राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल : संघ और महिलाएं
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ @100 : संघ और महिलाएं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की प्रेरणा और श्रीमती लक्ष्मीबाई केलकर की पहल पर 25 अक्तूबर, 1936 को वर्धा में 'राष्ट्र सेविका समिति' की स्थापना हुई। तब डॉ. हेडगेवार ने स्पष्ट कहा था कि संघ और सेविका समिति, ये दोनों संगठन रेल की पटरियों की तरह साथ-साथ और एक-दूसरे के पूरक बन कर तो चलेंगे, पर आपस में मिलेंगे नहीं

Written byविजय कुमारविजय कुमार
Oct 1, 2025, 11:58 pm IST
inविश्लेषण, संघ @100

कई राजनेता संघ को ‘महिला विरोधी’ बताते हैं। ऐसे एक नेता तो एक बुजुर्ग खानदानी पार्टी के स्वयंभू सर्वेसर्वा हैं। यद्यपि ऐसी बेसिर-पैर की बातों के चलते ही लोग उन्हें ‘पप्पू’ कहते हैं। असल में उन्हें पता ही नहीं है कि संघ केवल पुरुषों का संगठन है। इसमें महिलाएं सदस्य बन ही नहीं सकतीं। दूसरी ओर ऐसा ही ‘राष्ट्र सेविका समिति’ नाम का महिला संगठन भी है, जिसमें पुरुष नहीं जाते। दोनों के कार्यालय, कार्यकर्ता और शाखाएं अलग हैं।

विजय कुमार
वरिष्ठ प्रचारक, रा.स्व.संघ, बाबरी विध्वंस,

शाखा में मुख्यतः शारीरिक कार्यक्रम (खेल, आसन, व्यायाम आदि) होते हैं। इन्हें लड़के और लड़कियां या पुरुष और स्त्रियां एक साथ नहीं कर सकते। जैसे कबड्डी को ही लें। इसमें खिलाड़ी आपस में गुत्थमगुत्था हो जाते हैं। अतः इसे युवक और युवतियां एक साथ नहीं खेल सकते। ऐसा ही अन्य कार्यक्रमों के साथ है। इसलिए संघ की शाखा पूरी तरह पुरुष वर्ग की होती है और समिति की शाखा महिला वर्ग की। साल में एक-दो कार्यक्रम सामूहिक भी होते हैं; पर व्यावहारिक कठिनाई के कारण दोनों की दैनिक गतिविधि, शाखा, शिविर आदि अलग हैं।

आइए, राष्ट्र सेविका समिति के बारे में कुछ जानें। शाखा में जाने से स्वयंसेवक के विचार और व्यवहार में एक बड़ा परिवर्तन होता है। ऐसा ही अनुभव हुआ वर्धा निवासी श्रीमती लक्ष्मीबाई केलकर को, जब उनके बेटे शाखा जाने लगे। इससे उनके मन में यह भावना पैदा हुई कि ऐसा ही संगठन महिलाओं में भी होना चाहिए। कुछ दिन बाद जब संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार वर्धा आए, तो श्रीमती केलकर ने उनसे भेंट की।

डॉ. जी ने उनके विचारों का स्वागत करते हुए उन्हें महिला वर्ग के लिए अलग संगठन बनाने को कहा। डॉ. जी ने कहा कि ये दोनों संगठन रेल की पटरियों की तरह साथ-साथ और एक-दूसरे के पूरक बन कर तो चलेंगे; पर आपस में मिलेंगे नहीं। इस प्रकार विजयादशमी (25 अक्तूबर, 1936) को वर्धा में ‘राष्ट्र सेविका समिति’ की स्थापना हुई। इसकी कार्यशैली संघ जैसी ही है। समिति में भी गुरु का स्थान व्यक्ति की बजाय परम पवित्र भगवा ध्वज को दिया गया है। इसकी शाखा तथा शिविरों में नारियों को शारीरिक और मानसिक रूप से सबल और समर्थ बनाने वाले कार्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जाता है।

श्रीमती केलकर (वंदनीय मौसी जी) अति सामाजिक, धार्मिक और साहसी महिला थीं। 1947 में देश विभाजन से कुछ समय पूर्व तक उन्होंने कराची तथा सिंध में प्रवास किया था। समिति जीजाबाई के मातृत्व, रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व और देवी अहिल्याबाई होल्कर की कर्तव्यपरायणता को नारियों के लिए आदर्श मानती है। इसके साथ ही सेविकाएं दुष्टों को मारने और सज्जनों को अभयदान देने वाली देवी पार्वती के अष्टभुजा रूप की भी वंदना करती हैं। समिति पांच उत्सव (वर्ष प्रतिपदा, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, विजयादशमी तथा मकर संक्रांति) अपनी शाखाओं में मनाती है। इसके अलावा देश, धर्म और समाज के उत्थान में योगदान देने वाली महान नारियों की जयंती तथा पुण्यतिथियां भी मनाई जाती हैं।

हर चार-पांच साल बाद राष्ट्रीय सम्मेलन होते हैं। हिन्दू संस्थाओं द्वारा समय-समय पर चलाए गए गोरक्षा, कश्मीर बचाओ, असम समस्या, कन्वर्जन का विरोध, स्वदेशी का प्रचलन, श्रीराम जन्मभूमि जैसे राष्ट्रीय अभियानों में भी सेविकाएं सक्रिय रहती हैं। समिति ने अपने बलबूते पर कई देशव्यापी कार्यक्रम किए हैं। इनमें वंदे मातरम् स्मृति शताब्दी, डॉ. आंबेडकर जन्मशती, रानी लक्ष्मीबाई का 125वां बलिदान दिवस, भगिनी निवेदिता का 125वां जन्मदिवस, देवी अहिल्या द्विशताब्दी, रानी मां गाइदिन्ल्यू जन्मशती आदि प्रमुख हैं। समिति ने ही देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात सैनिकों को राखी भेजने की शुरुआत की थी। अब इसे अनेक अन्य संस्थाओं ने भी अपना लिया है।

समिति चित्र प्रदर्शनी, संस्कार केन्द्र, नाटक, कथा, विद्यालय, चिकित्सालय, छात्रावास, पुस्तकालय, वाचनालय, भजन मंडली, योगासन केन्द्र, पुरोहित प्रशिक्षण, साहित्य प्रकाशन आदि से समाज की सेवा कर रही है। हिन्दू संवत्सर पर प्रकाशित ‘वार्षिक दिनदर्शिका‘ देश ही नहीं, विदेश में भी बहुत लोकप्रिय है। समिति की अनेक सेविकाएं शिक्षा, नौकरी या कारोबार के लिए विदेश जाती रहती हैं। हजारों सेविकाएं विवाह के बाद वहीं बस गई हैं। वे वहीं समिति का काम करती हैं। विदेशों में संघ की अधिकांश शाखाएं साप्ताहिक हैं। उनमें स्वयंसेवक सपरिवार आते हैं। इससे भी वहां समिति का काम बढ़ रहा है। विदेश में बसे स्वयंसेवक एवं उनके परिजनों के लिए प्रायः हर पांच साल बाद भारत में एक सप्ताह का शिविर होता है। इसमें समिति की सेविकाएं भी आती हैं।

Topics: मकर संक्रांतिपाञ्चजन्य विशेषदेवी अहिल्याRSS के 100 सालराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघवर्ष प्रतिपदाडॉ. हेडगेवाररानी मां गाइदिन्ल्यू जन्मशतीलक्ष्मीबाई केलकरराष्ट्र सेविका समितिगुरु पूर्णिमारक्षाबंधनविजयादशमी
विजय कुमार
विजय कुमार
वरिष्ठ प्रचारक, रा.स्व.संघ [Read more]
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