काठमांडू (हि.स.) । नेपाल में जेन-जी के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान लूटे गए हथियारों, गोला-बारूद और संचार उपकरणों का पूरा हिसाब अब तक इकट्ठा नहीं किया जा सका है। पुलिस के अनुसार देशभर के पुलिस थानों से चोरी हुए लगभग 3,000 हथियारों में से केवल 200 ही अब तक बरामद हुए हैं। वहीं, जेलों से भागे लगभग 8,000 कैदी या बंदी अब भी फरार हैं।
आंदोलन के दौरान लूटे गए अत्याधुनिक हथियार
युवाओं के इस उग्र आंदोलन के दौरान पुलिस थानों से एसएलआर, इंसास राइफल और पिस्तौल जैसे अत्याधुनिक हथियारों की बड़े पैमाने पर लूट हुई। अकेले काठमांडू में पुलिस कार्यालयों से एसएलआर, इंसास, थ्री-एन-थ्री और बेरेटा पिस्तौल सहित हजारों राउंड गोला-बारूद चोरी हुए। देश भर से लूटे गए 10 हजार से ज्यादा कारतूसों में से अब तक लगभग 3,000 कारतूस ही बरामद हो पाए हैं।
7,000 से अधिक कारतूस अब भी गायब
पुलिस मुख्यालय के अनुसार लगभग 7,000 कारतूस अब भी अपराधियों और समाज में अराजकता फैलाने वाले समूहों के पास हैं। सुरक्षा एजेंसियों को अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि 2,800 अत्याधुनिक हथियार कहां छिपे हैं। यह स्थिति देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है।
जेलों से 8,000 कैदी फरार
नेपाल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान न केवल पुलिस थानों को निशाना बनाया गया बल्कि देश की जेलों से भी लगभग 8,000 कैदी फरार हो गए। इनमें 2,400 कैदी सेंट्रल जेल से और 700 कैदी नक्खू जेल से भागे। फरार कैदियों में कई ऐसे अपराधी शामिल हैं जो हत्या, अपहरण और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।
सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर खतरा
फरार कैदियों और लापता हथियारों ने नेपाल के लिए गंभीर सुरक्षा संकट पैदा कर दिया है। जांच में लगे कई पुलिस अधिकारियों को डर है कि जिन अपराधियों को उन्होंने जेल भेजा था, वे अब हथियार लेकर उन्हें निशाना बना सकते हैं। इस डर से कई पुलिस अधिकारी भूमिगत होने को मजबूर हो गए हैं, जिससे देश में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

















