ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स को लेकर लगातार बहसें हो रही हैं और जहां सरकार इसे नकार रही है तो वहीं असंख्य लोग हैं, जो इस मामले को जीवित रखे हुए हैं। वे ऐसे लोग हैं, जो अपनी बेटियों के साथ हुई इस हैवानियत का सच सामने लाना चाहते हैं।
अभी हाल ही ब्रिटेन के इतिहासकार और ब्रॉडकास्टर डेविड स्टारकी ने एक इंटरव्यू में ग्रूमिंग गैंग्स के विषय में बहुत गंभीर बात कही है। उन्होनें कहा कि ग्रूमिंग गैंग्स, दरअसल असली में गैंग न होकर “खानदान” है। ये आपस में रिश्तेदार हैं – बाप, भाई, अंकल, और चचरे, मौसेरे,फुफेरे, ममेरे भाई यदि, और ये आपस में कज़िन मेरिज से जुड़े होते हैं। ब्रिटिश राज्य जब “कम्युनिटी लीडर्स” की नियुक्ति करती है तो इसे कहीं न कहीं स्वीकार भी करती है।
‘Grooming gangs aren’t really gangs. They are clans. They’re groups of relations – fathers, brothers, uncles and cousins – often linked by cousin marriage. The British state tacitly acknowledges this when it appoints “community leaders”.’
David Starkey on grooming gangs: pic.twitter.com/h3EMa21XTZ
— spiked (@spikedonline) September 29, 2025
इस इंटरव्यू में वे कह रहे हैं कि इसे हमें बार-बार कहना चाहिए कि ब्रिटेन अप्रावासियों का देश नहीं है। ब्रिटेन को आप्रवासियों ने नहीं बनाया है।
वे यह कहते हैं कि जब स्थिर एंग्लो-ब्रिटिश राज्य का निर्माण हुआ था, उसका आधार यह था कि इसमें व्यक्ति महत्वपूर्ण था। हमने खानदानों को दबाया था। हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि हम एक व्यक्तिगत समाज थे, जो एक आकर्षक विभाजित समाज था, और यह समाज क्लब्स, और ट्रेड यूनियन जैसी चीजों से परस्पर जुड़ा हुआ था। मगर हम खानदानों में बंटे हुए नहीं थे।
हम व्यक्तिगत अधिकारों का आंदण्ड उठाते रहे। न्याय के व्यक्तिगत अधिकार और व्यक्तिगत अधिकार इन खानदानों का अंत थे। मगर अब हमने क्या किया है? जो भी आप बात कर रहे हैं कि होटल्स के सामने ग्रूमिंग गैंग्स की प्रतिक्रिया में प्रदर्शन हो रहे हैं, जैसी घटनाएं हो रही हैं। मगर समस्या ग्रूमिंग गैंग्स के साथ है। वे गैंग्स नहीं हैं, वे “बिरादर” हैं।
वे गैंग्स के जैसे व्यवहार करते हैं। वे खानदान हैं। वे रिश्तों का समूह हैं। उनके अब्बा, भाई, चाचा, मामा, ताया, फूफा, मौसा और उनके फर्स्ट कज़िन, सेकंड कज़िन और थर्ड कज़िन्स सभी इसका हिस्सा हैं। और चूंकि वे ऐसे समुदाय हैं, जहां पर आपस में शादियाँ होती हैं, तो वे अपने आप को बिरादरी कहते हैं और यही कारण हैं कि वे अपनी बिरादरी के नेता चाहते हैं और अब राज्य ने उन्हें सहूलियत दे दी है और अब वे व्यापक स्तर पर पाकिस्तानी झंडे लहराते हैं, जो आपने देखा ही है, कि कैसे पाकिस्तान की आजादी वाले दिन उन्होनें देश के कुछ हिस्सों पर पूरा एकाधिकार कर लिया है या फिर फिलिस्तीनी फिलिस्तीन के झंडों का इस्तेमाल बढ़ाते जा रहे हैं।
उन्होनें आगे कहा कि दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इन बिरादरियों ने समाज में अलगाव पैदा कर दिया है। उन्होनें आगे कहा कि अब ब्रिटेन में लोग इसकी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जैसे कि टॉमी रॉबिन्सन जैसे लोग और अब ब्रिटिश वर्किंग क्लास भी उसी तरह से व्यवहार कर रहा है। इसी तरह के कम्यूनिटी लीडर्स ब्रिटिश वर्किंग क्लास में भी उठ रहे हैं।
क्या हैं ग्रूमिंग गैंग्स :
ग्रूमिंग गैंग्स से अभिप्राय उन लोगों के समूह से है, जिन्होनें श्वेत लड़कियों का यौन शोषण, बलात्कार और हत्या भी की। इन गिरोहों के निशाने पर ऐसी श्वेत लड़कियां होती थीं, जिनके परिवार में कुछ न कुछ समस्या होती थी। इन लड़कियों को ये लोग यौन कार्यों में प्रशिक्षित करते थे। और फिर उन्हें तवायफ़ बनाने की ओर धकेलते थे। इसके साथ ही वे नशे की दुनिया में भी इन लड़कियों को धकेलते थे।
इन समूहों में अधिकांश लोग पाकिस्तान मूल के हैं। इसी लिए कई लोग इन समूहों को पाकिस्तानी रेप गैंग्स कहते haiन। एक यूजर ने एक्स पर इसी वीडियों के उत्तर में लिखा कि हमें इन्हें ग्रूमिंग फ़ैमिलीज़ कहना चाहिए, क्योंकि ये सभी आपस में जुड़ी हुई हैं और इन लड़कियों को इनके या तो अपने या फिर विस्तारित कुनबों में तस्करी कर दिया जाता था। और सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यही है कि इस तरह का व्यवहार इनके कुनबों में स्वीकृत ही नहीं था, बल्कि वे इसे बढ़ाते थे और यह अभी तक जारी है।
डेविड ने सत्ताधारियों को झूठा भी कहा। उन्होनें कहा कि जिन कुलीनों की बात हम कर रहे हैं, वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने ट्रांसजेंडरवाद के बारे में झूठ कहा, जिन्होनें बहुसंस्कृतिवाद के विषय में झूठ कहा और जिन्होनें वैश्वीकरण के चमत्कारों के विषय में झूठ कहा, या फिर उस बेवकूफी के बारे में झूठ कहा, जो अभी हम यूक्रेन और गाजा में dएख रहे हैं। ये सभी एक ही लोग हैं।
उसके बाद उन्होनें कहा कि और ये सारी बातें क़ानून में गहरी पैठ बना चुकी हैं। ये उन विशेषज्ञों के शासन में गहरी पैठ बना चुकी हैं जिन्हें ब्लेयर के नेताओं ने बनाया था। ये उन विश्वविद्यालयों में गहरी पैठ बना चुकी हैं जिन्होनें इन विचारों को शरण दी। सबसे ज़्यादा ये इस विनाशकारी क़ानून व्यवस्था में गहरी पैठ बना चुकी हैं। क्या आपको एहसास है कि हम असल में अपनी क़ानून व्यवस्था की बुनियाद ही बदल रहे हैं? यह विनाशकारी है। यह विनाशकारी है। लेकिन हम बदल सकते हैं।
यूट्यूब पर इस इंटरव्यू पर जो टिप्पणियाँ हैं, लगभग सभी ने डेविड का समर्थन किया है।

















