नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POJK) में जनता सड़कों पर है और सरकार के खिलाफ हो गई है। जनता का यह गुस्सा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ है। दशकों से पीओजेके की जनता का पाकिस्तानी सरकार शोषण कर रही है और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। युवाओं और स्थानीय लोगों का यह गुस्सा अब एक आक्रमक आंदोलन में तब्दील हो गया है। इस आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने सेना का सहारा लिया लेकिन जनता का आक्रोश कम नहीं हुआ और आखिर में पुलिस की गोलीबारी में 12 लोगों की मौत के बाद पाक पीएम शहबाज शरीफ और उनकी सरकार को झुकना ही पड़ा।
प्रदर्शनकारियों ने छीने सेना के हथियार…दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
पीओजेके में प्रदर्शन में हुए पुलिस और सेना की गोलीबारी में 200 से ज्यादा घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सेना के हथियार छीन लिए और सेना को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा है। जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। सेना की कई गाड़ियों में आग लगाई गई है। स्थिति के बेकाबू होने के बाद बैठक हुई। जिसमें शहबाज सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीक कर इस विस्फोटक स्थिति के समाधान की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों और सरकार दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत के बाद कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी है। हालांकि अभी इसके नतीजों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अब देखना यह है कि बैठक में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी है क्या शहबाज सरकार उनको मानती है और अपनी बातों पर टिकी रहती है।

प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच क्या हुई बातचीत?
मुजफ्फराबाद के पीसी होटल में शुक्रवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की तरफ से गठित समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। जिसमें पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ, संघीय मंत्री तथा पीओजेके सरकार के मंत्री शामिल हुए। बैठक में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी सदस्यों के साथ बातचीत हुई। बैठक में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी है उनमें हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों की मौतों के मामलों में आतंकवाद निरोधक कानून की उचित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने और जरूरत होने पर न्यायिक आयोग नियुक्त किए जाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा 1 और 2 अक्टूबर की घटनाओं में मारे गए व्यक्तियों के परिजनों को वही मुआवजा मिलेगा जो सुरक्षा बलों के मामलों में निर्धारित है।
गोली लगने से घायल प्रति व्यक्ति को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। प्रत्येक मृतक के परिवार के एक सदस्य को 20 दिनों के भीतर सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त मुजफ्फराबाद र पुंछ संभागों में दो नए इंटरमीडिएट और सेकेंडरी शिक्षा बोर्ड स्थापित किए जाएंगे। पीओके के तीनों शिक्षा बोर्डों को 30 दिनों के भीतर संघीय इंटरमीडिएट और सेकेंडरी शिक्षा बोर्ड इस्लामाबाद से जोड़ा जाएगा। सरकार 15 दिनों के भीतर स्वास्थ्य कार्ड लागू करने के लिए धन जारी करेगी।
29 सितंबर के बाद पीओके में ऐसा क्या हुआ जो मचा हुआ है बवाल
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर (POJK) में सरकार वर्सेज स्थानीय नागरिकों के बीच के विवाद ने हड़ताल का रूप ले लिया है। 29 सितंबर से स्थानीय पब्लिक एक्शन कमेटी ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। इसके बाद प्रदर्शन तेज हुए और जनता सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर गई। पीओके में आंदोलन की शुरुआत आटे की कीमत को लेकर हुई। यहां आटे की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई थी जिससे नागरिकों में रोष था। इसी असंतोष ने धीरे-धीरे विद्रोह का रूप अख्तियार कर लिया। कश्मीर संयुक्त नागरिक कमेटी ने 38 मांगों की एक लिस्ट सरकार को सौंपी है। इनमें प्रवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा की 12 सीटों को समाप्त करना और पीओके शासन के प्रमुख लोगों का भत्ता और वीआईपी कल्चर खत्म करना प्रमुख है।

















