ट्रंप फिर से सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार कोर्ट कचहरी के मैदान में। कल, 19 सितंबर 2025 को, एक अमेरिकी जज ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के न्यूयॉर्क टाइम्स के खिलाफ दायर 15 अरब डॉलर के मुकदमे को सिरे से खारिज कर दिया। ये मुकदमा ट्रंप ने सोमवार रात को फ्लोरिडा की एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने अखबार को डेमोक्रेटिक पार्टी का ‘मुंह’ और झूठ फैलाने वाला बताया था। जज ने कहा कि ये शिकायत फेडरल नियम तोड़ती है, जो साफ-सुथरी और संक्षिप्त दावा मांगता है। लेकिन ट्रंप को मौका दिया गया है कि वो इसे दोबारा ठीक करके पेश करे। न्यूयॉर्क टाइम्स की बिल्डिंग की तस्वीर देखकर लगता है, ये लड़ाई अभी लंबी चलेगी।
मुकदमे की शुरुआत
ट्रंप ने ये केस 16 सितंबर 2025 को ही दायर कर दिया था। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2024 के चुनाव से ठीक पहले कई आर्टिकल्स और एक किताब के जरिए उनके खिलाफ झूठा और बदनाम करने वाला कंटेंट फैलाया। ट्रंप के वकीलों ने शिकायत में लिखा, “टाइम्स ने ईमानदारी, निष्पक्षता और सटीकता जैसे पत्रकारिता के आदर्शों को धोखा दिया है। ये अब ट्रंप के खिलाफ झूठ फैलाने का अग्रणी और बेशर्म माध्यम बन गया है।” उन्होंने अखबार को डेमोक्रेट्स का ‘माउथपीस’ कहा, जो लगातार उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है। ये सब 2024 चुनाव की गर्मी में हुआ, जब मीडिया और पॉलिटिक्स की जंग चरम पर थी। ट्रंप ने पहले ही हफ्ते भर पहले ऐलान कर दिया था कि वो टाइम्स पर मुकदमा ठोंकेंगे।
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जज का फैसला
जज ने 19 सितंबर को कोर्ट फाइलिंग में साफ कहा कि ट्रंप की शिकायत एक ‘सार्वजनिक मंच’ नहीं है, जहां ‘गुस्से और बुरे शब्दों’ की बौछार की जा सके। ये ‘विरोधी के खिलाफ चिल्लाने’ की जगह नहीं। फेडरल नियम कहता है कि शिकायत में साफ-सुथरा बयान होना चाहिए, जो बताए कि प्लेंटिफ (ट्रंप) को राहत क्यों मिलनी चाहिए। लेकिन यहां तो पूरा दस्तावेज ट्रंप के गुस्से से भरा था, बिना ठोस सबूतों के। जज ने इसे खारिज तो किया, लेकिन ट्रंप को अमैंडमेंट का मौका दिया, यानी वो इसे सुधारकर दोबारा ला सकते हैं। ये फैसला ट्रंप की कानूनी जंगों की पुरानी कहानी को याद दिलाता है, जहां वो मीडिया पर हमेशा निशाना साधते रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
ये मुकदमा 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की यादें ताजा करता है। न्यूयॉर्क टाइम्स के दो पत्रकारों ने चुनाव से पहले आर्टिकल्स और एक किताब लिखी, जिनमें ट्रंप पर कई आरोप लगाए गए। ट्रंप का कहना है कि ये सब झूठ थे, जो उनकी इमेज को नुकसान पहुंचाने के लिए फैलाए गए। अखबार पर व्यक्तिगत तौर पर भी मुकदमा है, और कुछ रिपोर्टर्स को नाम लेकर घसीटा गया। ट्रंप के समर्थक इसे प्रेस फ्रीडम पर हमला मानते हैं, जबकि क्रिटिक्स कहते हैं कि ये ट्रंप का पुराना हथकंडा है – जो पसंद न आए, उसे मानहानि का केस कर दो। रॉयटर्स ने भी इस रिपोर्टिंग में हाथ बंटाया है, और अभी और डिटेल्स आने की उम्मीद है।
















