WhatsApp छोड़िये, 'स्वदेशी SAMBHAV' के बारे में जानिये, 'Operation Sindoor' में ऐसे बना था सेना का सहारा
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WhatsApp छोड़िये, ‘स्वदेशी SAMBHAV’ के बारे में जानिये, ‘Operation Sindoor’ में ऐसे बना था सेना का सहारा

सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में कमांड और संचार के लिए संभव फोन का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि इस दौरान हम व्हाट्सएप और अन्य संचार तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। अब SAMBHAV को और बेहतर स्तर पर अपग्रेड किया जा रहा है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Sep 11, 2025, 01:09 pm IST
inभारत, रक्षा

नई दिल्ली: पाकिस्तानी आतंकियों के छक्के छुड़ाने और उनके आतंकी ठिकानों को तबाह करने वाले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना ने सोशल मीडिया ऐप व्हॉट्सएप का इस्तेमाल नहीं किया था, बल्कि इसकी जगह एक स्वदेशी तकनीक सहारा बना थी। यह स्वदेशी तकनीक ‘संभव’ है। इस बात का खुलासा हाल ही में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने किया है। उन्होंने पहली बार बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना ने कैसे बातचीत की थी? उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में अपने स्वदेशी रूप से विकसित सुरक्षित मोबाइल इकोसिस्टम, संभव (SAMBHAV) का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही यह जानकारी भी दी कि सेना अब इसके अपग्रेड की तैयारी कर रही है।

ऑपरेशन सिंदूर में SAMBHAV से हुआ था कमांड और संचार
सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में कमांड और संचार के लिए संभव फोन का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि इस दौरान हम व्हाट्सएप और अन्य संचार तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। अब SAMBHAV को और बेहतर स्तर पर अपग्रेड किया जा रहा है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यह बात एआईएमए के 52वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन में बोलते हुए बताई थी। उन्होंने कहा था कि हम उपकरणों के क्रमिक विकास को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

अभेद है SAMBHAV, सेना 2024 से कर रही है उपयोग
SAMBHAV सेना के संचार को सुरक्षित बनाता है। SAMBHAV- सिक्योर आर्मी मोबाइल भारत विजन नामक नेटवर्क है। यह भारतीय सेना के संचार को सुरक्षित बनाता है। यह सुरक्षित मोबाइल इकोसिस्टम अभेद है और 5G नेटवर्क पर चलता है। यह इकोसिस्टम मल्टी-टियर एन्क्रिप्शन वाले 5G-रेडी हैंडसेट पर आधारित है। यह सेना में आत्मनिर्भर भारत के प्रयास को बढ़ावा देने के लिए शामिल किया गया था। साल 2024 से सेना इस संचार माध्यम का उपयोग कर रही है। इस मोबाइल इकोसिस्टम के बारे में साल 2024 में ही सैन्य अधिकारियों ने कहा था कि यह आत्मनिर्भर भारत के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है। इसे एंड टू एंड सिक्योर मोबाइल इकोसिस्टम (End-to-End Secure Mobile Ecosystem) के रूप में विकसित किया गया है।

चलते-फिरते फौरन कनेक्टिविटी प्रदान करता है SAMBHAV
इस मोबाइल इकोसिस्टम की खासियत है कि यह चलते-फिरत फौरन कनेक्टिविटी प्रदान करता है। ये एक तरह के मोबाइल हैंडसेट हैं जो 5G तकनीक पर चलते हैं और सेना में अभी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसमें से कम्युनिकेशन और दस्तावेज लीक नहीं हो सकते। सैन्य अधिकारी बिना किसी जोखिम के इन मोबाइल हैंडसेट के जरिए जरूरी दस्तावेज, फोटो और वीडियो शेयर कर सकते हैं। इससे पहले रक्षा सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी ANI ने कहा था कि पिछले साल अक्टूबर में चीन के साथ सैन्य वार्ता के अंतिम दौर के दौरान भी इन हैंडसेट का इस्तेमाल किया गया था। इस वक्त सेना में लगभग 30,000 संभव डिवाइस का उपयोग हो रहा है।

 

Topics: Indian Armyarmyindigenous technologyOperation SindoorArmy Chief General Upendra DwivediSambhav MobilePakistan
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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