संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान कुछ तकनीकी घटनाएं और नेताओं के भाषणों में आई रुकावटों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो इन तीनों नेताओं को उनके भाषण के दौरान अलग-अलग समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, और कुछ लोग इसे “साजिश” भी मान रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के भाषण में तकनीकी समस्याएं
डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि संयुक्त राष्ट्र में उनके भाषण के दौरान उनके खिलाफ “तिहरी साजिश” रची गई। उन्होंने कहा कि जब वे भाषण दे रहे थे तब तीन घटनाएं एक साथ हुईं। उनका टेलीप्रॉम्पटर बंद हो गया, एस्केलेटर काम नहीं कर रही थी और भाषण के दौरान हॉल में आवाज भी नहीं आ रही थी।
ट्रंप का कहना है कि ये तीनों घटनाएं महज संयोग नहीं हैं, बल्कि यह जानबूझकर की गई योजना का हिस्सा हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “संयुक्त राष्ट्र को खुद पर शर्म आनी चाहिए।” ट्रंप ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके खिलाफ रची गई “साजिश” बताया है।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के भाषण में रुकावट
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल और गाजा को लेकर बोल रहे थे, तभी अचानक उनकी आवाज बंद हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल तुर्की भाषा ही नहीं, बल्कि अन्य भाषाओं में अनुवाद भी अचानक बंद हो गया। एर्दोगन उस वक्त कह रहे थे कि गाजा से इजरायली फोर्सेस को हटना चाहिए और इसी दौरान यह तकनीकी रुकावट आई। एर्दोगन ने अपने भाषण में गाजा की भयावह स्थिति को उजागर करने के लिए तस्वीरें भी साझा कीं। उनका यह भाषण काफी संवेदनशील और राजनीतिक रूप से तीखा माना जा रहा था।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के भाषण में तकनीकी समस्या
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन मुद्दे पर बोल रहे और इंडोनेशिया की ओर से शांति सेना भेजने का वादा कर रहे थे, उसी समय उनका माइक्रोफोन बंद हो गया। इससे ऑनलाइन कई अटकलें लगने लगीं कि क्या यह जानबूझकर किया गया था? हालांकि बाद में इंडोनेशियाई विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार हर नेता को निश्चित समय मिलता है, और यदि कोई निर्धारित समय से अधिक बोलता है तो माइक अपने आप बंद हो जाता है। यही कारण था कि लाइवस्ट्रीम में उनकी आवाज नहीं सुनाई दी लेकिन सभा में मौजूद लोग उन्हें साफ सुन पा रहे थे क्योंकि वे बोलते रहे।











