गत 16 सितंबर को नई दिल्ली में ‘हिंदी विवेक’ के विशेषांक ‘दीपस्तंभ’ का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नीतिन गडकरी ने इस अवसर पर कहा कि ‘हिंदी विवेक’ अपनी स्थापना से ही समाज एवं राष्ट्र को वैचारिक दिशा देने का कार्य कर रहा है।
सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, आर्थिक आदि क्षेत्रों में स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं और अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इनके प्रेरणादायी कार्यों को समाज तक पहुंचाने हेतु ‘हिंदी विवेक’ द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘दीपस्तंभ’ ग्रंथ प्रकाशित किया गया है। यह ग्रंथ आने वाली पीढ़ियों का भी मार्गदर्शन करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि इतिहास किसी के लिए नहीं रुकता, इसलिए अपने अतीत से प्रेरणा और सीख लेनी चाहिए। हमारा राष्ट्र शाश्वत है। इसलिए हमारा देश पुनः विश्वगुरु बने, इसकी प्रेरणा हमें अपनी संस्कृति-सभ्यता और धरोहर से मिलती है। हिंदू और हिंदुत्व शब्द को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता रहा था। ऐसे समय में संघ ने मजबूती से हिंदू धर्म और हिंदुत्व के संवाहक की भूमिका निभाई।
‘हिंदी विवेक’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमोल पेडणेकर ने राष्ट्रीय पत्रकारिता में इस पत्रिका की 17 वर्ष की यशस्वी यात्रा का वर्णन किया और इसकी उपलब्धियों से परिचित कराया। पद्मश्री रमेश पतंगे ने कहा कि धर्म भारत की आत्मा है। सनातन और राष्ट्रवाद एक सिक्के के दो पहलू हैं। इसलिए इसका जागरण आवश्यक है।
इसके लिए धर्म-रक्षण और धर्म-पालन करना होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य श्री मुकुल कानिटकर ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने संघ स्थापना के समय ही भारत की दिशा, दशा, वैश्विक भूमिका व नीति के संबंध में अपने स्पष्ट विचार रखे थे, जो 100 वर्ष बाद भी प्रासंगिक हैं।
राष्ट्रीय चरित्र के अभाव में ही हमारे राष्ट्र की दुर्गति हुई। इसलिए उन्होंने व्यक्ति के ‘चरित्र निर्माण’ से राष्ट्र निर्माण का मंत्र दिया और संघ शाखा शुरू की। कार्यक्रम का संचालन ‘हिंदी विवेक’ की कार्यकारी सम्पादक पल्लवी अनवेकर ने किया।

















