मध्य प्रदेश में इस बार गणेशोत्सव के दौरान भक्ति और उल्लास की खबरों के साथ ही तनाव और अशांति की खबरें भी सामने आई है। राजधानी भोपाल से लेकर बुरहानपुर और उज्जैन तक, गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूसों पर पथराव की घटनाओं ने यहां सामाजिक सौहार्द को चुनौती देने का काम किया है।
दरअसल, प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार आठ अगस्त की रात लगभग सवा नौ बजे गौतम नगर थाना क्षेत्र के आरिफ नगर इलाके में गणेश प्रतिमा विसर्जन का जुलूस आरिफ मस्जिद के पास से गुजर रहा था। तभी अचानक जुलूस पर पत्थर फेंके जाने लगे। पत्थरबाजी इतनी अचानक और तीव्र थी कि झांकी में स्थापित गणेश प्रतिमा खंडित हो गई। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को झकझोर दिया। कई श्रीगणेश भक्तों को भी पत्थर लगे हैं। आक्रोशित लोग तुरंत डीआईजी बंगला चौराहे पर जमा हो गए और चक्काजाम कर दिया। माहौल गर्माते देख पुलिस ने भारी बल तैनात किया है। इस बीच जाम में सैकड़ों वाहन फँस गए और शहर के प्रमुख मार्ग पर अव्यवस्था फैल गई।
साहिल बच्चा, यामीन और अलीम खान ने शुरू की पत्थरबाजी
इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने जांच में तीन संदिग्धों साहिल बच्चा, यामीन और अलीम खान की पहचान की है, वहीं मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है। इससे पहले भोपाल की घटना से एक दिन पहले बुरहानपुर जिले के बिरोदा गाँव से भी इसी तरह की खबर सामने आई, जहां रविवार की रात गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। तभी दूसरे समुदाय मुसलमानों की ओर से पत्थरबाजी हुई। इस हमले में आधा दर्जन लोग घायल हो गए। विवाद का मूल कारण यह था कि जिस स्थान पर श्रद्धालु रुके थे, उसे हिंदू पक्ष नवनाथ महाराज का स्थान मानता है, यहां पहले भी विवाद हो चुका है। बावजूद इसके, इस बार भी हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने अब तक सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य की पहचान की जा रही है।
बुरहानपुर एसपी आशुतोष बागरी ने कहा, “इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मौके पर 19 कैमरे लगे मिले, उनके डीवीआर पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए हैं, जो लोग इसमें लिप्त हैं उनकी हरकतें कैमरे में रिकार्डेड हैं, उन्हें देखकर के पुलिस अपनी कार्रवाई करेगी। इसमें किसी निर्दोष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, जो दोषी हैं वह किसी हालत में नहीं बचेंगे।” उन्होंने बताया कि अभी छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। शकील दाड़वी को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है, उसी ने सबसे पहला पत्थर मारा था, सात अन्य की पहचान पुलिस द्वारा की गई है, उन्हें भी जल्द पकड़ा जाएगा।
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महाकाल की नगरी भी कट्टरपंथियों से सुरक्षित नहीं
इधर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन और सीएम डॉ मोहन यादव का गृहक्षेत्र भी अछूता नहीं रहा है। यहाँ गणेश सवारी में जब ‘लव जिहाद’ विषय पर झांकी निकाली गई तो मुस्लिम समुदाय ने आपत्ति जताई। विरोध इतना बढ़ा कि झांकी पर पथराव तक हो गया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल लगाया। एसपी ने अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सौहार्द बनाए रखें। किंतु यह स्पष्ट हो गया कि धार्मिक जुलूस और परंपरागत झांकी भी अब टकराव का कारण बन रही हैं।
सुनियोजित तरीके से हिन्दू आस्था पर हमला
तीनों घटनाओं को जोड़कर देखें तो यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल स्थानीय विवाद का नहीं बल्कि एक सुनियोजित पैटर्न का है। गणेश विसर्जन जैसे शांतिपूर्ण और धार्मिक आयोजनों को निशाना बनाना सीधे-सीधे हिंदू आस्था को चोट पहुँचाने की कोशिश है। यह सवाल अब गंभीरता से उठने लगा है कि आखिर क्यों बार-बार हिंदू त्योहारों और जुलूसों को ही निशाना बनाया जाता है।
हिन्दुओं की आस्था और स्वतंत्रता पर हमला: VHP
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे हिंदू समाज पर लगातार हो रहे हमलों की श्रृंखला करार दिया। उन्होंने कहा, “ये हिंदू समाज की आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला हैं। बार-बार हिंदू समाज पर पथराव किया जाता है। यह मस्जिदें हैं, मौहल्ले हैं या युद्धशालाएँ, जिनसे इतने पत्थर निकलते हैं? ऐसे में विहिप मप्र की मोहन सरकार से यही मांग करती है कि अविलम्ब ऐसे मामलों पर अपराधियों के विरुद्ध कठोर दण्डात्मक कार्रवाई की जाए।”
इसके साथ ही विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री बंसल ने प्रशासन से सवाल किया कि जब राजधानी भोपाल जैसे शहर में विसर्जन जुलूस को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल सकती तो छोटे कस्बों और गाँवों में आम हिंदुओं का क्या हाल होगा। जागरण मंच ने साफ कहा कि यह केवल हिंदू आस्था पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की शांति पर हमला है। मंच ने यह भी मांग की कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई दुबारा ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे।”
दरअसल, यह बयान न केवल प्रशासन पर सवाल खड़ा करता है बल्कि उन ताकतों पर भी उंगली उठाता है जो लगातार धार्मिक आयोजनों को बाधित करने का काम कर रही हैं। वीएचपी के मध्य भारत प्रांत मंत्री जितेंद्र चौहान का आरोप है कि यह महज स्थानीय उपद्रव नहीं बल्कि सुनियोजित हिंसा है। आज दोषियों पर तेजी से मुकदमा चलाना और कठोर दंड सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, संवेदनशील इलाकों में भविष्य के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए।
दूसरी ओर हिंदू जागरण मंच ने भी इन घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंच से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन घटनाओं ने न केवल धार्मिक सौहार्द को चोट पहुँचाई है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है। राजधानी भोपाल में गणेश प्रतिमा पर पथराव और उसकी खंडित होना, बुरहानपुर में धार्मिक स्थल विवाद के बावजूद जुलूस पर हमला होना और उज्जैन जैसी धार्मिक नगरी में झांकी पर पत्थर फेंकना यह सब दिखाता है कि प्रशासन ने संभावित तनाव को भाँपने और रोकने में गंभीर चूक की है।

















