इसमें संदेह नहीं है कि बांग्लादेश में पूर्ववर्ती हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद कुर्सी पर बैठाई गई यूनुस सरकार ने मजहबी कट्टरपंथियों को खुली छूट दे रखी है। यही वजह है कि वहां की कट्टर मजहबी जमाते इस्लामी पार्टी आएदिन भारत विरोधी साजिशें रचती है और हिन्दुओं को अपनी हिंसा का शिकार बना रही है। अब मीडिया के वर्ग में जमातियों के ‘नायब’ को उद्धृत करते हुए खबर छापी गई है कि उसका दावा है, भारत के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध के जरिए गजवा-ए-हिंद की लड़ाई छेड़ी जाएगी और इसके लिए लाखों ‘लड़ाके’ एकदमू तैयार बैठे हैं।
जमाते इस्लामी के नायब की यह गीदड़भभकी अमेरिका के न्यूयार्क शहर में दी गई बताई जा रही है। बांग्लादेश की इस मजहबी कट्टरपंथी पार्टी ने वहां भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला है। गजवा-ए-हिंद की धमकी उसी का एक हिस्सा है। ‘नायब’ अमीर सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर की धमकी आगे कहती है कि ‘इस युद्ध के लिए 50 लाख जवान मजहबी उतरेंगे, जो तैयार बैठे हैं’।
यह खबर कितनी सच है, इस पर तो नजर रखी जा रही है, लेकिन इतना तो सच है कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों ने खुलकर भारत विरोधी भूमिका अपना ली है। जमाते इस्लामी के कट्टर तत्व खुलेआम ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसी बातें बोलने लगे हैं। इस्लामी कट्टरपंथियों के दुष्प्रचार एजेंडे के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि पाकिस्तान की कथित शह पर जमातियों की यह ‘धमकी’ भारत ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

बताया गया है कि जमातिए ‘नायब’ ने हाल ही में न्यूयॉर्क में किसी कार्यक्रम में गजवा-ए-हिंद की बातें की हैं। उसका यह दावा कि यह युद्ध गुरिल्ला युद्ध के जैसी होगी, कोई वजन इसलिए नहीं रखता क्योंकि उस देश में सुरक्षा की जर्जर स्थिति के बारे में पूरी दुनिया जानती है। लेकिन हां, ‘पाकिस्तान की उस देश में बढ़ती दिलचस्पी’ संभवत: वहां के मजहबी उन्मादियों को भारत विरोधी बयानबाजी करने की हवा दे रही है।
खबर के अनुसार, जमातिए सरगना ताहिर का आगे कहना था कि उन 50 लाख लड़ाकों को दो हिस्सों में बांटकर, एक को गुरिल्ला युद्ध में उतारेंगे तो दूसरा गुट एक बड़े इलाके में फैल जाएगा और भारत विरोध को भड़काएगा। ताहिर आगे 1971 के युद्ध को याद करते हुए बोला कि इस गजवा-ए-हिंद के माध्यम से 1971 में लगा कलंक धो दिया जाएगा।
इस कट्टरपंथी ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का भी उल्लेख किया और कहा कि अगर भारत ने अब हमला कि अवामी लीग भी उनके विरुद्ध नहीं, बल्कि भारत से लड़ने में जमातियों का साथ ही देगी।

पता चला है कि जमातिए सरगना ताहिर द्वारा यह जहरीला बयान गत 27 सितंबर को न्यूयॉर्क में हुए ‘बांग्लादेश अमेरिकन एसोसिएशन’ के कार्यक्रम में दिया गया था। वहीं उसने भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला, गजवा-ए-हिंद की धमकी दी और भारत का ललकारा।
जैसा पहले बताया आज एक कट्टर इस्लामी देश बन चुके बांग्लादेश में मजहबी उन्माद तेजी से बढ़ा है। कट्टरपंथी इस्लामी संगठन, जैसे जमाते इस्लामी, हिफाजत-ए-इस्लाम, हिज्ब-उत-तहरीर आदि की सक्रियता और सार्वजनिक बयानों में तेजी आती दिखी है। अलग-अलग मौकों पर बांग्लादेशी इस्लामवादी नेता या मौलवी भारत-विरोधी बयानों में शामिल रहे हैं। जैसे कि कुछ मौलवियों ने गत दिनों कोलकाता में आत्मघाती हमलों की बात कही।
इन्हीं मजहबी उन्मादियों ने वहां अल्पसंख्यक हिन्दुओं को सार्वजनिक त्योहार मनाने से रोकने की मांगें की हैं और उनमें अड़चनें डाली हैं। ‘भारत को बाहर करो’ (India Out) जैसे अभियान के जरिए भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करने की बातें भी उठी हैं। इन कट्टरपंथी बयानों से वहां के सामाजिक वातावरण में तनाव आया है, अल्पसंख्यक हिन्दुओं में सुरक्षा को लेकर भय बढ़ा है।
बेशक, भारत को बांग्लादेश की इस प्रकार की आंतरिक राजनीतिक गतिविधियों के प्रति सतर्क रहना होगा। ऐसे बयानों से सीमा क्षेत्रों पर तनाव बढ़ सकता है, जिससे आतंकवाद, मानव तस्करी आदि की आशंकाएं बन सकती हैं। बांग्लादेश की सरकार कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों को नियंत्रित करने में बुरी तरह असफल साबित हुई है।

















