संयुक्त राष्ट्र में बलूच लिबरेशन आर्मी पर बैन लगवाने की चीन-पाक की साजिश फेल, अमेरिका ने लगा दिया वीटो
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संयुक्त राष्ट्र में बलूच लिबरेशन आर्मी पर बैन लगवाने की चीन-पाक की साजिश फेल, अमेरिका ने लगा दिया वीटो

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन का बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) को आतंकी सूची में शामिल करने का प्रयास नाकाम। अमेरिका ने वीटो लगाकर प्रस्ताव खारिज किया, ब्रिटेन-फ्रांस ने भी दिया साथ।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Sep 19, 2025, 12:30 pm IST
in विश्व
China-pak consiracy to ban BLA in UN failed

प्रतीकात्मक तस्वीर

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन ने मिलकर एक ऐसा प्रस्ताव ला दिया, जिसमें बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और उसके खतरनाक दस्ते मजीद ब्रिगेड को आतंकी लिस्ट में डालने की बात थी। लेकिन ये कोशिश धरी रह गई, क्योंकि अमेरिका ने साफ मना कर दिया। ब्रिटेन और फ्रांस ने भी उनका साथ नहीं दिया। ये घटना 19 सितंबर 2025 को सामने आई, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 कमिटी में ये बहस छिड़ी। असल में, ये कमिटी अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे ग्लोबल आतंकी संगठनों पर नजर रखती है। इनके खिलाफ दुनिया भर में संपत्ति जब्त करने, यात्रा पर रोक लगाने जैसे सख्त कदम उठाए जाते हैं। पाकिस्तान और चीन का मकसद था बीएलए को इसी लिस्ट में घुसेड़ना, ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुचल सकें। लेकिन पश्चिमी देशों ने इसे ठुकरा दिया। ये सिर्फ एक प्रस्ताव की हार नहीं, बल्कि बलूचिस्तान के लंबे संघर्ष की एक झलक है।

क्या है पूरा मामला

पाकिस्तान और चीन ने मिलकर ये प्रस्ताव बुधवार को पेश किया। पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि असिम इफ्तिखार अहमद ने दावा किया कि अफगानिस्तान में अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट, तहरीक-ए-तालिबान, ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट के साथ-साथ बलूच लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड के कम से कम 60 ठिकाने हैं। उनका कहना था कि ये संगठन अफगान मिट्टी से पाकिस्तान के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। चीन ने इस प्रस्ताव का पूरा समर्थन किया, शायद इसलिए क्योंकि वो पाकिस्तान का पुराना दोस्त है और सीपीईसी प्रोजेक्ट्स को खतरा महसूस करता है। बीएलए को 1267 लिस्ट में डालने से न सिर्फ उसके फंडिंग पर चोट लगती, बल्कि वैश्विक दबाव से पाकिस्तान को बलूच विद्रोह दबाने में आसानी मिलती। लेकिन, ये प्लान उसी वक्त लड़खड़ा गया, जब अमेरिका ने वीटो का इस्तेमाल किया। ब्रिटेन और फ्रांस ने भी साफ कहा कि ये प्रस्ताव नामंजूर है।

इसे भी पढ़ें: इजरायल-हमास युद्ध: गाजा में तबाही, एक माह में 2,50,000 लोगों का पलायन, UN का दावा

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का रुख

अब सबसे बड़ा सवाल ये कि इन देशों ने क्यों ना कहा? अमेरिका ने साफ लफ्जों में कहा कि बीएलए और मजीद ब्रिगेड का अल-कायदा या इस्लामिक स्टेट से कोई लेना-देना नहीं है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बयान दिया, “जिस बलूच लिबरेशन आर्मी और उसके आत्मघाती दस्ते मजीद ब्रिगेड पर पाबंदी का प्रस्ताव है, उसका अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से तो कोई संबंध ही नहीं है।” खास बात ये है कि पाकिस्तान की गुजारिश पर ट्रंप ने खुद बीएलए को आतंकी संगठन घोषित किया था, लेकिन 1267 लिस्ट के लिए सबूत मांगे, जो पाकिस्तान नहीं दे पाया। ब्रिटेन ने भी यही राय जाहिर की। फ्रांस ने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के ऐसी लिस्ट में शामिल करना अनुचित होगा।

ये तीनों देशों का स्टैंड बलूचिस्तान के स्वायत्तता आंदोलन को अप्रत्यक्ष सपोर्ट जैसा लगता है। बलूच लोग दशकों से पाकिस्तान की केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनके संसाधनों का फायदा सिर्फ इस्लामाबाद को मिल रहा है। मजीद ब्रिगेड तो बीएलए का स्पेशल यूनिट है, जो सुसाइड अटैक्स के लिए कुख्यात है। लेकिन ये संगठन खुद को आजादी की लड़ाई लड़ने वाला बताते हैं, न कि ग्लोबल जिहाद का हिस्सा।

बलूचिस्तान का लंबा संघर्ष

बलूचिस्तान की ये जंग नई नहीं है। 1948 से ही बलूच लोग अपनी आजादी या ज्यादा अधिकारों की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स से उन्हें डर है कि उनका इलाका चीनी कर्ज के जाल में फंस जाएगा। चीन के मंसूबों का बलूच लोग विरोध कर रहे हैं। इसीलिए पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन बीएलए को बैन करवाना चाहता था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे अल-कायदा से जोड़ना मुश्किल साबित हुआ। भारत ने कई बार पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी गुटों पर बैन की मांग की है, लेकिन चीन ने हमेशा वीटो से रोक लिया। इस बार रोल रिवर्सल हो गया – अमेरिका ने पाक-चीन की जोड़ी को झटका दिया। न्यूयॉर्क से रिपोर्ट करते हुए सूर्य प्रकाश ने इसे एक बड़ा डिप्लोमैटिक टर्निंग पॉइंट बताया।

Topics: संयुक्त राष्ट्रBalochistan movementUnited Nationsबलूच लिबरेशन आर्मीBaloch Liberation Armyvetoवीटोपाकिस्तान-चीन प्रस्तावमजीद ब्रिगेडबलूचिस्तान आंदोलनPakistan-China proposalMajeed Brigade
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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