इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती (संबंद्ध- अखिल भारतीय साहित्य परिषद्) द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर 4 एवं 5 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी महाविद्यालय में समग्र संघ साहित्य परिचर्चा का आयोजन किया गया।
कुल चार सत्रों में संपन्न इस परिचर्चा में 32 साहित्यकारों, प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने भारतबोध, राष्ट्र, धर्म, संस्कृति, हिंदुत्व, एकात्ममानव दर्शन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार, कार्यकर्ता निर्माण, संघ और स्वतंत्रता आंदोलन, संघ और भारत विभाजन, संघ और सामाजिक समरसता, पर्यावरण, कुटुंब व्यवस्था, नारीशक्ति, शिक्षा, संघ गीत सहित अनेक विषयों से संबंधित संघ विचारकों द्वारा लिखित पुस्तकों का सार प्रस्तुत किया। परिचर्चा के दौरान सुरुचि प्रकाशन द्वारा पुस्तक-प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।
उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. योगेश सिंह का वक्तव्य
समग्र संघ साहित्य परिचर्चा के पहले दिन उद्घाटन-सत्र की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने विरोधियों और शत्रुओं को अनेक बार क्षमा किया है, परंतु राष्ट्र के विरोधियों और शत्रुओं को कभी क्षमा नहीं किया।
प्रो. सिंह ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में यह उपयुक्त एवं अनुकूल समय है जब संघ साहित्य पर परिचर्चा का आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मात्र व्यक्तियों का समूह नहीं है, अपितु यह एक विचार है। विचार से जुड़ने पर कभी मन में निराशा का भाव नहीं आता। संघ व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के ध्येय को लेकर कार्य करता है।
मुख्य अतिथि डॉ. बलवंत जानी का संबोधन
मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय विश्वविद्यालय, सागर के पूर्व कुलाधिपति डॉ. बलवंत जानी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय परंपरा का संवाहक है। उन्होंने कहा कि संघ विचारकों द्वारा रचित साहित्य केवल भारत या एशिया के लिए ही नहीं, अपितु विश्व के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।
विशिष्ट अतिथि राजीव तुली का विचार
विशिष्ट अतिथि के नाते सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने कहा कि संघ को ऐसे लोगों ने गढ़ा है जो रुके नहीं, टुटे नहीं, झुके नहीं और बिके नहीं। उन्होंने कहा कि सुरुचि प्रकाशन राष्ट्रीय साहित्य प्रकाशन का महती कार्य कर रहा है।
डॉ. अवनिजेश अवस्थी का स्वागत भाषण
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष डॉ. अवनिजेश अवस्थी ने कहा कि संघ के बारे में प्रामाणिक जानकारी लोगों तक पहुंचें, इसलिए हमने समग्र संघ साहित्य परिचर्चा का आयोजन किया है।
उद्घाटन सत्र का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के महामंत्री संजीव सिन्हा एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक प्रो. ममता वालिया ने किया।
साहित्यकारों द्वारा पुस्तक-सार प्रस्तुति
पहले दिन प्रथम सत्र में 11 एवं दूसरे दिन द्वितीय सत्र में 21 साहित्यकारों, प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों से संबंधित संघ विचारकों द्वारा लिखित पुस्तकों का सार प्रस्तुत किया। प्रथम सत्र का संचालन कार्यक्रम सह संयोजक डॉ. मलखान सिंह ने किया।
समारोप सत्र में मनोज कुमार का उद्बोधन
इसके पश्चात् समारोप सत्र में अपने विचार रखते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री मनोज कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ऐसे लोग तैयार किए जो देश के लिए प्राण देने पड़े तो प्राण दिए, नहीं तो देश के लिए जिए। इस समय संघ, भारत और हिंदू तीनों शब्द पर्याय हो गए हैं।
मनोज कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य व्यापक है। कोई विषय अछूता नहीं है। संघ ने व्यक्ति से विश्व तक काम किया। राष्ट्र के पुनर्सृजन का कार्य किया। संघ का लक्ष्य है हिंदू समाज का संगठन करना एवं भारत को विश्व-मित्र बनाना। उन्होंने कहा कि समग्र संघ साहित्य परिचर्चा इसलिए आयोजित की गई है ताकि संघ का सही विचार साहित्य की सभी विधाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंचे। संघ साहित्य का कलेवर भले उतना उत्कृष्ट न हो लेकिन विषयवस्तु तथ्यात्मक रहता है।
डॉ. विनोद बब्बर का वक्तव्य
इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विनोद बब्बर ने कहा कि इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती द्वारा निरंतर साहित्यिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनमानस में साहित्य के प्रति अभिरुचि उत्पन्न की जा रही है।
समापन और सहभागिता
द्वितीय एवं समारोप सत्र का संचालन कार्यक्रम सह संयोजक प्रो. सारिका कालरा एवं धन्यवाद ज्ञापन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती की कार्यकारिणी सदस्य डॉ. रजनी मान ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय मंत्री प्रो. नीलम राठी एवं प्रवीण आर्य, पीजीडीएवी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दरविंदर कुमार, उपाध्यक्ष मनोज शर्मा, मंत्री नीलम भागी, सुनीता बुग्गा, राकेश कुमार, कोषाध्यक्ष अक्षय अग्रवाल, जगदीश सिंह, आचार्य अनमोल, सुनील दत्ता, सुपरिचित लेखक देवांशु झा, हंस प्रकाशन के हरीन्द्र, डॉ. श्रुति मिश्रा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकारों एवं छात्रों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

















