बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में तानाशाही चालू है। अवामी लीग के नेताओं को उठाया जाना और जेल भेजा जाना अभी तक जारी है। बांग्लादेश में अवामी लीग को प्रतिबंधित कर दिया गया है और उसके नेताओं को जेल भेजा जा रहा है और यहाँ तक कि 1971 के मुक्ति संग्राम में भाग लेने वाले सैन्य अधिकारियों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
आवामी लीग पर कहर
और जेल उन्हें देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में भेजा जा रहा है। सबसे दुखद यह है कि इस प्रकार की तानाशाही पर कहीं पर कोई भी बात नहीं हो रही है। न ही प्रतिबंध पर और न ही जेल भेजे जा रहे लोगों पर। ढाका में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट मोहम्मद मोनिरुल इस्लाम ने 6 सितंबर को एक सुनवाई के बाद आदेश जारी किया। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की मीडिया विंग ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस रिलीज में कहा कि अवामी लीग के पूर्व सांसद सद्दाम को गुरुवार रात को राजधानी के मोहम्मदपुर क्षेत्र से एक छापेमारी में गिरफ्तार किया था। उनके अतिरिक्त और सात लोगों को पूरे ढाका से छापेमारी में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें कथित रूप से राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में अचानक से निकाले गए जुलूसों के कारण गिरफ्तार किया गया था।
कानून व्यवस्था का हवाला दे रही पुलिस
पुलिस का कहना था कि वे लोग ऐसा करके देश की कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे थे। इस प्रेस रिलीज में यह भी बताए गया कि गिरफ्तार किये गए सभी लोगों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किये गए हैं। अवामी लीग के सांसद को पिछले वर्ष जुलाई में हुए प्रदर्शनों के दौरान हत्या के आरोप में सद्दाम को जेल भेजा गया है। पुलिस के अनुसार इन लोगों ने प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले नारे लगाए थे।
अवामी लीग के नेताओं के साथ निरंतर दुर्व्यवहार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और अवामी लीग के नेताओं द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि उनके साथ राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति हो रही है।
ढाका में 5 सितंबर को अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने अवैध फासीवादी यूनुस सरकार के इस्तीफे की मांग करते हुए एक जुलूस निकाला था। अवामी लीग के एक्स हैंडल पर साजीब वाज़ेद, जिनकी प्रोफ़ाइल में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के आईसीटी सलाहकार लिखा है, की पोस्ट को साझा किया गया है। इसमें साजीब ने लिखा कि किस तरह से एक लोकतान्त्रिक सरकार को गिराने के बाद अलोकप्रिय यूनुस सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इसके राजनीतिक विरोधी किसी भी तरह से चुनावी प्रक्रिया में भाग ही न ले पाएं।
उन्होनें इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ऑर्डनन्स 2025 के प्रस्तावित संशोधनों के विषय में लिखा है कि अब जो संशोधन होने जा रहा है, उसके अनुसार कोई भी व्यक्ति जिस पर औपचारिक रूप से आईसीटी के अंतर्गत आरोप होंगे वह चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा।

















