दिल्ली-एनसीआर में पानी की किल्लत तो हम सब देख ही रहे हैं ना? गर्मियों में टैंकरों की लाइन लग जाती है, यमुना सूखी पड़ी रहती है, और लोग परेशान हो जाते हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक ऐसी बात कही है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जाने वाला सिंधु नदी का पानी अब दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को दिया जाएगा। ये सब सिंधु जल संधि को रोकने के बाद हो रहा है, जो अप्रैल में पहलगाम के आतंकी हमले के बाद लिया गया फैसला था। खट्टर ने इसे ‘आपदा में अवसर’ बताया, मतलब मुश्किल समय में भी कुछ अच्छा निकल आया। अगले एक से डेढ़ साल में ये पानी मिल सकता है। ये घोषणा राष्ट्रीय राजधानी के जल निकासी मास्टर प्लान की शुरुआत वाले कार्यक्रम में हुई।
सिंधु जल संधि: नया ट्विस्ट
1960 से चल रही सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी को बांटती आई है। भारत को पूर्वी नदियां मिलीं, पाकिस्तान को पश्चिमी। लेकिन, अप्रैल में पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ, उसमें 26 लोग मारे गए थे। उसके जवाब में भारत ने ये संधि निलंबित कर दी। अब जो पानी पाकिस्तान की तरफ बहता था, वो रुक गया। खट्टर ने साफ कहा, “पाकिस्तान की ओर बड़ी मात्रा में छोड़ा जाने वाला पानी अब दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा।” ऐसे में उम्मीद जगी है कि अब गर्मी के दौरान भी दिल्ली को पानी की किल्लत से मुक्ति मिलेगी।
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दिल्ली का जल संकट
दिल्ली तो हर साल गर्मियों में पानी के लिए तरसती है। यमुना का जलस्तर इतना गिर जाता है कि पेयजल की भारी कमी हो जाती है। लोग सुबह से शाम तक लाइन लगाए रहते हैं। अब अगर सिंधु का वो अतिरिक्त पानी आ गया, तो राहत मिलेगी। खट्टर के मुताबिक, ये पानी दिल्ली के लिए वरदान साबित होगा। लेकिन हकीकत ये है कि इसे स्टोर करने और पहुंचाने के लिए बड़े-बड़े बांध और नहरें बनानी पड़ेंगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे 30-40 अरब घन मीटर पानी मिल सकता है, जो लाखों लोगों की प्यास बुझा सकता है।
हरियाणा और राजस्थान: किसानों की उम्मीद
हरियाणा में तो खेतों की बात ही अलग है। सिंचाई के लिए पानी की इतनी किल्लत कि किसान परेशान रहते हैं। गर्मी में नहरें सूख जाती हैं, फसलें मुरझा जाती हैं। राजस्थान का हाल तो और बुरा – रेगिस्तान जैसी जमीन पर पानी ढूंढना मुश्किल। वहां पेयजल और खेती दोनों के लिए संघर्ष चलता रहता है। खट्टर का प्लान इन्हीं राज्यों को निशाना बना रहा है। सिंधु की पश्चिमी नदियों से बचे पानी को मोड़कर इन्हें भेजा जाएगा। इससे न सिर्फ शहरवासी सांस लेंगे, बल्कि गांवों में भी हलचल बढ़ेगी। लेकिन चुनौती ये है कि बुनियादी ढांचा तैयार करने में समय लगेगा।
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खट्टर की सीधी बात
खट्टर ने जो कहा, वो साफ और सीधा था – “आने वाले एक से डेढ़ साल में ये पानी पहुंच जाएगा।” ये बयान सुनकर लगता है जैसे सरकार ने सोचा-समझा प्लान बनाया हो। पहलगाम हमले की त्रासदी से निकलकर ये कदम भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उत्तर भारत के इन तीनों राज्यों में जहां पानी की मार सबसे ज्यादा पड़ती है, वहां ये बदलाव जिंदगी आसान कर देगा।

















