आज दुनिया आपस में जुड़ी हुई है, लेकिन किसी भी देश की असली ताकत उसके स्वदेशी और स्वावलंबन में होती है। भारत को अपने आर्थिक दर्शन और धर्माधारित जीवन दृष्टि पर आधारित एक नया विकास मॉडल बनाना होगा, जो सबको जोड़े और समाज की सामूहिक प्रगति सुनिश्चित करे। यह मॉडल केवल पूजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर किसी के लिए उपयोगी और समग्र होगा। डॉ. मोहन भागवत जी जी ने कि – “हमें अपने आर्थिक दर्शन पर आधारित एक नया आर्थिक मॉडल बनाने की आवश्यकता है। विश्व परस्पर निर्भरता से संचालित होता है, लेकिन स्वदेशी और स्वावलंबन का कोई विकल्प नहीं है।”
यह विचार केवल आर्थिक नीति तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की राह प्रशस्त करने वाला दृष्टिकोण है। आज विकास की परिभाषा केवल भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। “हमें धर्म के आधार पर ऐसा विकास मॉडल तैयार करना होगा जो सभी को जोड़ सके और समाज की सामूहिक प्रगति सुनिश्चित करे। यह केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि सभी के लिए उपयोगी और समग्र होगा।” यह मॉडल मानवता के लिए संतुलन, समरसता और समग्र विकास का आधार बनेगा। संघ का मानना है कि आदर्श मॉडल का निर्माण केवल किसी सिस्टम या तंत्र से संभव नहीं है। “सिस्टम बदलने की शक्ति और इच्छा सीमित होती है, असली प्रेरणा और क्षमता समाज की मजबूत इच्छाशक्ति से आती है।” यानी समाज के हर वर्ग की सहभागिता और जागरूकता ही वास्तविक परिवर्तन का सूत्रधार है। संघ की शाखा गतिविधियों के माध्यम से एक स्वयंसेवक न केवल व्यक्तिगत रूप से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी विकसित होता है। डॉ. मोहन जी भागवत के अनुसार- “एक स्वयंसेवक नियमित शाखा सहभागिता से व्यक्तित्व ,कर्तृत्व, नेतृत्व, बुद्धि और भक्तिका विकास करता है।”
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यही निर्मित स्वयंसेवक समाज में आदर्श प्रस्तुत कर परिवर्तन का आधार बनते हैं। भारत का आत्मस्वरूप केवल अपने देश तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए कल्याणकारी है। “भारत का यही आत्मस्वरूप आज की देश-काल-परिस्थिति से सुसंगत शैली में फिर से विश्व में खड़ा करना है। पूर्वज प्रदत्त इस कर्तव्य को हम सब मिलकर पूर्ण करें।” विजयादशमी का यह पर्व इसी संकल्प का प्रतीक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते हुए पंच परिवर्तन कार्यक्रम को समाज के सामने रखा है। इसका उद्देश्य है कि व्यक्ति और परिवार स्वयं अपने आचरण में परिवर्तन लाकर समाज को प्रेरित करें। यह पांच विषय हैं- सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध तथा स्वदेशी। इन विषयों पर स्वयंसेवकों का जीवन उदाहरण बने और समाज उनके मार्ग का अनुसरण करे- यही संघ का प्रयास रहेगा।

















