ये ट्रंप के मंत्री का बड़बोलापन है कि वो भारत को धमकी देने में लगे हुए हैं। हार्वड लुटनिक भारत और ब्राजील जैसे देशों को दुरुस्त करने की बात कर रहा है। लुटनिक का कहना है कि भारत को अमेरिका के लिए अपने बाजार को खोलना चाहिए। उनका कहना है कि कुछ देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक मुद्दों का समाधान अभी तक नहीं हो सका।
असल में यूं कहें कि हार्वर्ड लुटनिक अभी भी उसी मानसिकता में जी रहा है कि वो जब चाहेगें भारत या अन्य देशों का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेंगे और मतलब निकलते ही दूध से मक्खी की तरह बाहर कर देंगे। अमेरिका की हालिया हरकत ऐसी ही है। रूस यूक्रेन युद्ध में भारत को तेल खरीद के जरिए रूसी फंडिंग का जिम्मेदार ठहराते हुए ट्रंप ने मनमाने तरीके से 50 फीसदी टैरिफ थोप दिया और अब वो चाहते हैं कि भारत उनके साथ ट्रेड डील करे। लेकिन अमेरिका एक बात भूल गया कि भारत न केवल दुनिया का एक बड़ा मार्केट है, बल्कि कई वस्तुओं और सेवाओं का बड़ा निर्यातक भी है।
अमेरिका की चाहत
असल में ये सारा मुद्दा तेल की खरीद से जुड़ा है। अमेरिका को इस बात से दिक्कत नहीं है कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है और दुनियाभर में उसे सप्लाई कर रहा। उसे रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से ढेले भर का फर्क नहीं पड़ता है। डोनाल्ड ट्रंप को पता है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल का इंपोर्टर है। ऐसे में वो चाहते हैं कि भारत रूस की जगह अमेरिका से तेल खरीदे। हाल ही में ट्रंप ने खुलकर इस बात को कहा भी था कि वो चाहते हैं कि भारत रूस की जगह उनसे तेल खरीदे।
अमेरिका के दवाब में क्यों आए भारत?
सवाल ये है कि भारत क्यों अमेरिका के दबाव में आए? क्या इसलिए कि अगर भारत अमेरिका के सामने नहीं झुकता तो ट्रंप भारत पर और अधिक टैरिफ लगा देंगे। लेकिन, ये ट्रंप की सबसे बड़ी भूल है कि टैरिफ लगाकर भारत को दबा लेंगे। हां! य़े सच है कि अमेरिका भी एक बड़ा बाजार है। ऐसे में भारत की पहुंच उस तक रोकी जाती है तो कुछ असर तो पड़ेगा ही, लेकिन इसका दूसरा पहलू ये भी है कि इससे भारत अपने लिए एक नए बाजार की तलाश करेगा। सामान ही बेचना है तो अमेरिका ही बस बाजार थोड़े है। भारत पर टैरिफ लगा के अमेरिका देख भी चुका है कि भारत ने तुरंत अपने लिए दूसरे बाजार भी तलाश लिए हैं।
उनके वाणिज्य मंत्री हार्वर्ड लुटनिक ने एक अमेरिकी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारत, ब्राजील, स्विटजरलैंड और ताइवान जैसे कई देशों को आने वाले समय में दुरुस्त करने की जरुरत है, क्योंकि ये अमेरिका के व्यापारिक हितों के आड़े आ रहे हैं। लुटनिक धमका रहे हैं कि कोई भी देश अमेरिका में कुछ बेचना चाहते हैं तो उन्हें डोनाल्ड ट्रंप के साथ सहयोग करना ही होगा। लुटनिक के कहने का अर्थ ये है कि अमेरिका में व्यापार करने के लिए देशों को ट्रंप के इशारों पर नाचना होगा।
ये लुटनिक का ये दिवास्वप्न ही है कि वो अभी भी ये सोचते हैं कि धौंस दिखाकर व्यापार करेंगे। क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप की सुबह उठते ही ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करने वाली आदतों से दुनियाभर के देश आजिज आ चुके हैं और वो अपने लिए नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इसका नजारा हाल ही में यूएन में उस वक्त देखने को मिला था, जब नाटो का सदस्य देश हंगरी ने ट्रंप के द्वारा रूसी तेल नहीं खरीदने के फरमान को ठुकरा दिया था। ये हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान भी देखने को मिला था, जब त्यानमेन में 20 से अधिक देशों के लोग इकट्ठे हुए थे।

















