भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2 अक्टूबर को भुज (गुजरात) के पास एक सैन्य अड्डे पर शस्त्र पूजा के दौरान पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सर क्रीक सेक्टर में पाकिस्तान की किसी भी हरकत का जवाब इतना कड़ा होगा कि “इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे।”
सर क्रीक क्या है- सर क्रीक गुजरात (भारत) और सिंध (पाकिस्तान) के बीच 96 किलोमीटर लंबा दलदली क्षेत्र है। यह अरब सागर में जाकर मिलता है। पहली नजर में यह कीचड़ और दलदल से भरी बंजर जमीन जैसा लगता है लेकिन यही जगह भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चले आ रहे सीमा विवाद का केंद्र है। 1947 में बंटवारे के बाद सिंध पाकिस्तान में और गुजरात भारत में आ गया। 1968 में एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने कच्छ क्षेत्र के कई विवाद सुलझाए, लेकिन सर क्रीक का मामला अटका रह गया। पाकिस्तान का दावा- 1914 के एक प्रस्ताव के आधार पर कहता है कि पूरी खाड़ी सिंध प्रांत की है और सीमा पूर्वी तट पर होनी चाहिए। भारत का तर्क : थालवेग सिद्धांत लागू होना चाहिए, जिसके अनुसार सीमा पानी के बीच बहने वाले मुख्य चैनल में तय होगी। भारत इसके समर्थन में 1925 के नक्शों और स्तंभों का हवाला देता है। पाकिस्तान कहता है कि यह सिद्धांत केवल नदियों पर लागू होता है, ज्वारीय मुहानों पर नहीं।
क्यों है अहम- सर क्रीक सिर्फ सुरक्षा के नजरिए से ही जरूरी नहीं है। यह जगह भले ही बंजर और सूनी दिखती हो, लेकिन इसके पीछे बड़े कारण हैं। यहां तेल और गैस के भंडार मिल सकते हैं, और इसी जगह से अरब सागर में समुद्री सीमा और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) तय होते हैं। इस विवाद का असर मछुआरों पर भी पड़ता है। वे कई बार गलती से दूसरे देश के पानी में चले जाते हैं और पकड़े जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून में ऐसे मामलों में हल्की सजा का प्रावधान है, लेकिन भारत और पाकिस्तान दोनों उन्हें लंबे समय तक जेल में रखते हैं। इससे उनकी रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ता है। हाल ही में राजनाथ सिंह ने यहां ‘टाइडल बर्थिंग’ सुविधा और संयुक्त नियंत्रण केंद्र (JCC) का उद्घाटन किया, जिससे तटीय सुरक्षा और ऑपरेशन क्षमता मजबूत होगी।















