Hindi Diwas 2025: हिन्दी: सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की आत्मा है, जानिए क्यों हर भारतीय को इसे अपनाना चाहिए
June 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

Hindi Diwas 2025: हिन्दी: सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की आत्मा है, जानिए क्यों हर भारतीय को इसे अपनाना चाहिए

भारत विविधताओं वाला देश है, भाषाओं, परंपराओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं का संगम है। ऐसी स्थिति में एक ऐसी भाषा की आवश्यकता महसूस की गई जो राष्ट्र की पहचान बन सके और विभिन्न प्रांतों को एक सूत्र में बांध सके।

Written byश्वेता गोयलश्वेता गोयल — edited by Mahak Singh
Sep 14, 2025, 10:51 am IST
in भारत
Hindi Diwas 2025

Hindi Diwas 2025

भारत विविधताओं वाला देश है, भाषाओं, परंपराओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं का संगम है। ऐसी स्थिति में एक ऐसी भाषा की आवश्यकता महसूस की गई जो राष्ट्र की पहचान बन सके और विभिन्न प्रांतों को एक सूत्र में बांध सके। हिन्दी भाषा ने यह भूमिका बहुत अच्छी तरह से निभाई है। आधुनिकता, वैश्वीकरण और तकनीकी विकास के इस युग में अंग्रेजी बोलना भले ही प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता हो, लेकिन यह सच है कि हिंदी आज भी भारत की आत्मा, संस्कृति और जनमानस की पहचान है। यही कारण है कि हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि लोगों को इसके महत्व, इसके योगदान और इसके संरक्षण के बारे में प्रेरित किया जा सके।

हिन्दी: भारत की आत्मा से लेकर विश्व तक

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और सामाजिक संवेदना की वाहक है। यह भाषा भारतीय समाज की विविधता को जोड़ती है। आज हिन्दी न केवल भारत के विभिन्न राज्यों में बोली जाती है बल्कि फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, नेपाल, त्रिनिदाद, गुयाना, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में भारतीय प्रवासी समुदाय द्वारा इसका सम्मान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र में भी हिन्दी को लेकर चर्चा होती रही है और इसे वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने का प्रयास जारी है। हिन्दी की यह वैश्विक पहचान उसकी सरलता, वैज्ञानिक व्याकरण, समृद्ध साहित्य और व्यापक उपयोगिता के कारण संभव हुई है। भारतीय प्रशासन, न्यायपालिका, शिक्षा, मीडिया, सिनेमा और डिजिटल प्लेटफार्म पर हिन्दी का योगदान असाधारण है। यही कारण है कि हिंदी दिवस महज एक औपचारिक आयोजन न होकर भाषा के माध्यम से स्वाभिमान और राष्ट्र निर्माण का उत्सव है।

हिन्दी दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हिन्दी दिवस मनाने की परंपरा स्वतंत्र भारत के गठन से जुड़ी है। लंबे समय तक भारत अंग्रेजों का उपनिवेश रहा। अंग्रेजी भाषा प्रशासन, शिक्षा और व्यापार की भाषा बनी जबकि भारतीय भाषाएं हाशिए पर चली गई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिन्दी को जनमानस की भाषा मानते हुए 1918 में आयोजित हिन्दी साहित्य सम्मेलन में इसे भारत की राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन किया। उनका विचार था कि जब तक जनता अपनी भाषा में संवाद नहीं करेगी, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं बन सकता। देश की आजादी के बाद संविधान सभा में 12 सितम्बर 1947 को गोपालस्वामी आयंगर ने हिन्दी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव रखा। आयंगर स्वयं दक्षिण भारत से थे और अहिन्दी भाषी होते हुए भी राष्ट्रहित में हिन्दी को प्रशासन की भाषा बनाने के पक्षधर थे। 12 से 14 सितम्बर 1949 तक चली बहस में कुल 71 सदस्य शामिल हुए। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से हिन्दी को भारत की राजभाषा घोषित कर दिया। इसके बाद संविधान के भाग 17 की धारा 343 में लिखा गया, ‘संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।’ इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर 14 सितम्बर 1953 से हिन्दी दिवस मनाने की शुरुआत हुई। यह दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन संविधान सभा ने हिन्दी को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया था। 14 सितम्बर 1953 को हिन्दी को राजभाषा के रूप में लागू किया गया लेकिन अंग्रेजी की लोकप्रियता और प्रशासन में उसकी भूमिका के चलते गैर-हिन्दी भाषी राज्यों में विरोध हुआ। परिणामस्वरूप अंग्रेजी को भी सह-राजभाषा का दर्जा दिया गया।

महात्मा गांधी और हिन्दी का संघर्ष

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी ने हिन्दी को जनसम्पर्क की भाषा बनाने पर जोर दिया। 1917 में कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजी में भाषण दिया था। गांधी जी ने इसका विरोध नहीं किया लेकिन बाद में तिलक से कहा कि अपने ही देशवासियों के साथ अपनी भाषा में संवाद करना आवश्यक है। गांधी जी का मानना था कि हिन्दी के माध्यम से ही जनता से आत्मीय संवाद संभव है। उनका कहना था कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि आत्मा से जुड़ने का पुल है। हिन्दी को लेकर गांधी जी के प्रयासों ने राष्ट्र में भाषा के प्रति जागरूकता पैदा की और इसके संरक्षण व विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

हिन्दी की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

आज हिन्दी विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा के रूप में जानी जाती है। इसके शब्दकोश में लगभग 1.2 लाख शब्द हैं। इसके बावजूद हिन्दी को लेकर समाज में कई चुनौतियां सामने हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युवाओं में अंग्रेजी का आकर्षण बढ़ता जा रहा है। रोजगार, शिक्षा और वैश्विक संपर्क के लिए अंग्रेजी को आवश्यक माना जाता है। ऐसे में हिन्दी का उपयोग घटता जा रहा है। कुछ वरिष्ठ साहित्यकारों का कहना है कि हिन्दी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि युवाओं को लगता है कि अंग्रेजी में ही अधिक अवसर हैं। वे हिन्दी बोलने में संकोच करते हैं और अंग्रेजी को आधुनिकता का प्रतीक मानते हैं। यही मानसिकता हिन्दी के विकास में बाधा बन रही है। संख्या बल के आधार पर हिन्दी विश्वभाषा बन सकती है लेकिन इसके लिए साहित्य, विचार, अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास में भी निवेश आवश्यक है। केवल बोलने वालों की संख्या बढ़ा देने से हिन्दी का वैश्विक दर्जा नहीं मिलेगा। हिन्दी में अब अंग्रेजी शब्दों का मिश्रण भी बहुत बढ़ रहा है। आधुनिक जीवनशैली, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म पर हिन्दी वाक्यों में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग सामान्य हो गया है। कई लोग हिन्दी बोलते समय स्वयं को पिछड़ा मानते हैं जबकि अंग्रेजी बोलना आधुनिकता का प्रतीक समझते हैं। यह प्रवृत्ति भाषा के लिए गंभीर चुनौती है।

हिन्दी दिवस का उद्देश्य

हिन्दी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार, उसके उपयोग को प्रोत्साहित करना और लोगों में भाषा के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। इस दिवस पर विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सरकारी दफ्तरों, मीडिया संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें हिन्दी भाषा पर व्याख्यान, कविता पाठ, निबंध प्रतियोगिता, नाटक, वाद-विवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि शामिल होते हैं। हिन्दी दिवस के आयोजन का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं बल्कि राष्ट्र की आत्मा है। हिन्दी का उपयोग बढ़ाने से न केवल भाषा का संरक्षण होगा बल्कि यह सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगा। साथ ही यह दिवस युवाओं को प्रेरित करता है कि वे हिन्दी के विकास में योगदान दें और अपने संवाद की भाषा के रूप में इसे अपनाएं।

वैश्विक मंच पर हिन्दी

भारत की सांस्कृतिक पहचान के रूप में हिन्दी का प्रभाव दुनियाभर में देखा जा रहा है। भारतीय फिल्म, संगीत, साहित्य, योग, आयुर्वेद और भारतीय त्योहारों के माध्यम से हिन्दी का प्रचार विदेशों में भी हो रहा है। प्रवासी भारतीय समुदायों ने इसे अपने बच्चों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। कई विश्वविद्यालयों में हिन्दी अध्ययन केंद्र स्थापित किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनाने के प्रयास भी समय-समय पर उठते रहे हैं। हिन्दी का यह वैश्विक विस्तार भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत कर रहा है। पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में हिन्दी का उपयोग बढ़ रहा है। इसलिए हिन्दी को केवल घरेलू भाषा के रूप में नहीं बल्कि वैश्विक संवाद की भाषा के रूप में भी विकसित करने की आवश्यकता है।

भविष्य की दिशा

हिन्दी के समक्ष चुनौतियां भले ही बड़ी हों लेकिन संभावनाएँ भी उतनी ही विशाल हैं। युवाओं को भाषा से जोड़ने के लिए आवश्यक है कि हिन्दी को रोजगार से जोड़ा जाए, डिजिटल प्लेटफार्म पर इसकी उपस्थिति बढ़ाई जाए, तकनीकी शब्दावली का विकास किया जाए और साहित्य तथा मीडिया में उच्च गुणवत्ता की सामग्री उपलब्ध कराई जाए। सरकारी स्तर पर हिन्दी के प्रोत्साहन के साथ-साथ निजी संस्थानों, मीडिया कंपनियों और शिक्षण संस्थानों को भी भाषा संरक्षण के प्रयासों में सहयोग करना चाहिए। स्कूलों में हिन्दी को रोचक ढ़ंग से पढ़ाया जाए, विज्ञान और तकनीक से जुड़े विषयों में हिन्दी शब्दों का प्रयोग किया जाए और अनुवाद की प्रक्रिया को तेज किया जाए। हिन्दी का विकास तभी संभव है, जब समाज भाषा को बोझ नहीं, गौरव का विषय माने। प्रत्येक नागरिक का यह कर्त्तव्य है कि वह अपनी मातृभाषा के सम्मान में योगदान दे। हिन्दी दिवस ऐसे प्रयासों को नई ऊर्जा देने का अवसर है।

वस्तुतः हिन्दी दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है बल्कि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता, राष्ट्रीय एकता और वैश्विक पहचान का प्रतीक है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं बल्कि आत्मीयता, परंपरा और राष्ट्र निर्माण का आधार है। महात्मा गांधी के विचारों से लेकर संविधान सभा के ऐतिहासिक निर्णय तक हिन्दी का सफर प्रेरणादायी रहा है। आज आवश्यकता है कि हम भाषा को केवल औपचारिकता में न सीमित रखें बल्कि इसे दैनिक जीवन में अपनाएं। हिन्दी का सम्मान, संरक्षण और प्रचार तभी संभव है, जब प्रत्येक भारतीय इसे अपनाकर गर्व से बोले। हिन्दी विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा है, हमें इसे भविष्य की भाषा बनाना है। हिन्दी दिवस का संदेश स्पष्ट है:- अपनी भाषा से जुड़ें, अपने राष्ट्र से जुड़ें, अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाएं।

Topics: हिन्दी की चुनौतियांहिन्दी दिवसहिंदी दिवस 2025Hindi Diwas 2025hindi diwas quoteshindi diwas wishes
श्वेता गोयल
श्वेता गोयल
शिक्षाविद्, डेढ़ दशक से अधिक समय से शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Hindi Diwas 2025

क्या आप जानते हैं हिंदी व्याकरण के असली निर्माता कौन थे?

Hindi Diwas 2025

Hindi Diwas 2025: सम्पूर्ण भारत की आत्मा की स्वरधारा है हिन्दी

Hindi Diwas

हिंदी दिवस: शिक्षण संस्थानों में हिंदी के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत

Hindi Diwas

हिन्दी दिवस विशेष: भारतीय सेना को एकजुट करने में हिंदी का प्रभाव

world Hindi Diwas

हिन्दी दिवस: हिन्दी को भी चाहिए घुसपैठियों से मुक्ति

श्री नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

हिन्दी ने विश्वभर में भारत को विशिष्ट सम्मान दिलाया : प्रधानमंत्री

Load More

ताज़ा समाचार

Shyama Prasad Mukherjee की मौत की जांच से Nehru क्यों डरे?

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमयी मौत की अबूझ पहेली

गिरफ्तारी, अत्याचार और भय के माहौल में गुजरती थी रातें – hitler gandhi

महबूबा मुफ्ती

खीर भवानी मंदिर में महबूबा मुफ्ती: क्या उन कुछ लोगों के नाम बताएंगी,  जिन्होंने हिंदुओं के खिलाफ मस्जिदों से नारे लगवाए

gyan bharatam mission tikamgarh ancient manuscripts jambudweep map found

टीकमगढ़ : सामने आईं 825 प्राचीन पांडुलिपियां, ब्रह्मांड विज्ञान और ‘जम्बूद्वीप’ के नक्शे ने विशेषज्ञों को चौंकाया

delhi sikh delegation meets cm pushkar-singh dhami chamoli police action investigation

देहरादून: दिल्ली सिख प्रतिनिधिमंडल ने की CM धामी से मुलाकात, चमोली घटना पर की चर्चा, DIG को सौंपी जांच

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

‘राष्ट्र अपने वास्तविक नायकों को कभी नहीं भूलता’

Pakistan Mardan Sikh Couple Murder Gurdwara Security Police Constable Arrested JIT Investigation

पाकिस्तान के गुरुद्वारे में सिख दम्पत्ति की हत्या: सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल शेरशाह मुख्य आरोपी

cm pushkar singh dhami directions chardham hemkund sahib yatra safety fake news

“श्रद्धालुओं का रखें विशेष ध्यान, भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई”- CM पुष्कर सिंह धामी

Punjab BJP Leader Petrol Bomb Attack Bathinda Gangster Shahzad Bhatti Police Investigation

पंजाब में बड़ा दुस्साहस: बठिंडा में BJP नेता के क्लीनिक पर बम से हमला, पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी ने ली जिम्मेदारी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies