ओडिशा: भगवान श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में वापस रखे गये सभी बहुमूल्य आभूषण
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ओडिशा: भगवान श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में वापस रखे गये सभी बहुमूल्य आभूषण

श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी का कहना है कि मंगलवार की सुबह 10:55 बजे आरंभ होकर दोपहर 2:55 बजे तक चार घंटे तक चले इस स्थानांतरण अभियान को कड़ी सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Sep 24, 2025, 01:23 pm IST
in भारत, ओडिशा
jagannath mandir puri

jagannath mandir puri

भुवनेश्वर। एक सुव्यवस्थित अभियान के तहत पुरी स्थित विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर के सभी बहुमूल्य आभूषणों और रत्नों को स्थायी रूप से दोबारा उनके मूल रत्न भंडार में वापस रखा गया। रत्नभंडार के मरम्मत जीर्णोद्धार कार्य संपूर्ण किये जाने के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इन आभूषणों को रत्नभंडार में स्थानांतरित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में कुल चार घंटे का समय लगा। श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी का कहना है कि मंगलवार की सुबह 10:55 बजे आरंभ होकर दोपहर 2:55 बजे तक चार घंटे तक चले इस स्थानांतरण अभियान को कड़ी सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया।

जुलाई में औपचारिक रूप से तैयार हुआ नवनिर्मित भंडार
उन्होंने बताया कि संपूर्ण प्रक्रिया श्रीजगन्नाथ मंदिर नियमावली, 1960 और राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई। उल्लेखनीय है कि रथयात्रा-2024 के दौरान आवश्यक संरक्षण कार्य हेतु रत्न भंडार से बहुमूल्य वस्तुएं अस्थायी रूप से मंदिर के भीतर शयन कक्ष और एक विशेष रूप से निर्मित मजबूत कोषागार में रखी गई थीं। बाहरी आभूषणों को चंगड़ा घर और फूल घर में स्थानांतरित किया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 7 जुलाई 2025 को रत्न भंडार के आंतरिक और बाहरी दोनों हिस्सों का जीर्णोद्धार पूरा किया। 19 जुलाई को नवनिर्मित भंडार को औपचारिक रूप से उपयोग के लिए तैयार किया गया।

आभूषणों के स्थानांतरण की शुरुआत पारंपरिक अनुष्ठानों से हुई
मंगलवार को संपन्न हुआ स्थानांतरण इसी वर्षभर की प्रक्रिया का अंतिम चरण था। स्थानांतरण की शुरुआत पारंपरिक अनुष्ठानों और महाप्रभु के आशीर्वाद से की गई। रत्न भंडार समिति और उच्च स्तरीय पर्यवेक्षण समिति के सदस्य पारंपरिक परिधान में जगमोहन में प्रवेश कर कार्यवाही की निगरानी के लिए उपस्थित रहे। अस्थायी आंतरिक कोषागार को मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में जिला कोषागार से प्राप्त चाबियों द्वारा खोला गया और प्रत्येक आभूषण को सावधानीपूर्वक स्थायी आंतरिक रत्न भंडार में रखा गया। इसके बाद कक्ष को बंद कर सील किया गया और चाबियाँ पुनः जिला कोषागार में जमा कर दी गईं।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कराई गई पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी
इसके बाद चंगड़ा घर खोला गया जिसमें बाहरी आभूषण सुरक्षित रखे गए थे। इसे गजपति महाराज, मंदिर प्रशासन और कोषाध्यक्ष के पास मौजूद तीन अलग-अलग चाबियों से खोला गया। सभी वस्तुओं को नवनिर्मित बाहरी रत्न भंडार में स्थानांतरित कर कक्ष को पुनः तीनों चाबियों से सुरक्षित किया गया। पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे वीडियोग्राफी भी किया गया।

आपात स्थिति से निपटने के लिए तमाम एजेंसियों को रखा गया था तैयार
स्थानांतरण के दौरान भक्तों के प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगाई गई थी । जिला कलेक्टर दिव्य ज्योति परीडा, एसपी प्रतीक सिंह और रत्न भंडार समिति के वरिष्ठ सदस्य, जिनमें सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश विश्वनाथ रथ भी शामिल थे, ने कार्य की निगरानी की। इस कार्य के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जिला पुलिस, ओड्राफ टीम, अग्निशमन विभाग और अन्य एजेंसियों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखी गई थी।

सफल स्थानांतरण के बाद समिति के सदस्यों-अधिकारियों ने किये भगवान जगन्नाथ के दर्शन
सफल स्थानांतरण के बाद समिति सदस्यों और अधिकारियों ने मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। डॉ. पाढ़ी ने राज्य सरकार, श्रीमंदिर प्रबंधन समिति, इसके अध्यक्ष श्री गजपति महाराज, उच्चस्तरीय समिति के सदस्य, नियोग समुदाय, एएसआई अधिकारियों, मंदिर कर्मचारियों, जिला एवं पुलिस प्रशासन, मीडिया और असंख्य श्रद्धालुओं सहित सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उन भक्तों के धैर्य और सहयोग को भी सराहा, जिन्हें इस दौरान अस्थायी दर्शन प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “सभी कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न किए गए और वीडियोग्राफ किए गए।” गौरतलब है कि पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को देश का एक पवित्र और सुरक्षित कोषागारों में गिना जाता है । यहां भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के बहुमूल्य आभूषणों और नित्योपचार सामग्रियों को सुरक्षित रखा जाता है।

Topics: OdishaLord Jagannath TempleGem Storesjewellery
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