भारत सरकार लगातार नक्सली हिंसा से भारत को मुक्त करने की कोशिशों में लगी हुई है। कांग्रेस और सीपीआई वामपंथी गठजोड़ इसी क्रम में उजागर हो गया है। इस पर अब भाजपा ने तगड़ा जुबानी हमला किया है। भाजपा ने इस वामपंथी गठजोड़ को टुकड़े-टुकड़े गैंग करार देते हुए इसे लाल आतंक का समर्थन बताया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला कुछ यूं है कि हाल ही में वामपंथी पार्टी सीपीआई के जनरल सेक्रेटरी डी राजा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें केंद्र सरकार के द्वारा चलाए जा रहे एंटी नक्सल अभियान के खिलाफ दर्द भी दिखा। लेकिन अब चूंकि खुलकर वो नक्सलियों का समर्थन नहीं कर सकते हैं तो सियासी रोटी सेंकते हुए नक्सल मुक्त अभियान भारत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “ये नक्सल मुक्त भारत क्या है? पहले तो कांग्रेस मुक्त भारत की बात हुई, क्या हुआ उसका? कल को ये कहेंगे कम्युनिस्ट मुक्त भारत।”
गुमराह करने की कोशिश
इसके साथ ही राजा ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर बीजेपी और आरएसएस मिलकर सत्ता में रहे, तो भारत का भविष्य साम्राज्यवादी हो जाएगा। अगर हम भारत को बचाना चाहते हैं, संविधान को बचाना चाहते हैं, तो बीजेपी-आरएसएस को सत्ता से हटाना होगा।” वामपंथी नेता नक्सलियों से बात करने की अपील कर रहे हैं। बता दें कि ये बयान ऐसे समय आया जब देश में नक्सलवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे ज्यादा प्रभावित नक्सल जिलों की संख्या अब सिर्फ छह रह गई है।
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बीजेपी का पलटवार
वामपंथी डी राजा की इस बयानबाजी के बाद बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करके सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा, “सीपीआई के जनरल सेक्रेटरी डी राजा कहते हैं ‘ये नक्सल मुक्त भारत क्या है!’ राहुल गांधी के गठबंधन पार्टनर सीपीआई हिंसक नक्सलियों और माओवादियों को समर्थन दे रही है! कांग्रेस-सीपीआई भारत के लाल आतंक के खिलाफ लड़ाई का विरोध कर रही है।” भंडारी ने कांग्रेस और सीपीआई पर ‘प्रो-नक्सल, प्रो-रेड टेरर’ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये दल आंतरिक सुरक्षा से समझौता कर रहे हैं और वामपंथी उग्रवाद को वैचारिक संरक्षण दे रहे हैं। बीजेपी ने इन्हें ‘पॉलिटिकल टुकड़े-टुकड़े गैंग’ करार दिया,जो कि देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
2026 तक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने का है लक्ष्य
गौरतलब है कि केंद्र सरकार नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने की मुहिम चला रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “देश 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा।” उन्होंने माओवादियों से हथियार छोड़ने की अपील की। सीपीआई इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल शामिल हैं। ये दल आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी कर रहे हैं, खासकर केरल में जहां सीपीआई सत्ता साझा कर रही है।

















