बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला है। मामला है राहुल गांधी द्वारा पेश किए गए ‘वोट चोरी’ के दस्तावेजों का, जिन्हें लेकर भंडारी ने कहा है कि ये दस्तावेज भारत में ही नहीं बने। ये दस्तावेज विदेश से तैयार किए गए लगते हैं, खासकर म्यांमार के समय क्षेत्र से। ये आरोप काफी गंभीर हैं, क्योंकि राहुल गांधी ने इन्हें लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर पेश किया था।
दस्तावेजों की मेटाडेटा जांच
मातृभूमि की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदीप भंडारी ने इन दस्तावेजों की गहराई से जांच की। उन्होंने बताया कि इन फाइलों की मेटाडेटा – यानी फाइलों के पीछे का डेटा – चेक करने पर पता चला कि ये म्यांमार के समय क्षेत्र (+6:30 MMT) में बने हैं। म्यांमार तो भारत से सटा हुआ देश है, लेकिन इसका समय क्षेत्र भारत से थोड़ा अलग है। भंडारी का कहना है कि ये दस्तावेज भारत में नहीं, बल्कि विदेशी सिस्टम पर तैयार किए गए। और मजेदार बात ये है कि ये एडोब इलस्ट्रेटर सॉफ्टवेयर से एक्सपोर्ट किए गए थे। भंडारी ने साफ कहा कि VPN से समय क्षेत्र नहीं बदला जा सकता, क्योंकि सॉफ्टवेयर सिस्टम क्लॉक पर निर्भर करता है। ऊपर से, ये फाइलें गूगल ड्राइव से शेयर की गईं, तो मेटाडेटा बरकरार रहा।
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फाइल बनाने में इतना कम समय कैसे?
भंडारी ने और भी डिटेल दी। उन्होंने बताया कि इन दस्तावेजों को फाइनलाइज करने में बेहद कम समय लगा। अंग्रेजी वर्जन को 29 सेकंड में तैयार किया गया। हिंदी वर्जन में 31 सेकंड लगे, और कन्नड़ वर्जन में 37 सेकंड। इतने कम समय में तीनों भाषाओं के दस्तावेज बनाना संभव कैसे? भंडारी ने सवाल उठाया कि ये सब इतनी जल्दी कैसे हो गया? उनका मानना है कि ये कोई घरेलू काम नहीं, बल्कि विदेशी हाथों का कमाल है। उन्होंने ट्विटर (अब एक्स) पर पोस्ट करके इसे ‘राहुल गांधी का इंटरनेशनल वोट थेफ्ट टूलकिट’ कहा।
Rahul Gandhi got #VoteChori PDF prepared in Myanmar because of Soros?! pic.twitter.com/OfCZ9WYzQl
— Shashank Shekhar Jha (@shashank_ssj) September 11, 2025
विदेशी साजिश का आरोप
भंडारी ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ‘लोकतंत्र खतरे में’ की बात करते हैं, लेकिन उनका खुद का टूलकिट दिखाता है कि विदेशी हाथ भारत के विपक्ष की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं।” फिर उन्होंने पूछा, “राहुल गांधी को रिमोट कंट्रोल चलाने वाला विदेशी बॉस कौन था?” भंडारी ने कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी और उनके करीबी सर्कल को लोकतंत्र के लिए ‘बहुत खतरनाक’ बताया। उनका कहना है कि ये दस्तावेज न सिर्फ फर्जी लगते हैं, बल्कि ये साबित करते हैं कि विपक्ष की कहानी बाहर से रची जा रही है।
कैसे हुआ खुलासा
सबसे पहले बैकग्राउंड समझ लीजिए। 7 अगस्त 2025 को राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया, यानी चुनावों में वोटों के साथ छेड़छाड़ की बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है और इसके सबूत के तौर पर कुछ दस्तावेज जारी किए। ये दस्तावेज अंग्रेजी, हिंदी और कन्नड़ भाषाओं में थे। राहुल जी ने इन्हें अपनी आधिकारिक वेबसाइट rahulgandhi.in पर अपलोड कर दिया। उनका कहना था कि ये दस्तावेज साबित करते हैं कि कैसे सत्ता पक्ष वोटों को चुरा रहा है। लेकिन अब यही दस्तावेज विवाद का केंद्र बन गए हैं। प्रदीप भंडारी ने इन्हें ‘टूलकिट’ तक कह डाला, जो विपक्ष की स्क्रिप्ट विदेश से लिखी गई लगती है।
















