उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल के मैदान में करीब 100 वर्षों से रामलीला का मंचन हो रहा है। अभी हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी थी। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की रोक को हटा दिया है। अब मैदान में फिर से रामलीला का मंचन शुरू हो गया है।
उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय के बाद रामलीला कमेटी और स्थानीय लोग काफी प्रसन्न हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल हुई थी याचिका
इस वर्ष जब स्कूल के मैदान में रामलीला शुरू हुई तब प्रदीप राना ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि बच्चों के खेलकूद का मैदान समाप्त किया जा रहा है। इस कारण से छात्र छात्राओं की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि रामलीला कमेटी अवैध रूप से मैदान पर कब्जा कर रही है। याचिका की सुनवाई के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामलीला के मंचन पर रोक लगा दी थी।
रामलीला कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
इसके बाद रामलीला कमेटी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की। रामलीला कमेटी की ओर से कहा गया कि रामलीला की परंपरा करीब 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और पिछले 14 सितंबर से रामलीला वहां पर शुरू भी हो चुकी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद वहां पर रोक लग गई है और रामलीला बीच में ही रोक दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत, उज्ज्वल भूइयां एवं एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि रामलीला उत्सव को जारी रहने दिया जाय। इसके साथ ही एक बात का ध्यान रखा जाय कि छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए। उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा कि “सामान्यतः स्कूल मैदानों में धार्मिक आयोजन ठीक नहीं है, लेकिन इस मामले में रामलीला की परंपरा काफी पुरानी है। इसलिए यह अंतरिम राहत दी गई। हालाँकि हम स्कूल मैदानों में धार्मिक आयोजन का अनुमोदन नहीं करते, लेकिन यह रामलीला पिछले 100 वर्षों से हो रही है और इस वर्ष का आयोजन 14 सितम्बर से प्रारम्भ हो चुका है”
अगले वर्ष वैकल्पिक स्थल का प्रस्ताव
उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से कहा कि ज़िला प्रशासन अगले वर्ष के लिए रामलीला आयोजन के वैकल्पिक स्थल का प्रस्ताव प्रस्तुत करे। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण हरेंद्र पाल सिंह परमार ने कहा कि कुछ लोगों ने षड़यंत्र के तहत रामलीला को बंद कराने का प्रयास किया था, लेकिन सत्य की जीत हुई।











