पाकिस्तान और बांग्लादेश कहने के लिए यह कहते हैं कि वहाँ पर अल्पसंख्यकों पर कोई अत्याचार नहीं हो रहा है और कोई भेदभाव नहीं होता है। मगर वास्तविकता यह नहीं है। वास्तविकता यही है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ अत्याचार ही नहीं, बल्कि भेदभाव भी चरम पर है। और यह सब आकंडे भी बताते हैं और घटनाएं भी। ऐसा ही एक वाकया कोटरी से सामने आया है, जहां पर हिन्दू बागरी समुदाय के एक युवक को एक स्थानीय ढाबे में बहुत बुरी तरह से पीटा गया।
हिन्दू युवक का ढाबे पर बैठना कट्टरपंथियों को नहीं भाया
एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार दोलत बागरी नामक युवक सड़क के किनारे एक ढाबे पर लंच करने के लिए गया था। मगर ढाबे के माली और कुछ और लोगों को उसका वहाँ बैठना पसंद नहीं आया और उन्होनें उसका विरोध किया। उसके बाद इन लोगों ने उसके हाथ और पैर रस्सी से बांध दिए और साथ ही उसकी जेब से 60,000 रुपए भी छीन लिए। वह दया की भीख माँगता रहा, मगर लोगों ने उससे कहा कि उसकी हिम्मत कैसे हुई यहाँ पर खाना खाने की। उसके साथ हुई यह घटना जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तब पुलिस हरकत में आई और रिपोर्ट लिखी। हालांकि अभी तक कोई भी गिरफ़्तारी नहीं हुई है। होटल मालिक के साथ फैयाज अली, अरशद अली, मोइन अली, शफी मुहम्मद, नियाज, डार मुहम्मद और इकराम के खिलाफ शिकायत लिखी गई है।
पुलिस के खिलाफ अदालत पहुंचा मामला तब दर्ज किया पीड़ित का केस
पुलिस ने यह शिकायत भी तब दर्ज की है, जब वहाँ के एसएसपी और एसएचओ के खिलाफ जिला और सत्र अदालत में एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका के दायर होने के बाद ही शिकायत दर्ज की गई, मगर अभी तक किसी भी गिरफ़्तारी का न होना, इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की क्या स्थिति है?
बार-बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह बात उठाई जाती है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ होते भेदभाव और अत्याचार के विषय में इतना सन्नाटा क्यों होता है? क्यों वहाँ पर हिंदुओं के साथ होने वाली हिंसा पर अन्तराष्ट्रीय मंचों पर बात नहीं होती है?
क्या कहती है हालिया रिपोर्ट?
दोलत के साथ जब यह घटना हुई है, तो उसे समय एक और रिपोर्ट मीडिया में छाई हुई है। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान में हिंदुओं, ईसाइयों, शिया और अहमदी समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव और अत्याचार हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग ने वर्ष 2025 की अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान को विशेष चिंता वाले देशों की सूची में शामिल करने की सिफारिश की है।
इसने कहा है कि वहाँ पर धार्मिक अल्पसंख्यकों जैसे ईसाई, हिंदू, शिया और अहमदियों के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हुई है। यह सभी ने देखा है कि कैसे उस अहमदी समुदाय के लोगों के साथ तो उत्पीड़न की हर सीमा ही पार की जा रही है, जिसने पाकिस्तान के निर्माण में योगदान दिया था।
शिया और अहमदिया भी सुरक्षित नहीं
मगर शिया और अहमदी तो मुसलमान होने के बाद भी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं, तो हिंदुओं के साथ होने वाले उत्पीड़न और अत्याचार की तो कल्पना ही की जा सकती है। अभी हाल ही में पाकिस्तान के बाल अधिकार राष्ट्रीय आयोग (एनसीआरसी) की एक रिपोर्ट में बच्चों के साथ व्यवस्थागत पूर्वाग्रह, संस्थागत उपेक्षा और लक्षित दुर्व्यवहार के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
बड़े लोगों के साथ ही भेदभाव या उत्पीड़न की घटनाएं नहीं होती हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों के बच्चों के साथ भी दुर्व्यवहार की घटनाएं आम हैं। 11 अगस्त 2025 को क्रिश्चियन डेली की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कई प्रकार से दुर्व्यवहार किये जा रहे हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दिवस के अवसर पर ईसाइयों ने एक रैली निकाली थी, जिसमें अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूह रवादरी तहरीक के अध्यक्ष सैमसन सलामत ने लाहौर प्रेस क्लब में एक फोरम को बताया था कि संसद को एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन ब्लेसफ़ेमी के झूठे आरोपों की जांच के लिए करना चाहिए, जिसके चलते लोग मॉब लिंचिंग का शिकार हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से न केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा की मांग की थी, बल्कि साथ ही मुस्लिम कट्टरपंथी समूहों पर कदम उठाने की भी मांग की थी, जो धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और घृणा भड़काते रहते हैं। और उन्होनें यह भी मांग की थी कि स्कूल के पाठ्यक्रम से भेदभाव और घृणा की सामग्री को हटाया जाए।
हिन्दुओं-ईसाइयों से करा रहे बंधुआ मजदूरी
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि कैसे हिन्दू और ईसाई बच्चों को बंधुआ बाल मजदूरी, बाल विवाह और जबरन मतांतरण जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। इनमें बताया था कि सबसे भयानक स्थिति पंजाब की थी, जहां पर अल्पसंख्यक बच्चों के साथ हिंसा के 40% मामले सामने आए थे। स्कूल में भी इन बच्चों के दिलों में डर भरा रहता है।
और ये रिपोर्ट ही नहीं बल्कि दोलत के साथ जो हुआ, ऐसी घटनाएं भी बताती हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति क्या है?

















