देहरादून: देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में आलीशान और ऊंची मीनारों वाली मस्जिदें बनाए जाने की मानो प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। भवन निर्माण संबंधी नियमों को ताक में रख कर ऐसे निर्माण हो रहे है और निर्माण की अनुमति देने वाली सरकारी एजेंसियां खामोश हैं।
पिछले दिनों हरिद्वार के सुल्तानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बनाए जाने और उसकी मीनार की ऊंचाई को लेकर सवाल खड़े हुए थे। हरिद्वार जिला प्रशासन ने इसका निर्माण कार्य रोकते हुए नोटिस जारी किया था। बताया जाता है कि नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला यानि स्पष्ट है कि उक्त मस्जिद बिना किसी सरकारी अनुमति के बनाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट का 2009 और 2016 का ऐसा निर्देश है कि कोई भी धार्मिक भवन या संरचना बिना जिला अधिकारी के अनुमति के नहीं बनाई जा सकती। इसी तरह नैनीताल में आलीशान मस्जिद परिसर को धीरे धीरे बड़ा आकार दे दिया गया। जब उत्तराखंड राज्य बना तो ये छोटी से मस्जिद थी और इसके बाद 2004- 05 में तिवारी सरकार और फिर हरीश रावत सरकार में इसकी ऊंची मीनार और बड़ा परिसर बन कर तैयार हुआ।
पछुवा दून में रामपुर मंडी सेलाकुई की आलीशान मस्जिद को लेकर भी सवाल उठे थे कि इसने कैसे इतना विशाल और भव्य रूप लिया इसे कहां से इतना फंड मिला ? इसके निर्माण को लेकर कोई प्रशासनिक अनुमति मिली थी या नहीं ?
सहसपुर का जमीयत उलूम मदरसा चर्चा में
सहसपुर में जमीयत उलूम मदरसा और मस्जिद को लेकर खासी चर्चा हुई जहां गगनचुंबी पानी की टंकी बना कर उस पर लाउडस्पीकर लगा दिया गया था। उक्त मदरसे की एक मंजिल जिला प्रशासन ने सील की थी क्योंकि वो बिना अनुमति के बना दी गई थी।
ऐसे ही हरिद्वार जिला में भी कई स्थानों पर मदरसा मस्जिद बनाई गई है।
प्रदेश में 722 मस्जिदों का निर्माण
उत्तराखंड में 722 से अधिक मस्जिदों का निर्माण हो चुका है जिसका आंकड़ा सरकार के पास भी है। इनमें सबसे ज्यादा मस्जिदें सनातन गंगा नगरी हरिद्वार जिले में है जिनके संख्या 322 बताई गई है।देहरादून जिले में 155, उधम सिंह नगर में 144 और नैनीताल जिले में 48 मस्जिदें हैं। खास बात ये कि इनमें से शायद ही कोई ऐसी हो जिसमें भव्यता का निर्माण कार्य न चल रहा हो। दिलचस्प बात ये है कि कुछ चिन्हित स्थानों पर मस्जिदों ने भव्यता के साथ साथ बड़ा आकार लेना भी शुरू कर दिया है मानो यहां कोई कंप्टीशन चल रहा हो कि कौन ऊंची मीनार बनाएगा या कौन बड़ी से बड़ी मस्जिद बनाएगा।
बिना अनुमति के बनाई जा रही मस्जिदें
खास बात ये कि इनमें कोई भी निर्माण संबंधी अनुमति नहीं ले रहा वो इस लिए की अनुमति प्राप्त करने के लिए उन्हें भूमि, संस्था पंजीकरण, आय व्यय का ब्यौरा और अन्य दस्तावेज दिखाने पड़ते हैं जो कि बहुत से मस्जिद इंतजामिया कमेटी के पास है ही नहीं। कई इमारतें ऐसी है जो कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे करके बनाई गई है और फिर उन्हें वक्फ बोर्ड में पंजीकृत करवा दिया गया,इसका नतीजा ये हुआ कि प्रशासन इनके खिलाफ कार्रवाई करने से परहेज करता रहा।
पिछले दिनों वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करवाने के दौरान भी ऐसे ही पेच उलझे हुए दिखाई दिए हैं।
बरहाल देवों की भूमि उत्तराखंड में इस्लामिक प्रतीक चिन्हों की बढ़ती आलीशान बसावट ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं ? जिनका उत्तर खोजा जा रहा है कि आखिर यहां ऐसी आलीशान धार्मिक इमारतों को खड़ा करने के पीछे असल मकसद क्या है ?

















