अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी टैलेंट को अपने देश में रोकने के लिहाज से H-1B वीजा धारकों के साथ सामने फाइनैंस की एक दीवार खड़ी कर दी। ये दीवार वीजा फीस की है, जिसे अमेरिका ने करीब एक लाख डॉलर। इस नीति का फायदा उठाते हुए दुनिया के अधिकतर देशों ने अपने देश में टैलेंट को आकर्षित करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में कनाडा के नॉन-प्रॉफिट ग्रुप ‘बिल्ड कनाडा’ ने एक मेमो जारी किया है। इसका टाइटल ‘टर्न अमेरिका’ H-1B शिफ्ट इनटू कनाडा’ एडवांटेज’ रखा गया है। इसमें कहा गया कि ये कनाडा के लिए सुनहरा मौका है – अगर जल्दी ऐक्शन लें तो GDP में 30 बिलियन डॉलर का बूस्ट मिल सकता है। लेकिन चेतावनी भी दी कि अगर कुछ न किया तो अमेरिकी कंपनियां कनाडियन टैलेंट को चुरा लेंगी।
बिल्ड कनाडा के दो बड़े सुझाव
अपने मेमो में बिल्ड कनाडा ने दो सुझाव दिए हैं। इसके तहत अलग-अलग टैलेंट सेगमेंट को टार्गेट किया गया है। पहला: H-1B वर्कर क्लोज्ड वर्क परमिट लॉन्च करो। ये करंट और प्रॉस्पेक्टिव H-1B होल्डर्स को US एम्प्लॉयर्स के लिए कनाडा में रहने-काम करने देगा। रिक्वायरमेंट्स: मिनिमम US$140K (C$200,000) सैलरी और 3-ईयर कमिटमेंट। प्रोसेसिंग 30 दिनों में, 2023 के H-1B ओपन वर्क परमिट को ट्वीक करके। इससे US कंपनियां रिलेशनशिप्स बचाएंगी बिना 1 लाख फीस के।
दूसरा: एक्सप्रेस एंट्री के अंदर ग्लोबल टॉप-100 यूनिवर्सिटी एक्सप्रेस ट्रैक बनाने की बात। MIT, हार्वर्ड, स्टैनफर्ड, IIT, त्सिंगहुआ जैसे एलीट इंस्टीट्यूट्स के ग्रेजुएट्स को PR अप्लिकेशन में 50 एक्स्ट्रा पॉइंट्स देने का सुझाव।
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कनाडाई सरकार को जल्दबाजी का सुझाव
मेमो में कनाडाई सरकार को सुझाव दिया गया है कि अगर कनाडा जल्दी H-1B वीजा को लेकर एक्शन लेने में देरी करता है तो अमेरिकी कंपनिया कनाडा को टार्गेट करेंगी। जहां, कनाडियन सिटिजन्स को बॉर्डर पर सिर्फ जॉब प्रूफ और एजुकेशन दिखाकर 3 साल का रिन्यूएबल वर्क परमिट मिल जाता है – बिना किसी फीस या लॉटरी के। H-1B पर फीस बचाने के लिए US कंपनियां कनाडियन इंजीनियर्स, साइंटिस्ट्स, नर्सेस और टेक वर्कर्स को हायर करेंगी।
अमेरिका में 70 फीसदी भारतीय H-1B वीजा धारक
आकंड़ों के अनुसार, अमेरिका में भारतीय H-1B वीजा धारकों की संख्या लगभग 5.11 लाख है। यह अनुमान जनवरी 2025 के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें कुल H-1B वीजा धारकों की संख्या 7.30 लाख बताई गई है, जिनमें से 70% से अधिक भारतीय हैं। ट्रंप के आदेश के बाद सबसे अधिक मार भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ी है। लेकिन, अमेरिकी सख्ती के बाद चीन ने इन प्रोफेशनल्स के लिए K वीजा लॉन्च कर दिया, फ्रांस-ब्रिटेन, जर्मनी भी इंडियन टैलेंट को अपनी ओर खींचने में लगे हुए हैं।












