'अब इन्हें वैक्सीन भी हलाल चाहिए', खसरे से जूझ रहे इंडोनेशिया के मुस्लिमों की हिचक बनी मुसीबत
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‘अब इन्हें वैक्सीन भी हलाल चाहिए’, खसरे से जूझ रहे इंडोनेशिया के मुस्लिमों की हिचक बनी मुसीबत

इंडोनेशिया के मादुरा द्वीप पर खसरा महामारी ने 2600 से ज्यादा बच्चों को प्रभावित किया, 20 मौतें। वैक्सीनेशन अभियान में सूअर-आधारित जेलेटिन को हराम बताकर मुस्लिम समुदाय विरोध कर रहा। स्वास्थ्य vs मजहब का टकराव, जानें पूरा मामला।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Sep 28, 2025, 11:29 am IST
inविश्व
Indoneshian khasra Halal vaccination

प्रतीकात्मक तस्वीर

हद ही कर रखी है इन लोगों ने तो…अब इन्हें दवाइयां भी हलाल प्रोसेस्ड चाहिए। हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे बड़े इस्लामिक देश इंडोनेशिया की, जहां के लोग इस वक्त खसरा महामारी से जूझ रहे हैं। इससे निपटने के लिए सरकार ने वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य विभाग डोर टू डोर वैक्सीनेशन कर रहा है। लेकिन, कुछ मुस्लिमों को इससे दिक्कत है। उनका मानना है कि इसमें सुअर से बनी जिलेटिन का इस्तेमाल किया गया है, जो कि इस्लाम में हराम है।

क्या है पूरा मामला ?

रिपोर्ट के अनुसार, मादुरा द्वीप पर खसरा का कहर बरपा है। नौ महीनों में 2,600 से ज्यादा बच्चों को ये बीमारी चढ़ चुकी है, और 20 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। स्वास्थ्यकर्मी मोटरसाइकिल पर मेडिकल बॉक्स लादे गांव-गांव घूम रहे हैं, वैक्सीन लगाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि मुस्लिम बहुल इलाके में लोग वैक्सीन को हराम मानकर मना कर देते हैं। सूअर से बनी जेलेटिन वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन ये मुसलमानों का कहना है कि ये उनकी मजहबी भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है।

इसे भी पढ़ें: ट्रंप की H-1B वीजा की बढ़ी फीस का फायदा उठाने की कोशिश में कनाडा, दिया सुनहरा मौका

स्वास्थ्य बनाम मजहब

वैक्सीनेशन बच्चों की जान बचाने का सबसे मजबूत हथियार है, ये तो डॉक्टर बार-बार कहते हैं। बिना वैक्सीन के खसरा तेजी से फैलता है, और बच्चों की मौतें बढ़ जाती हैं। लेकिन कई माता-पिता इसे हराम मानकर इनकार कर देते हैं। 2018 में इंडोनेशिया के धार्मिक नेता ने ऐसी वैक्सीन को हराम घोषित किया था, लेकिन जब कोई विकल्प न हो तो समाज हित में इस्तेमाल की इजाजत दी थी। फिर भी, ये टकराव आज भी वैक्सीनेशन को रोक रहा है।

स्वास्थ्यकर्मियों की चुनौती

अगस्त से स्वास्थ्य विभाग ने 78,000 वैक्सीन का इंतजाम किया है, जो घरों, स्कूलों और क्लीनिकों तक पहुंचाई जा रही हैं। लेकिन लोग वैक्सीन की बात सुनते ही बहाना बना देते हैं। एक नर्स और मां सुनेप पूजियाती वह्युनी बताती हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को वैक्सीन तो लगवाई, लेकिन आसपास के कई मां-बाप अभी भी हिचकिचा रहे हैं। वो कहती हैं, “इस्लाम बहुत बड़ा धर्म है। कुछ लोग शुरू से ही टीकाकरण को लेकर तैयार नहीं रहते, चाहे धार्मिक कारण हों या पारंपरिक सोच।” ये सुनकर लगता है कि स्वास्थ्यकर्मियों का काम कितना कठिन हो गया है।

हेल्थ एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि खसरा जैसी संक्रामक बीमारी को रोकने का इकलौता रास्ता मास वैक्सीनेशन है। अगर ज्यादातर लोग वैक्सीन न लें, तो संक्रमण और तेजी से फैलेगा। ये न सिर्फ बच्चों के लिए खतरा है, बल्कि पूरे समाज की सेहत पर असर डालेगा।

Topics: Measles vaccine controversy in Indonesiaखसरा वैक्सीनहलाल वैक्सीनइंडोनेशिया महामारीमादुरा द्वीप खसराइंडोनेशिया में खसरा वैक्सीन विवादMeasles vaccineHalal vaccineIndonesia epidemicMadura Island measles
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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