एक तरफ इजरायल कह रहा है कि फिलिस्तीन नाम का देश नहीं रहेगा, दूसरी तरफ ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बाद अब फ्रांस, माल्टा, मोनाको और बेल्जियम भी फिलिस्तीन को एक देश के तौर पर मान्यता देने जा रहे हैं। इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक नेताओं का हुजूम इकट्ठा हुआ, जहां फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उनका देश सउदी अरब के साथ आयोजित होने वाले बैठक के दौरान फिलिस्तीन को देश के तौर पर मान्यता देगा।
मैक्रों का कहना है कि फिलिस्तीन के लिए टू स्टेट सॉल्युशन की संभावना को बरकरार रखने के लिए हमें पूरी क्षमता के साथ काम करना होगा। फ्रांस की इस घोषणा के बाद फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने एक वीडियो के जरिए आरोप लगाया कि अमेरिका ने उन्हें वीजा ही नहीं दिया था, जिस कारण से वो संयुक्त राष्ट्र की बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे।
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फिलिस्तीन को मान्यता देने से क्या होगा?
येरुशलेम में ब्रिटेन पूर्व महावाणिज्य दूत विन्सेंट फीन का कहना है कि अगर आप फिलिस्तीन को मान्यता देना चाहते हैं तो फिर आप सभी को इजरायल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करने के लिए भी तैयार रहना होगा। विन्सेंट ब्रिटेन का हवाला देते हुए कहते हैं कि फिलिस्तीन के जिन क्षेत्रों पर कब्जा है, वहां पर इजरायली बस्तियों से आने वाले प्रोडक्ट पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। हालांकि, वे इसे प्रतीकात्मक ही मानते हैं, क्योंकि ये सब इजरायली अर्थव्यवस्था के समक्ष कुछ भी नहीं है।
- फिलिस्तीन का अपनी सीमाओं पर पूर्ण नियंत्रण और संयुक्त राष्ट्र में एक सीट के बिना उसकी क्षमता सीमित है
- फिलिस्तीनी क्षेत्र में दूतावासों के दर्जे का कोई मिशन नहीं है
- अस्थिर क्षेत्र में कोई भी देश अपना राजनयिक नहीं भेजना चाहेगा
- फिलिस्तीन के पास अपना खुद का हवाई अड्डा तक नहीं
- इजरायल या जॉर्डन के जरिए ही फिलिस्तीन तक स्थल के जरिए पहुंच संभव
- गाजा पट्टी तक सभी पहुंच को कंट्रोल करता है इजरायल
हमास की समाप्ति तक जारी रहेगा युद्ध
इस बीच संयुक्त राष्ट्र में इजरायली राजदूत डैनी डैनन ने सोमवार को दो-राष्ट्रों की बैठक से दो टूक कहा कि जब तक सभी बंधकों को छुड़ा नहीं लेते और हमास को खत्म नहीं कर देते हैं, ये युद्ध चलता रहेगा। वहीं मैक्रों की बैठक को उन्होंने नौटंकी करार देते हुए कहा कि ये वास्तविकता से कोसों दूर हैं।
















