बांग्लादेश में हाल के दिनों में एक नई चिंता की लहर दौड़ गई है। वहां सूफी इस्लाम से जुड़े पवित्र स्थलों पर कट्टरपंथी ताकतों ने हमले बोल दिए हैं। ये हमले इतने हिंसक हैं कि 100 से ज्यादा मजारें और दरगाहें निशाना बनी हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ये घटनाएं तेज हो गई हैं, और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने अब तक इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ये हमले न सिर्फ धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत को भी झकझोर रहे हैं। सूफी परंपरा, जो सदियों से बांग्ला संस्कृति का हिस्सा रही है, आज खतरे में पड़ गई है।
कट्टरपंथियों का बढ़ता उभार
शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें सिर उठा रही हैं। ये लोग वहाबी इस्लाम के सख्त नियमों का पालन करते हैं, जो सूफी परंपराओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते। सूफी संतों की मजारें और दरगाहें, जहां लोग प्रेम और भक्ति से मत्था टेकते हैं, इन्हें मूर्तिपूजा जैसी लगती हैं। कट्टरपंथियों का मानना है कि इस्लाम में किसी ढांचे या कब्र को पूजना सख्ती से मना है। इसलिए, वे इन स्थलों को तोड़ने और लूटने में जुट गए हैं। ये हमले देश भर में फैले हुए हैं, खासकर उन इलाकों में जहां सूफी मजारें ज्यादा हैं। इससे पहले भी हिंदू मंदिरों, ईसाई चर्चों और अहमदिया समुदाय की मस्जिदों पर हमले हो चुके थे, लेकिन अब सूफी स्थल भी सुरक्षित नहीं।
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हमलों का तरीका
ये हमले बेहद क्रूर हैं। कट्टरपंथी भीड़ मजारों पर टूट पड़ती है, उन्हें तोड़-फोड़ कर देती है, सामान लूट लेती है और वहां मौजूद लोगों को पीटती है। 100 से ज्यादा ऐसी घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। सूफी मजारें तो बस बहाना हैं; असल में ये हमले बांग्ला समाज के सेकुलर मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश है। हिंदू समुदाय के साथ सद्भाव भी खत्म करने की साजिश नजर आती है। सूफी परंपरा भारतीय उपमहाद्वीप में सदियों पुरानी है। अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान और बांग्लादेश तक, ये मजारें हिंदू मान्यताओं से काफी मिलती-जुलती हैं – जैसे भक्ति और प्रेम का भाव। लेकिन कट्टरपंथी इन्हें इस्लाम का ‘उदार स्वरूप’ मानकर निशाना बना रहे हैं।
मौन साधे हुए है यूनुस सरकार
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इन हमलों पर खामोशी ओढ़ रखी है। न कोई जांच, न कोई कार्रवाई। इससे लगता है कि कट्टर ताकतें और मजबूत हो रही हैं। बांग्ला संस्कृति में सूफी संतों की दरगाहें हमेशा से शांति और एकता का प्रतीक रहीं। लेकिन अब ये हमले न सिर्फ भवनों को बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि लोगों के दिलों में डर भी पैदा कर रहे हैं। सूफी इस्लाम का उदार चेहरा, जो हिंदू-मुस्लिम सद्भाव को जोड़ता था, आज सबसे ज्यादा खतरे में है। देश भर के सूफी अनुयायी दहशत में जी रहे हैं।













