपाध्यक्ष पाब्लो इग्लेसियस ने भी मचाडो को दिए गए पुरस्कार की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मचाडो देश में तख्तापलट की कोशिश कर रही हैं। वह हिटलर की विचारधारा का समर्थन करती हैं। कहीं ऐसा ना हो कि अगले वर्ष पुतिन और जेलेंस्की को शांति का नोबेल पुरस्कार मिल जाए। नॉर्वे नोबेल समिति के अनुसार मचाडो को वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और शांतिपूर्ण तरीके से तानाशाही सरकार से लोकतंत्र में बदलने के उनके अथक प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया है। वहीं, मचाडो अपनी जीत को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित करना चाहती हैं।

















