विदेश मंत्री एस जयशंकर ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा इजराइली वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच की तीन दिवसीय भारत यात्रा पर सवाल उठाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एस जयशंकर ने बुधवार (10 सितंबर) को एक्स पर पोस्ट कर कहा, “इजराइल हर अच्छे-बुरे समय में भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। ऐसे मित्र के साथ हमारे राजनयिक संबंधों को रद्द करने की मांग करना, वो भी एक ऐसे मुख्यमंत्री द्वारा जिसने कभी भी डोकलाम विवाद और गलवान में हिंसक झड़प को लेकर चीन के खिलाफ कभी मुंह नहीं खोला, जिसका भारत से कोई लेना-देना नहीं है, बेहद शर्मनाक है।”
दरअसल, इजराइली वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच 8 से 10 सितंबर तक तीन दिनों की भारत यात्रा पर आए हैं। भारत और इजराइल ने सोमवार (8 सितंबर) को एक द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भारत और इजराइल के बीच निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
केरल के सीएम विजयन ने क्या कहा
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मंगलवार (9 सितंबर) को एक्स पर पोस्ट में कहा, “केंद्र सरकार द्वारा इजराइल के विवादास्पद दक्षिणपंथी कट्टरपंथी वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच को भारत में ऐसे समय में आमंत्रित किया गया, जब गाजा में नरसंहार हो रहा है। ये एजेंडे के मुख्य सूत्रधार हैं। मैं सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा करता हूं। नेतन्याहू सरकार के प्रतिनिधियों के साथ समझौते करना फिलिस्तीन के साथ, भारत की ऐतिहासिक एकजुटता के साथ विश्वासघात करने से कम नहीं है। फिलिस्तीन के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का मार्ग अभी भी अधूरा है, ऐसे में इजराइल के साथ सैन्य, सुरक्षा और आर्थिक संबंध बनाए रखना निंदनीय है।”
बीआईटी दोनों देशों के निवेशकों को मिलेगा उचित सुरक्षा का भरोसा
बता दें कि इजराइल ने साल 2000 से लेकर अभी तक 15 से भी अधिक देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें यूएई, जापान, थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। भारत और इजराइल मजबूत साझेदार हैं और दोनों देशों के बीच हर साल 4 बिलियन डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार होता है। वर्ष 2000 से 2025 तक इजराइल में भारत से 443 मिलियन डॉलर का निवेश था। वहीं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बात करें तो अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक इजराइल का योगदान 334.2 मिलियन डॉलर था। ऐसे में द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) से दोनों देशों के निवेशकों को उचित सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। यह मध्यस्थता के जरिए विवाद निपटान के लिए एक स्वतंत्र मंच देगा।

















