इस्लामिक मुल्क बांग्लादेश में ही खतरे में 'सूफी इस्लाम', कट्टरपंथियों ने 100 से अधिक मजारों-दरगाहों पर किया हमला
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इस्लामिक मुल्क बांग्लादेश में ही खतरे में ‘सूफी इस्लाम’, कट्टरपंथियों ने 100 से अधिक मजारों-दरगाहों पर किया हमला

शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में सूफी मजारों पर 100 से अधिक हमले हुए हैं। कट्टरपंथी ताकतें सांस्कृतिक विरासत को नष्ट कर रही हैं, जबकि यूनुस सरकार चुप्पी साधे हुए है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Sep 18, 2025, 10:52 am IST
inविश्व
Bangladesh Muhammad Yunus economic crisis

मोहम्मद यूनुस

बांग्लादेश में हाल के दिनों में एक नई चिंता की लहर दौड़ गई है। वहां सूफी इस्लाम से जुड़े पवित्र स्थलों पर कट्टरपंथी ताकतों ने हमले बोल दिए हैं। ये हमले इतने हिंसक हैं कि 100 से ज्यादा मजारें और दरगाहें निशाना बनी हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ये घटनाएं तेज हो गई हैं, और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने अब तक इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ये हमले न सिर्फ धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत को भी झकझोर रहे हैं। सूफी परंपरा, जो सदियों से बांग्ला संस्कृति का हिस्सा रही है, आज खतरे में पड़ गई है।

कट्टरपंथियों का बढ़ता उभार

शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें सिर उठा रही हैं। ये लोग वहाबी इस्लाम के सख्त नियमों का पालन करते हैं, जो सूफी परंपराओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते। सूफी संतों की मजारें और दरगाहें, जहां लोग प्रेम और भक्ति से मत्था टेकते हैं, इन्हें मूर्तिपूजा जैसी लगती हैं। कट्टरपंथियों का मानना है कि इस्लाम में किसी ढांचे या कब्र को पूजना सख्ती से मना है। इसलिए, वे इन स्थलों को तोड़ने और लूटने में जुट गए हैं। ये हमले देश भर में फैले हुए हैं, खासकर उन इलाकों में जहां सूफी मजारें ज्यादा हैं। इससे पहले भी हिंदू मंदिरों, ईसाई चर्चों और अहमदिया समुदाय की मस्जिदों पर हमले हो चुके थे, लेकिन अब सूफी स्थल भी सुरक्षित नहीं।

इसे भी पढ़ें: पाक-सऊदी रक्षा समझौते पर बोली भारत सरकार-अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए तैयार

हमलों का तरीका

ये हमले बेहद क्रूर हैं। कट्टरपंथी भीड़ मजारों पर टूट पड़ती है, उन्हें तोड़-फोड़ कर देती है, सामान लूट लेती है और वहां मौजूद लोगों को पीटती है। 100 से ज्यादा ऐसी घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। सूफी मजारें तो बस बहाना हैं; असल में ये हमले बांग्ला समाज के सेकुलर मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश है। हिंदू समुदाय के साथ सद्भाव भी खत्म करने की साजिश नजर आती है। सूफी परंपरा भारतीय उपमहाद्वीप में सदियों पुरानी है। अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान और बांग्लादेश तक, ये मजारें हिंदू मान्यताओं से काफी मिलती-जुलती हैं – जैसे भक्ति और प्रेम का भाव। लेकिन कट्टरपंथी इन्हें इस्लाम का ‘उदार स्वरूप’ मानकर निशाना बना रहे हैं।

मौन साधे हुए है यूनुस सरकार

मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इन हमलों पर खामोशी ओढ़ रखी है। न कोई जांच, न कोई कार्रवाई। इससे लगता है कि कट्टर ताकतें और मजबूत हो रही हैं। बांग्ला संस्कृति में सूफी संतों की दरगाहें हमेशा से शांति और एकता का प्रतीक रहीं। लेकिन अब ये हमले न सिर्फ भवनों को बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि लोगों के दिलों में डर भी पैदा कर रहे हैं। सूफी इस्लाम का उदार चेहरा, जो हिंदू-मुस्लिम सद्भाव को जोड़ता था, आज सबसे ज्यादा खतरे में है। देश भर के सूफी अनुयायी दहशत में जी रहे हैं।

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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