नशे में उड़ रहे पंजाब के युवा नशे को लेकर रोज ऐसी नई नई कहानियां लिख रहे हैं जिनको सुन कर कलेजा मुंह को आता है। जालंधर में नशा छुड़ाओ केंद्र में इलाज के लिए भर्ती हुए तीन युवक फरार हो गए जिनमें दो युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। थाना भोगपुर की पुलिस चौकी लाहदड़ा के अंतर्गत गांव सिंहपुर में देर रात शराब के ठेके के पास दोनों के शव बरामद मिलने से सनसनी फैल गई है। मृतकों की पहचान गुरसेवक सिंह (35) निवासी कोटली (होशियारपुर) और नवदीप सिंह (30) निवासी काला संघियां (कपूरथला) के रूप में हुई है।
नशा छुड़ाओ केंद्र से भागे तीन युवक, दो की मौत
जानकारी के अनुसार, दोनों युवक नशा छुड़ाओ केंद्र बुल्लोवाल (होशियारपुर) से 3 अक्तूबर को भाग गए थे। इसके बाद वे गांव सिंहपुर स्थित शराब ठेके पर अपने परिचित सुखबीर सिंह के पास पहुंचे। उनके साथ एक और युवक जगजीत सिंह उर्फ शाका निवासी रिहाना जट्टां (होशियारपुर) भी था। बताया गया कि तीनों ने ठेके पर कुछ देर रुककर शराब पी और कहा कि उन्हें नींद आ रही है। दोनों युवक वहीं लेट गए, लेकिन बाद में जब उन्हें उठाने की कोशिश की गई तो वे बेहोश मिले। यह देखकर शाका मोटरसाइकिल लेकर मौके से फरार हो गया।
स्थानीय लोगों ने दी सूचना, अस्पताल में मृत घोषित
स्थानीय लोगों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को सूचना दी। एंबुलेंस टीम ने दोनों युवकों को सरकारी अस्पताल काला बकरा पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। भोगपुर पुलिस ने जिस ठेके पर युवकों ने शराब पी थी उसके ठेकेदार सुखबीर सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
प्रारंभिक जांच में नशे की अधिक मात्रा की पुष्टि
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तीनों युवकों ने नशा छुड़ाओ केंद्र से भागने के बाद भारी मात्रा में नशा किया था। पुलिस के अनुसार, नशे की हालत में किसी अज्ञात वाहन से टकराने के कारण दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए होंगे। एक युवक के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है और फरार युवक जगजीत सिंह उर्फ शाका की तलाश की जा रही है।
पंजाब में बढ़ता नशे का खतरा, समाज के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर से यह सवाल खड़ा करती है कि पंजाब के युवाओं को नशे के इस दलदल से निकालने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा। नशा छुड़ाओ केंद्र से भागने और फिर मौत के इस सिलसिले ने प्रदेश के प्रशासनिक इंतज़ाम और नशा मुक्ति योजनाओं पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। समाज और प्रशासन दोनों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि अब केवल नशा रोकने की बात नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

















