भारत में किसान आंदोलन के दौरान हो या गाजा में हो कथित पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग मुश्किलें खड़ी करती रही हैं। वो गाजा में एक बार जबरन अपना एक्टिविज्म चला चुकी हैं। इस बार 400 से अधिक लोगों के साथ ग्रेटा समंदर के रास्ते अवैध तरीके से गाजा में घुस रही थीं, तो उन्हें इजरायल ने गिरफ्तार कर लिया। अब ग्रेटा थनबर्ग पीड़ित बनकर कह रही हैं कि इजरायली सेना ने उन्हें एक ऐसी जेल में कैद कर दिया है, जहां बेडबग्स (खटमल) की भरमार है। स्वीडिश अधिकारियों को भेजे ईमेल में ग्रेटा ने शिकायत की कि उन्हें न पर्याप्त खाना मिला, न पानी, और न ही आराम। उनके शरीर पर चकत्ते निकल आए हैं, जो शायद इन कीड़ों की वजह से हैं। उन्हें घंटों कठोर सतहों पर बैठी रहीं।
एक अन्य कैदी ने आरोप लगाया कि इजरायली सैनिकों ने ग्रेटा को कुछ झंडे थमाकर उनकी तस्वीरें खींचीं, लेकिन ये झंडे किसके थे, ये साफ नहीं।
घटना की पूरी कहानी: फ्लोटिला पर हमला
ये सब तब शुरू हुआ जब ग्रीटा ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला नाम की एक मुहिम का हिस्सा बनीं। ये एक बड़ा समूह था, जिसमें 40 से ज्यादा नावें शामिल थीं, और कुल 437 लोग सवार थे – कार्यकर्ता, सांसद, वकील। उनका मकसद था गाजा पहुंचकर वहां की घेराबंदी तोड़ना और मानवीय सहायता पहुंचाना। लेकिन इजरायल ने इन नावों को गाजा से करीब 75 मील दूर ही रोक लिया। गुरुवार-शुक्रवार की रातों में इजरायली नौसेना ने सभी नावें पकड़ लीं और हर सवार को गिरफ्तार कर लिया। ग्रीटा को केट्जियोट नाम की जेल में डाल दिया गया, जो नेगेव रेगिस्तान में है। इसे आंसर III भी कहते हैं, और यहां ज्यादातर फिलिस्तीनी कैदियों को रखा जाता है, जो कथित तौर पर उग्रवादी या आतंकी गतिविधियों के आरोपी होते हैं। दिलचस्प बात ये कि ग्रीटा के साथ ये दूसरी बार हुआ – इस साल की शुरुआत में भी उन्हें इसी तरह पकड़कर देश से बाहर कर दिया गया था।
इजरायल-गाजा का कनेक्शन
ये फ्लोटिला इजरायल की गाजा पर कथित समुद्री घेराबंदी को चुनौती देने के लिए निकला था। दावा किया जा रहा है कि गाजा में चल रहे तनाव के बीच ये लोग खाना, दवा जैसी बुनियादी चीजें ले जा रहे थे। लेकिन इजरायली सेना ने इसे रोक दिया। अशदोद बंदरगाह पर कैदियों को लाने के बाद इजरायल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-ग्विर वहां पहुंचे। उन्होंने कैद कार्यकर्ताओं की ओर इशारा करते हुए कहा, “ये फ्लोटिला के आतंकी हैं।” वहीं ये कथित एक्टिविस्ट “फ्री फिलिस्तीन” के नारे लगा रहे थे।
स्वीडन की तरफ से क्या हो रहा है
इस बीच स्वीडिश विदेश मंत्रालय की ओर से ग्रेटा की मदद की कोशिश की गई। इजरायल में स्वीडिश दूतावास के अधिकारी जेल में ग्रेटा से मिले। उन्होंने बताया कि वो डिहाइड्रेटेड हैं। उन्हें न पानी मिला, न खाना पर्याप्त। चकत्ते बेडबग्स से लगते हैं। कठोर व्यवहार हुआ, घंटों सख्त सतहों पर बैठी रहीं।
गौरतलब है कि ग्रेटा थनबर्ग, जो कि खुद को पर्यावरण एक्टिविस्ट कहती है, वह दुनियाभर में सरकारों को अस्थिर करने वाले गैंग का मेंबर के तौर पर सामने आ चुकी है। कहने को तो वो क्लाइमेट एक्टिविस्ट है, लेकिन वो भारत में किसान आंदोलन के दौरान भी सक्रिय थी। गाजा में युद्ध चल रहा है, लेकिन वहां भी ग्रेटा टांग अड़ा रही है।













