केरल में मानसून के साथ एक खतरनाक बीमारी ने दस्तक दी है, जिसे ‘ब्रेन-ईटिंग अमीबा’ के नाम से जाना जाता है। यह जानलेवा बीमारी Naegleria fowleri नामक सूक्ष्मजीव की वजह से होती है, जो नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश कर दिमाग को नुकसान पहुंचाता है। हाल ही में इस डेडली वायरस की चपेट में आने के कारण एक और मरीज की मौत हो गई थी। इसके बाद इस साल अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
क्या है ब्रेन-ईटिंग अमीबा?
Naegleria fowleri एक मुक्त-जीवित अमीबा है, जो गर्म और स्थिर पानी जैसे तालाबों, झीलों, कुओं और कम क्लोरीन वाले स्विमिंग पूल में पनपता है। यह मानसून या गर्मियों में ज्यादा सक्रिय होता है। यह अमीबा नाक के जरिए शरीर में घुसता है और तेजी से दिमाग तक पहुंचकर प्राइमरी अमीबिक मेनिन्जोएन्सेफलाइटिस (PAM) नामक बीमारी पैदा करता है। यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि वैश्विक स्तर पर इसका मृत्यु दर 97% तक है। भारत में पहले यह बीमारी बहुत कम देखी जाती थी, लेकिन हाल के वर्षों में केरल में इसके मामले बढ़े हैं।
केरल में स्थिति
2025 में केरल में अब तक 42 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से सात लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में कोझिकोड में एक तीन महीने के शिशु और एक 52 वर्षीय महिला की मौत ने चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, अगस्त में एक नौ साल की बच्ची भी इस बीमारी की शिकार हुई। पिछले साल 2024 में 36 मामले और नौ मौतें दर्ज की गई थीं। स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है और ‘पानी ही जीवन है’ अभियान शुरू किया है, जिसमें पानी के स्रोतों को क्लोरीन से साफ करने और जागरूकता फैलाने पर जोर दिया जा रहा है।
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लक्षण
इस बीमारी के लक्षण पानी के संपर्क में आने के 1 से 14 दिन बाद दिखते हैं। शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, उल्टी और जी मिचलाना आम है। बाद में गर्दन में अकड़न, तेज रोशनी से परेशानी, भटकाव, दौरे और कभी-कभी मतिभ्रम जैसे गंभीर लक्षण उभरते हैं। यह बीमारी इतनी तेजी से बढ़ती है कि मरीज की हालत कुछ ही दिनों में बिगड़ जाती है।
बचाव के तरीके
असुरक्षित पानी से बचें: तालाब, झील या गंदे पानी में नहाने से परहेज करें।
नाक को सुरक्षित रखें: तैरते समय नोज क्लिप का इस्तेमाल करें ताकि पानी नाक में न जाए।
साफ पानी का उपयोग: नाक की सफाई या धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उबला हुआ, फ़िल्टर किया हुआ या बोतलबंद पानी इस्तेमाल करें।
पूल की सफाई: स्विमिंग पूल में पर्याप्त क्लोरीन सुनिश्चित करें।
जागरूकता: सरकारी अभियानों का पालन करें और पानी के स्रोतों को साफ रखें।















