आज जेएनयू में दुर्गा पूजा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा के दौरान वामपंथी संगठनों द्वारा हिंसक हमला किया गया। आईसा, एसएफआई, डीएसएफ, जैसे वामपंथी छात्र संगठनों ने साबरमती टी-पॉइंट पर शाम लगभग 7 बजे विसर्जन में शामिल विद्यार्थियों पर जूते-चप्पल दिखाए, पत्थरबाज़ी की और अभद्र नारेबाज़ी की। इस घटना में कई छात्राएँ और विद्यार्थी घायल हुए। यह हमला केवल एक शोभायात्रा पर नहीं, बल्कि जेएनयू के सांस्कृतिक सौहार्द और भारतीय परंपराओं पर सोचा-समझा प्रहार था।
बीते 10 दिनों तक जेएनयू परिसर में माँ दुर्गा की उपासना शांतिपूर्ण और भव्य ढंग से चल रही थी, जिसमें 5 हज़ार से अधिक विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नवमी के अवसर पर तो हज़ारों छात्रों ने प्रसाद ग्रहण किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह आयोजन विद्यार्थियों की आस्था और विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। किन्तु वामपंथी संगठनों ने आज हिंसा और अराजकता फैलाकर जेएनयू की इस सकारात्मक छवि को कलंकित किया। इससे पहले भी यही संगठन महिषासुर का नारा लगाकर हिंदू त्योहारों का अपमान कर चुके हैं। प्रश्न उठता है कि भारतीय त्योहारों और उत्सवों के प्रति वामपंथियों में इतनी गहरी नफरत क्यों है?
एबीवीपी जेएनयू के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा, “जेएनयू का वातावरण हमेशा से विविधता और उत्सवधर्मिता से समृद्ध रहा है। दस दिनों तक विद्यार्थियों ने माँ दुर्गा की भक्ति में सहभागिता की, जिससे विश्वविद्यालय का सांस्कृतिक सौंदर्य और अधिक प्रखर हुआ। लेकिन वामपंथी छात्र संगठनों ने इस पवित्र आयोजन को भी हिंसा और घृणा से कलंकित किया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन पर हमला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की उत्सवधर्मी परंपरा और विद्यार्थियों की आस्था पर सीधा प्रहार है। एबीवीपी किसी भी कीमत पर ऐसी सांस्कृतिक आक्रामकता को बर्दाश्त नहीं करेगी।”
एबीवीपी जेएनयू के मंत्री प्रवीन पीयूष ने कहा, “आज की घटना ने एक बार फिर वामपंथी मानसिकता का असली चेहरा सामने ला दिया है। ये संगठन न तो छात्रों की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हैं और न ही परिसर की शांति का। दुर्गा विसर्जन जैसी पावन परंपरा में पत्थरबाज़ी करना और छात्राओं तक पर हमला करना निंदनीय और शर्मनाक है। यह विश्वविद्यालय को अस्थिर करने की गहरी साज़िश है। हम प्रशासन से माँग करते हैं कि हिंसक गतिविधियों में शामिल सभी वामपंथी छात्रों की पहचान कर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी संगठन छात्रों के सांस्कृतिक अधिकारों को कुचलने का दुस्साहस न कर सके।”
जेएनयूएसयू के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने कहा, “आज वामपंथी गुंडों ने जिस तरह से शोभायात्रा में हिंसा की और छात्राओं पर पत्थरबाज़ी तक की, उससे यह सिद्ध हो गया कि उन्हें भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपराओं से गहरी नफरत है। यह केवल छात्रों पर हमला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक सौहार्द और भाईचारे पर सीधा प्रहार है। दुर्भाग्य है कि जो संगठन स्वयं को प्रगतिशील कहते हैं, वही सबसे अधिक त्योहारों और भारतीय मूल्यों का अपमान करते हैं। जेएनयूएसयू इस घटना की कड़ी निंदा करता है और प्रशासन से माँग करता है कि तुरंत और कठोर कार्रवाई कर परिसर में शांति और सांस्कृतिक सौहार्द को पुनः स्थापित किया जाए।”

















