संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2020 के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किए। अपने इस भाषण में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय जलवायु नीतियों, प्रवासन, सुरक्षा और वैश्विक नीतियों पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को “दुनिया का सबसे बड़ा धोखा” बताते हुए इसे पूरी तरह नकार दिया।
न्यूयॉर्क में दिए गए इस भाषण में ट्रम्प ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कोई वास्तविक या वैध विचार नहीं है। उनके अनुसार, “अब न तो ग्लोबल वार्मिंग होगी और न ही ग्लोबल कूलिंग।” उन्होंने यह दावा भी किया कि जलवायु परिवर्तन को लेकर संयुक्त राष्ट्र और अन्य संस्थाओं द्वारा की गई भविष्यवाणियाँ गलत थीं और ये भविष्यवाणियाँ “मूर्ख लोगों” द्वारा की गई थीं। ट्रम्प ने देशों से आग्रह किया कि वे “हरित घोटाले” (Green Scam) से दूर रहें, अन्यथा उनके देश विफल हो सकते हैं। उन्होंने अपने बारे में कहा कि वे भविष्यवाणियाँ करने में बहुत अच्छे हैं। इसके विपरीत, दुनिया भर के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन वास्तव में मानवीय गतिविधियों के कारण हो रहा है और यह एक गंभीर संकट है।
भाषण में ट्रम्प ने इमिग्रेशन के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि “खुली सीमाओं” की नीति के कारण कई देश संकट में हैं। उन्होंने यूरोप की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि यदि इन पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह पश्चिमी यूरोप के पतन का कारण बन सकती हैं। उन्होंने लंदन के मेयर सादिक खान को “भयानक मेयर” बताया और कहा कि यूरोप एक गंभीर प्रवासन संकट का सामना कर रहा है। सुरक्षा पर बोलते हुए ट्रम्प ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे असली खतरों से ध्यान भटका रहे हैं। उन्होंने जैविक हथियारों को मानवता के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बताया और चेतावनी दी कि यदि इनका गलत इस्तेमाल हुआ तो यह दुनिया का अंत कर सकते हैं। ट्रम्प ने अपने भाषण में एक नई योजना की घोषणा की, जिसमें अमेरिका की अगुवाई में एक एआई सत्यापन प्रणाली बनाने की बात कही गई। उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार रखने से रोकने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

















