सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की सात फुट ऊंची खंडित प्रतिमा के पुनर्निर्माण की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मंगलवार (16 सितंबर) को इस मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिका में दावा किया गया था कि यह मूर्ति मुगलों के आक्रमण के दौरान खंडित हो गई थी और तब से इसी हालत में है। अदालत ने याचिका को ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन’ करार दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “यह प्रचार हित याचिका है। आप खुद को भगवान विष्णु का सच्चा भक्त कहते हैं, तो जाओ भगवान से ही कुछ करने को कहो।” न्यायालय ने स्पष्ट किया कि खजुराहो एक पुरातात्विक स्थल है, इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से अनुमति लेना जरूरी है। याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।
मुगलों के आक्रमण के दौरान खंडित हुई थी मूर्ति
बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ता ने श्रद्धालुओं के पूजा करने के अधिकार की रक्षा करने और मंदिर की पवित्रता को पुनर्जीवित करने के लिए सर्वोच्च अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी। राकेश के मुताबिक कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिमा जिस स्थिति में है, उसी में रहेगी। भक्तों को पूजा करनी है तो वे दूसरे मंदिर जा सकते हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 13 जून को यह जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें मुगलों के आक्रमण के दौरान खंडित हुई इस मूर्ति को बदलकर नई मूर्ति स्थापित करने की मांग की गई थी। राकेश दलाल ने अपनी याचिका में कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और एएसआई को कई बार इस मामले में सूचित किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि मूर्ति का सिर काफी टूट चुका है। इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए।
सामाजिक संगठनों ने भी जीर्णोद्धार की मांग उठाई
जवारी मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची मूर्ति का सिर नहीं है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने इसके जीर्णोद्धार की मांग उठाई है। राकेश दलाल ने इस मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपा था।
मंदिर की खासियत
जवारी (वामन) मंदिर का निर्माण कई साल पहले चंदेल राजाओं ने कराया था। यह मंदिर अपनी अनोखी बनावट के लिए जाना जाता है। दुनिया भर में कहीं भी वामन मंदिर जैसा कोई दूसरा मंदिर नहीं है। यहां भगवान विष्णु के सभी अवतारों को दिखाया गया है।















