उम्र 58…इंजीनियर से बनीं नेता-कौन हैं 2025 का नोबेल शांति अवॉर्ड पाने वालीं मारिया मचाडो? उनके बारे में सबकुछ जानिये
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उम्र 58…इंजीनियर से बनीं नेता-कौन हैं 2025 का नोबेल शांति अवॉर्ड पाने वालीं मारिया मचाडो? उनके बारे में सबकुछ जानिये

वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया साल 2024 के चुनाव के बाद से गायब थीं। वह अपने ही देश में छिपकर रह रही थीं। उनकी उम्र 58 साल है और उन्होंने इंजीनियर से पॉलिटिकल लीडर तक का सफर तय किया है। मरिया को नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाली एक्टिविस्ट के तौर पर भी जाना जाता है। नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद उनके मुंह से पांच बार 'हे भगवान' निकला।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Oct 10, 2025, 05:37 pm IST
inविश्व

नई दिल्ली: साल 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की 58 साल की मारिया कोरिना मचाडो को मिला है। वह वेनेजुएला के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की प्रमुख हस्ती हैं। इस समय अपने ही देश में छिपकर रह रही हैं। पॉलिटिकल लीडर और एक्टिविस्ट मारिया लैटिन अमेरिका में नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वालों में चर्चित चेहरा हैं। मारिया राजनीतिक दल वेंटे वेनेजुएला (Vente Venezuela) की सह-संस्थापक भी हैं। इस दल की स्थापना साल 2013 में हुई थी। मारिया साल 2010 से लेकर 2015 तक वेनेजुएला की नेशनल असेंबली में भी रही हैं। प्रतिरोध की आवाज के तौर पर प्रसिद्ध मारिया को साल 2014 में संसद से निष्कासित कर दिया गया था। उन्हें इस दौरान देशद्रोह के आरोप का भी सामना करना पड़ा।

वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया साल 2024 के चुनाव के बाद से गायब थीं। वह अपने ही देश में छिपकर रह रही थीं।

वेनेजुएला के कराकस की रहने वाली हैं मचाडो… पेशे से हैं इंडस्ट्रियल इंजीनियर
7 अक्टूबर 1967 को वेनेज़ुएला के कराकस में पैदा हुई मारिया पेशे से इंडस्ट्रियल इंजीनियर हैं। न्यूज़ एजेंसी ‘रॉयटर्स’ के अनुसार उन्होंने साल 2023 में विपक्ष के प्राथमिक चुनाव में शानदार जीत हासिल की। साल 2024 में वह निकोलस मादुरो के खिलाफ राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं लड़ सकीं। वह तब से ही अपने देश में छिपी हुई थीं। उनको तब से सिर्फ एक ही बार देखा गया था।

जब मादुरो ने राष्ट्रपति चुनाव जीता उनके शपथ ग्रहण समारोह से पहले हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान मारिया मचाडो को देखा गया था। इसके बाद से वह वेनेजुएला में नहीं देखी गईं। विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए गिरफ्तार भी किया गया लेकिन फिर रिहा कर दिया गया।

आर्थिक सुधारों-नागरिक अधिकारों की हिमायती हैं मचाडो.. पॉलिटिकल सक्रियता की चुकानी पड़ी कीमत
इंजीनियर से नेता बनीं मचाडो उदार आर्थिक सुधारों की वकालत करती हैं। जिनमें वेनेज़ुएला की तेल कंपनी पीडीवीएसए जैसे सरकारी उद्यमों का निजीकरण भी शामिल है। उन्हें अपने राजनीतिक सक्रियता की कीमत भी चुकानी पड़ी। उनके सभी वरिष्ठ सलाहकारों को या तो हिरासत में ले लिया गया या फिर देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। उन्होंने राष्ट्रपति मादुरो पर आपराधिक माफिया की तरह काम करने का आरोप लगाया है।

मचाडो उच्च वर्ग में पैदा हुई। उनके पिता वेनेज़ुएला के इस्पात उद्योग में प्रमुख व्यवसायी थे। अमीर घर में पैदा होने के कारण मचाडो को आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ा। उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है जिनमें चार्ल्स टी. मैनाट पुरस्कार (2014), लिबर्टाड कोर्टेस डी काडिज (2015) और लिबरल इंटरनेशनल फ्रीडम पुरस्कार (2019) शामिल है।


नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद बोलीं मारिया- हे भगवान! मेरे पास शब्द नहीं
मारियो मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की जानकारी नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान के निदेशक क्रिस्टियन बर्ग हार्पविकेन ने दी। उन्होंने जैसे ही यह खबर सुनी उनके मुंह से हे भगवान निकला। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। क्रिस्टियन बर्ग के हवाले से लिखा गया है कि मारिया मचाडो ने जैसे ही शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने की बात सुनी उनके मुंह से सीधे पहले हे भगवान निकला और फिर उन्होंने कहा कि उनके पास इस खुशी को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। मचाडो ने प्रसन्नता में पांच बार हे भगवान! यानी हे गॉड…उच्चारित किया…। उन्होंने खुद को नोबेल मिलने पूरे बेनेजुएला के समाज की उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा- मैं तो बस एक इंसान हूं। मैं बिल्कुल भी इसकी हकदार नहीं हूं।

Topics: Nobel peace prizemaria corina machadoVenezuelan opposition leader Maria Corina Machado2025 Nobel Peace Prize winner2025 का नोबेल शांति पुरस्कारमारिया मचाडो
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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