बरेली शहर में हाल ही में जो उपद्रव हुआ, वह अचानक नहीं थाबल्कि इसकी साजिश पहले से ही रची जा रही थी। पुलिस की शुरुआती समझ के उलट, यह कोई सामान्य विरोध-प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी योजना थी जिसे मौलाना तौकीर रजा ने कई दिन पहले से तैयार करना शुरू कर दिया था।
झूठे आश्वासन से पुलिस को गुमराह किया गया- इस बार की घटना काफी हद तक 2010 के दंगे जैसी थी। मौलाना की ओर से पहले पुलिस को एक पत्र दिया गया जिसमें कहा गया था कि कोई प्रदर्शन नहीं होगा। इस पत्र को देखकर पुलिस को राहत की सांस मिली और उन्होंने सोचा कि अब कोई गड़बड़ी नहीं होगी। लेकिन यह पत्र असल में एक चाल थी, जिसके पीछे एक गहरी साजिश छिपी हुई थी। पत्र देने के अगले ही दिन मौलाना का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने लोगों को एकत्र होकर विरोध करने के लिए उकसाया। इस वीडियो के बाद, जैसे ही 80 प्रतिशत नमाज खत्म हुई, भीड़ अचानक इकट्ठा हो गई। इस भीड़ के हाथों में पत्थर, लाठी, चाकू, डंडे और पेट्रोल बम थे। जब इस भीड़ ने पुलिस पर हमला किया, तो पुलिस भी कुछ पल के लिए हैरान रह गई। हालांकि, पुलिस पहले से कुछ हद तक सतर्क थी। एसएसपी ने शहर के अलग-अलग प्वाइंट्स पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी पहले ही लगा दी थी। इसी वजह से उपद्रवियों को समय रहते काबू में कर लिया गया, और कोई बड़ा नुकसान नहीं हो सका।
मौके से मिले खतरनाक हथियार- घटना के बाद जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो मौके से पेट्रोल बम, कारतूस और तमंचा बरामद किया गया। इससे यह साफ हो गया कि यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे हिंसा फैलाने की ठोस तैयारी थी। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे साजिश के और सबूत सामने आने लगे। यह भी पता चला कि पूरे उपद्रव को इंटरनेट मीडिया यानी सोशल मीडिया के जरिए संचालित किया जा रहा था। यानी पीछे से कुछ लोग इस भीड़ को दिशा दे रहे थे और माहौल को भड़काने में सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि इस उपद्रव में आईएमसी के कई पदाधिकारी जैसे नदीम और अनीस की भूमिका थी। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
मोबाइल फोन से मिले अहम सुराग- पुलिस ने जब हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की और उनके मोबाइल फोन की जांच की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। खासकर नदीम के मोबाइल से कई ऐसे कॉल रिकॉर्ड मिले जो उपद्रव के दौरान किए गए थे। इससे यह साफ हुआ कि इन कॉल्स के जरिए भीड़ को कंट्रोल किया जा रहा था। पुलिस को अब यह भी यकीन हो गया है कि मौलाना तौकीर रजा इस हिंसा की तैयारी पिछले सात दिनों से कर रहे थे। यह उपद्रव कोई अचानक हुआ कदम नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश थी। जिन घटनाओं को पुलिस ने पहले अलग-अलग माना, वे सब उसी योजना का हिस्सा थीं।

















