पिछले एक दशक में भारत के पर्यटन क्षेत्र ने असाधारण प्रगति की है, विशेष रूप से ऐतिहासिक किलों, स्मारकों और सांस्कृतिक विरासत स्थलों की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये स्थल न केवल पर्यटन आय और रोजगार के महत्वपूर्ण स्रोत बन गए हैं, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समृद्धि को बढ़ाने वाले केंद्र बिंदु भी हैं। सरकार के संरक्षण प्रयासों, डिजिटल प्रचार अभियानों और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ जनता की सांस्कृतिक जागरूकता में वृद्धि ने पर्यटन परिदृश्य को नया जीवन दिया है। इसका प्रमाण प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़, बढ़ती टिकट आय और रोजगार के नए अवसरों में देखा जा सकता है।
2023 में भारत के पर्यटन क्षेत्र ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 5 प्रतिशत का योगदान दिया। इस क्षेत्र का विकास काफी तेजी से हो रहा है। अनुमान है कि 2031 तक इसका वार्षिक योगदान 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़कर 33.8 अरब डॉलर हो जाएगा, जो जीडीपी का 7.2 प्रतिशत होगा। 2023 में घरेलू पर्यटकों की संख्या 250.9 करोड़ रही, जो कोरोना महामारी के बाद 95 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान 1.889 करोड़ अंतरराष्ट्रीय और 0.952 करोड़ विदेशी पर्यटक आए, जिससे विदेशी मुद्रा में होने वाली आय 2,31,927 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


2024 में भारत के विरासत पर्यटन बाजार का अनुमानित आकार 31.98 अरब अमेरिकी डॉलर था, जिसके 2033 तक 57.14 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। इस अवधि में यह बाजार 6.8 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से वृद्धि करेगा। इस विकास का आधार भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, प्राचीन स्मारक और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। सरकार की पहलों, जैसे ‘देखो अपना देश’ अभियान और पर्यटन बुनियादी ढांचे में सुधार, घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा, आध्यात्मिक और अनुभवात्मक पर्यटन की वैश्विक मांग भी तेजी से बढ़ रही है। डिजिटल मार्केटिंग, हेरिटेज होटलों में रूपांतरण और आधुनिक तकनीक पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान कर रही है।
भारत में फिलहाल 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें ताजमहल सर्वाधिक लोकप्रिय है। 2024 में करीब 61 लाख घरेलू और 6.8 लाख विदेशी पर्यटक ताजमहल देखने आए। इसके अलावा, लाल किला (दिल्ली), आमेर किला व हवामहल (राजस्थान), आगरा का किला (उत्तर प्रदेश), गौरीशंकर किला (मध्य प्रदेश), रायगढ़ किला (महाराष्ट्र), गोलकुंडा किला (तेलंगाना) जैसे ऐतिहासिक स्थल हर साल लाखों यात्रियों को आकर्षित करते हैं। जैसलमेर किला विदेशी पर्यटकों में ‘सोनार किला’ के रूप में खासा लोकप्रिय है। उदाहरण के लिए, अप्रैल-जून 2025 में ही जयपुर के हवामहल को 3.23 लाख से अधिक घरेलू पर्यटकों ने देखा, जबकि आमेर किले को 3.19 लाख पर्यटकों ने। खजुराहो, अजंता-एलोरा, कुतुब मीनार, फतेहपुर सीकरी, सांची स्तूप, महाबलीपुरम और कर्नाटक के हम्पी जैसे स्थल भी युवाओं और परिवारों के लिए आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

अक्तूबर 2018 में उद्घाटन के बाद से अब तक लगभग 1.75 करोड़ पर्यटक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने पहुंचे और टिकट बिक्री से लगभग 400 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास के पर्यटन स्थलों और सेवाओं ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित स्मारकों में ताजमहल, कुतुब मीनार और आगरा का किला प्रमुख हैं। 2019-20 में इन स्मारकों को लगभग 4.60 करोड़ पर्यटकों ने देखा, तो 2023-24 में 5.49 करोड़ लोगों ने, यानी पर्यटकों की संख्या में करीब 19.35 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ताजमहल ने 2023-24 में लगभग 98.55 करोड़ रुपये की आय अर्जित की, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 119 करोड़ रुपये था। कुतुब मीनार विदेशी पर्यटकों के मामले में आगरा किले को पीछे छोड़ते हुए दूसरा सबसे अधिक देखा जाने वाला स्मारक बन गई है। इसके अलावा, दिल्ली का लाल किला और आगरा का किला भी लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन स्मारकों की लोकप्रियता और पर्यटन से होने वाली आय भारत की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास की गवाही देती है।

तीर्थाटन का केंद्र राम मंदिर
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद तीर्थाटन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, अयोध्या के पर्यटन क्षेत्र को भी भारी लाभ हुआ है। 22 जनवरी, 2024 को मंदिर के उद्घाटन के बाद मात्र 12 दिनों में 24 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इसके दर्शन किए। 1 जनवरी, 2025 को नए साल की पूर्व संध्या पर और नए साल के दिन लगभग 10 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, जिनमें से 2 लाख से अधिक ने सीधे रामलला के दर्शन किए। इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक लगभग 13.55 करोड़ घरेलू पर्यटकों ने अयोध्या में रामलला के दर्शन किए। वास्तव में धार्मिक पर्यटन में 70 प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि हुई। इसके साथ ही देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे वाराणसी, हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, रुद्रप्रयाग, शिर्डी, जगन्नाथपुरी और वृंदावन-मथुरा में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे धार्मिक पर्यटन को देशभर में मजबूती मिली है।
इन स्थानों पर तीर्थाटन से जुड़े नए अवसंरचनात्मक विकास कार्यों ने यात्रियों की सुविधाओं और आकर्षण बढ़ाया है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि राम मंदिर से न केवल अयोध्या की धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बना है, बल्कि पूरे भारत में श्रद्धालुओं की आस्था और पर्यटन स्तर भी बढ़ा है। प्रयागराज महाकुंभ 2025 को तो विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक होने का गौरव हासिल हुआ है। महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व तक 60 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। कुल मिलाकर, देश में तीर्थाटन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में सशक्तिकरण, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी योगदान दिया है।

पर्यटन का बदलता स्वरूप
शहरीकरण और मध्यम वर्ग के विस्तार के कारण लोग अब ग्रामीण विरासत, पारंपरिक जीवनशैली, और स्थानीय कला व शिल्प में भी रुचि लेने लगे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवन मिला है और पारंपरिक कारीगरों को समर्थन मिल रहा है। जैसे-राजस्थान में मिट्टी के बर्तनों की कारीगरी की कार्यशालाएं, केरल में शास्त्रीय नृत्य का प्रशिक्षण, पुरानी दिल्ली और वाराणसी में ‘हेरिटेज वॉक’ जैसी गतिविधियां पर्यटकों को संस्कृति से सीधे जोड़ती हैं। ये पारस्परिक अनुभव खासतौर पर युवाओं और वैश्विक सांस्कृतिक प्रेमियों में लोकप्रिय हैं, जो किसी संस्कृति को सिर्फ देखना नहीं, बल्कि जीना चाहते हैं।
विरासत पर्यटन में सातत्य आज एक मुख्य आयाम बन चुका है, जिसमें ‘हेरिटेज होमस्टे’ स्थानीय खाद्य पदार्थों का स्वाद लेना और कम प्रसिद्ध सांस्कृतिक स्थलों की खोज शामिल है। पर्यावरण और सांस्कृतिक संरक्षण का सम्मान करते हुए पर्यटक ऐसे स्थलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों संरक्षण को ध्यान में रखते हैं। केंद्र सरकार ने सतत पर्यटन के मानदंड बनाए हैं, जिनके अंतर्गत जोखिम वाली यात्रा, मेडिकल वेलनेस, गोल्फ, पोलो, ईको टूरिज्म, वन्य सफारी और कारवां पर्यटन जैसे थीम-आधारित पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मध्य प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से तेजी से उभरता हुआ राज्य है। 2024 में यहां कुल 13.41 करोड़ पर्यटक आए, 2019 की तुलना में यह आंकड़ा 50.6 प्रतिशत अधिक है। इनमें 1.67 लाख विदेशी पर्यटक शामिल थे। खजुराहो में 33,131, ओरछा में 13,960, ग्वालियर में 10,823, इंदौर में 9,964 और भोपाल में 1,522 विदेशी पर्यटक आए। राज्य के प्रमुख टाइगर रिजर्व, जैसे बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और पेंच में भी विदेशी पर्यटकों की अच्छी संख्या देखी गई। गुजरात में 2023-24 में 21 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। यहां के प्रमुख स्थल वडनगर, धोलावीरा, मोढेरा सूर्य मंदिर और अडालज में रानी की वाव हैं, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय स्थलों पर भी 2024 में लगभग 1.80 करोड़ घरेलू और 83,000 विदेशी पर्यटक आए, जो 2023 की तुला से कहीं अधिक है।

बढ़ती वैश्विक रैंकिंग और प्रतिष्ठा
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, पिछले दशक में वैश्विक यात्रा और पर्यटन विकास सूचकांक में भारत की रैंकिंग 65 से अब 39वें स्थान पर पहुंच गई है। भारत को सांस्कृतिक संसाधनों, ऐतिहासिक विरासत और हवाई परिवहन अवसंरचना के कारण पर्यटन क्षेत्र में उच्च अंक मिले हैं। ‘अतुल्य भारत’ अभियान, डिजिटल टिकटिंग, हेरिटेज वॉक, लाइट एंड साउंड शो और विरासत पुनरुद्धार जैसे पहलुओं ने पर्यटन को अत्यंत प्रगति दी है।
विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद (डब्ल्यूटीटीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत का पर्यटन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का योगदान करेगा। यह वृद्धि घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और कोविड के बाद अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की बढ़ती मांग के कारण संभव हुई है। 2024 में भारत के पर्यटन क्षेत्र का आर्थिक योगदान लगभग 21 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2019 के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। 2024 में दो करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए, जो 2019 से 23 लाख अधिक है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों द्वारा खर्च 3.1 लाख करोड़ रुपये (लगभग 36.8 अरब डॉल) तक पहुंच गया, जो 2019 से 9 प्रतिशत अधिक है।
डब्ल्यूटीटीसी के अनुसार, 2025 में पर्यटन कारोबार के 22 लाख करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचने की संभावना है, जो 2024 से कहीं अधिक है। डब्ल्यूटीटीसी की अध्यक्ष एवं सीईओ जूलिया सिम्पसन के अनुसार, इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का खर्च 3.2 लाख करोड़ रुपये और घरेलू पर्यटकों का खर्च 16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन क्षेत्र का कारोबार 2035 तक लगभग दोगुना यानी 42 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। पर्यटन क्षेत्र में घरेलू पर्यटन अभी भी मजबूत स्तंभ है, जिसने 2019 के मुकाबले 22 प्रतिशत वृद्धि के साथ पर्यटक खर्च को 15.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया है। साथ ही, व्यापारिक यात्रा में भी वृद्धि हुई है, जहां घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय खर्च मिलाकर 1.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो 2019 के मुकाबले 2.6 प्रतिशत अधिक है।
रोजगार और बुनियादी ढांचा विकास
भारत में यात्रा और पर्यटन उद्योग तेजी से रोजगार देने वाला क्षेत्र बन चुका है। 2024 के एक आंकड़े के अनुसार 4.65 करोड़ लोगों को रोजगार मिला जो देश के कुल रोजगार का लगभग 9.1 प्रतिशत है। डब्ल्यूटीटीसी के अनुमान के अनुसार, 2025 में यह संख्या 4.8 करोड़ हो सकती है, जबकि 2035 तक इसके 6.39 करोड़ तक बढ़ने का अनुमान है।
2024 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जो राष्ट्रीय आर्थिक उन्नति, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समावेशन के लिए मील का पत्थर साबित हुए। ‘स्वदेश दर्शन योजना’ के तहत 5,285.90 करोड़ की लागत से 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें से 75 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इसे और प्रभावी बनाने के लिए ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ शुरू किया गया, जिसमें 793.20 करोड़ की 34 नई परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसी तरह, पर्यटन अनुभव सुधारने के लिए ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ उप-योजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत आध्यात्मिक पर्यटन, संस्कृति व विरासत, जीवंत ग्राम कार्यक्रम, इकोटूरिज्म और अमृत धरोहर स्थलों को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल के तहत 42 पर्यटन स्थलों का चयन हुआ है।
इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने केंद्रीय एजेंसियों को सहायता योजना के अंतर्गत 65 परियोजनाओं के लिए 937.56 करोड़ रु. की मंजूरी दी, जिसमें से 38 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इस प्रकार, मंत्रालय ने पर्यटन स्थलों पर बुनियादी ढांचे को मजबूत कर, डिजिटल टिकटिंग, स्मार्ट साइनेज, गाइड सुविधा, सुलभ परिवहन और डिजिटल सूचना केंद्र जैसे नवाचारों को बढ़ावा दिया है, जिससे इस उद्योग को नई पहचान मिली है।
















