टेरर फंडिंग के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के संस्थापक आतंकी यासीन मलिक ने बड़ा खुलासा किया है। तिहाड़ जेल में बंद मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में दावा किया है कि उसने मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कई बार मुलाकात करवाई थी। यासीन मलिक ने ये भी दावा किया है कि इसके लिए मनमोहन सिंह ने उसे धन्यवाद दिया था।
यासीन मलिक का कहना है कि ये बात 2006 की है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच बैकचैनल डिप्लोमेसी चल रही थी। 85 पन्ने के अपने हलफनामे में मलिक ने ये दावे किए हैं। वो कहता है कि हाफिज सईद से मुलाकात को लेकर मनमोहन सिंह ने उससे व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात कर धन्यवाद दिया था। इन सब के पीछे की वजह वो बता रहा है कि 2005 में कश्मीर में आए भूकंप के बाद वो पाकिस्तान के दौरे पर जा रहा था, उससे ठीक पहले दिल्ली में आईबी के तत्कालीन विशेष निदेशक वीके जोशी ने भी उससे मुलाकात की थी और मनमोहन सिंह के शांति के प्रयासों को आतंकी हाफिज सईद समेत कई अन्य आतंकियों के सामने रखने का अनुरोध किया था।
2006 भूकंप और मलिक का पाकिस्तान दौरा
2005 के भूकंप के बाद पाकिस्तान पहुंचा मलिक और वहां उसने हाफिज सईद – लश्कर-ए-तैयबा का फाउंडर, जो 26/11 के मास्टरमाइंड के तौर पर जाना जाता है, ने जिहादी ग्रुप्स का एक बड़ा जमावड़ा बुलाया। मलिक ने स्पीच दी और कहा कि अगर कोई शांति ऑफर करे, तो उसे खरीद लो। उसने इस्लामिक टीचिंग्स का हवाला देकर आतंकियों से शांति अपनाने को कहा।
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मनमोहन सिंह से डिब्रीफिंग
पाकिस्तान से लौटते ही मलिक ने दावा किया कि वीके जोशी ने डिब्रीफिंग के लिए कहा। उसी शाम वो मनमोहन सिंह से मिला, जहां NSA एमके नारायणन भी मौजूद थे। हलफनामे में मलिक ने लिखा, “मैंने अपनी मीटिंग्स के बारे में ब्रिफ किया, पॉसिबिलिटीज बताईं। मनमोहन सिंह ने मेरे एफर्ट्स, टाइम, पेशेंस और डेडिकेशन के लिए ग्रेटिट्यूड जताई।” रिपोर्ट्स के अनुसार, मनमोहन सिंह ने बिना हिचक कहा, “मैं आपको कश्मीर के नॉन-वायलेंट मूवमेंट का फादर मानता हूं।”
पुराना पापी है यासीन मलिक
गौरतलब है कि यासीन मलिक कश्मीर की राजनीति नया नाम नहीं है। 1980 के दशक में वो आतंकी संगठन JKLF के जरिए हथियार उठाने वालों में शुमार था। 1990 में चार भारतीय वायुसेना के अफसरों की हत्या की। रुबिया सईद (तत्कालीन होम मिनिस्टर मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी) का अपहरण भी उसके नाम से जुड़ा। लेकिन 1994 में जेल से रिहा होने के बाद मलिक ने हथियार त्याग दिए और कथित नॉन-वायलेंट मूवमेंट की बात करने लगा। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक का दावा है कि 1990 से लेकर मनमोहन सिंह के दौर तक छह लगी-हुई सरकारों ने उसे इस्तेमाल किया। वीपी सिंह से लेकर मनमोहन सिंह तक, हर सरकार ने उसे कश्मीर के मसले पर प्लेटफॉर्म दिया।
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मलिक ने हलफनामे में लिखा है कि उसे घरेलू और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर बोलने दिया गया। वो सोनिया गांधी, पी चिदंबरम, आईके गुजराल और राजेश पायलट जैसे बड़े नेताओं से मिला। ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, मलिक का दावा है कि वाजपेयी के करीबी आरके मिश्रा ने उसे धीरूभाई अंबानी से मिलवाया था। ये सब कश्मीर में शांति के लिए बैकचैनल टॉक्स का हिस्सा था। लेकिन 2019 में मोदी सरकार ने JKLF को बैन कर दिया और 2022 में NIA कोर्ट ने उसे टेरर फंडिंग केस में उम्रकैद सुना दी। अब NIA उसकी सजा को फांसी में बदलने की कोशिश कर रही है।

















