पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो पाकिस्तान अपनी न्यूक्लियर पावर सऊदी अरब को सौंप सकता है। ये बातें सुनकर दुनिया भर में हलचल मच गई है। बीते बुधवार को ही सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने एक नई रक्षा डील पर साइन किए। इसमें पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर भी थे। ऐसे में बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब को परमाणु तकनीक देने जा रहा है?
ख्वाजा आसिफ का धमाकेदार बयान
ख्वाजा आसिफ ने बिल्कुल साफ-साफ कहा, “हमने अपनी न्यूक्लियर कैपेबिलिटी बहुत पहले बना ली है। हमारे पास ट्रेंड फोर्सेस हैं। जो भी हमारी स्ट्रेंथ है, वो इस डील के तहत सऊदी को मिल जाएगी।” वो ये भी बोले, “अगर पाकिस्तान या सऊदी पर कहीं से अटैक होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। हम साथ मिलकर जवाब देंगे। ये एक छतरी जैसी अरेंजमेंट है, जहां दोनों एक-दूसरे को प्रोटेक्ट करेंगे।” आसिफ का ये बयान पहली बार इतना ओपन है। पहले भी अफवाहें थीं, लेकिन अब ये ऑफिशियल लग रहा है। सऊदी के लिए ये बड़ी बात है, क्योंकि वो ईरान और इजरायल जैसे पड़ोसियों से हमेशा सतर्क रहते हैं।
पुरानी दोस्ती का नया अध्याय
पाकिस्तान और सऊदी की यारी तो दशकों पुरानी है, भाई। 1967 में दोनों ने पहली डिफेंस डील साइन की थी। फिर 1982 में इसे सिक्योरिटी कोऑपरेशन एग्रीमेंट से और मजबूत किया। एक जमाने में 15-20 हजार पाकिस्तानी सिपाही सऊदी की जमीन पर तैनात थे। 2017 में तो पाकिस्तान के पूर्व आर्मी चीफ जनरल राहील शरीफ को सऊदी लीडरशिप वाले एंटी-टेरर फोर्स का कमांडर बना दिया गया। ये सब देखकर लगता है कि दोनों देशों का बॉन्ड रक्षा से कहीं आगे है। सऊदी पाकिस्तान को पैसों से मदद करता रहा है, और अब बदले में न्यूक्लियर शील्ड मिल सकती है।
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दुनिया की नजरें क्यों टिकीं?
ये डील अमेरिका के रीजनल सिक्योरिटी रोल से पीछे हटने के बीच आई है। अमेरिका अब मिडिल ईस्ट में कम एक्टिव है, तो सऊदी को अपनी सेफ्टी खुद संभालनी पड़ रही। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये इजरायल की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ एक कलेक्टिव सिक्योरिटी सिस्टम है। इजरायल के हमलों से सऊदी डर रहा है, और पाकिस्तान का न्यूक्लियर अर्सेनल (जो दुनिया के टॉप-6 में है) उसके लिए बड़ा सहारा बन सकता है। लेकिन ये न्यूक्लियर ट्रांसफर NPT (नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी) के खिलाफ हो सकता है, जो पाकिस्तान ने साइन नहीं किया। IAEA जैसी बॉडीज सतर्क हो गई हैं।
भारत की क्या प्रतिक्रिया?
भारत ने इस पर चुप्पी नहीं साधी। विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन रंधीर जायसवाल ने कहा, “भारत-सऊदी के बीच स्ट्रॉन्ग स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप है, जो सालों में और गहरी हुई। हम उम्मीद करते हैं कि ये पार्टनरशिप म्यूचुअल इंटरेस्ट्स और सेंसिटिविटीज को ध्यान में रखेगी।” गुरुवार को भारत सरकार ने कहा कि वो इस डील के इंपैक्ट्स का स्टडी कर रही। सऊदी भारत का बड़ा ट्रेड पार्टनर है – ऑयल, इनवेस्टमेंट्स सब। तो भारत सतर्क है, लेकिन रिश्ते खराब नहीं करना चाहता।

















